आर्थिक प्रगति में भारत चीन से आगे

Samachar Jagat | Thursday, 06 Sep 2018 02:33:32 PM
India ahead of China in economic progress

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भारत की अर्थव्यवस्था ने विकास रफ्तार में चीन को पीछे छोड़ दिया है। विनिर्माण व कृषि क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन के दम पर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 8.2 फीसदी रही। इस तिमाही में चीन की वृद्धि दर 6.7 फीसदी रही। इस रफ्तार से सबसे तेज वृद्धि करने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में भारत की दावेदारी मजबूत हो गई। बीते दो साल में यह सबसे ऊंची छलांग है। बीते तीन साल के दौरान दर्ज की गई यह सर्वाधिक विकास दर है।

 सरकार ने बीते सप्ताह शुक्रवार को इसके आंकड़े जारी किए। पहली तिमाही में इस रफ्तार के साथ भारत अब इंग्लैंड को पीछे छोड़ बहुत जल्द दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) के मुताबिक 2011-12 के स्थिर मूल्यों पर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 33.74 करोड़ रुपए रहा। जबकि पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह 31.18 लाख करोड़ रुपए था। यह वृद्धि 8.2 फीसदी रही। आधारभूत कीमतों के आधार पर तिमाही का सकल मूल्यवर्धन पिछले वित्त वर्ष के 29.29 लाख करोड़ रुपए की तुलना 8 फीसदी बढक़र 31.63 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया। यहां यह बता दें कि केंद्र सरकार ने 2015 में जीडीपी गणना के लिए आधारभूत वर्ष को 2004-05 से बदलकर 2011-12 कर दिया था। भारत की जीडीपी विकास दर पिछली तिमाही में 7.7 फीसदी थी। पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह आंकड़ा 5.59 फीसदी था। विनिर्माण, बिजली, गैस, जलापूर्ति व अन्य क्षेत्रों में विकास दर 7 फीसदी से ज्यादा बनी रही। इससे पहले 2014-15 की जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी में सर्वाधिक तेज वृद्धि हासिल की गई थी। तब जीडीपी की वृद्धि दर 8.4 फीसदी रही थी।

इस दौरान विनिर्माण क्षेत्र का सकल मूल्यवर्धन 13.5 फीसदी की दर से बढ़ा। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 1.8 फीसदी गिरा था। इस दौरान कृषि, वानिकी और मत्स्य पालन क्षेत्र पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के तीन फीसदी की तुलना में 5.3 फीसदी की दर से बढ़ा। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सकल मूल्य आधारित विकास दर (ग्रास वैल्यू एडेड या जीवीए) आठ फीसदी रही। जीडीपी के जरिए उपभोक्ताओं और मांग के नजरिए से किसी देश की आर्थिक गतिविधियों की तस्वीर साफ होती है। जबकि इसके उलट जीवीए के जरिए निर्माताओं या आपूर्ति के लिहाज से आर्थिक गतिविधियों की तस्वीर साफ होती है। जीडीपी के ताजा आंकड़ों से दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था का भारत का तमगा और सुरिक्षत हो गया है।

 चीन ने दूसरी तिमाही में 6.7 फीसदी की जीडीपी ग्रोथ दर्ज की है। यहां बता दें कि चीन में जनवरी से दिसंबर का वित्तीय कैलेंडर लागू है, जबकि भारत में अप्रैल से मार्च का वित्तीय कैलेंडर चलता है। इससे पहले विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक इसी साल भारत ने 2.6 ट्रिलियन डालर की अर्थव्यवस्था के साथ फ्रांस को पछाडक़र दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का तमगा हासिल किया। इस प्रकार वित्तीय वर्ष 2018-19 की पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत के साथ सारे अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। विकास दर नौ तिमाहियों के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। विकास दर ने हालांकि दो साल का रिकार्ड तोड़ा है, लेकिन रुपए में तेल में उछाल, व्यापार युद्ध जैसे बाहरी वजहों से रुपए में गिरावट पर आलोचना झेल रही सरकार को अंदरूनी मोर्चे पर राहत मिली है और बुनियादी उद्योगों की रफ्तार दो गुनी हो गई है। रुपए में गिरावट का दौर जारी है और वह पहली बार बीते सप्ताह 71 रुपए प्रति डालर तक पहुंच गया। 

कच्चे तेल के बढ़ते दाम और महीने के अंत में डालर की तेज मांग से रुपया लगातार कमजोर हुआ है। विश्लेषकों का कहना है कि अर्जेंटीना की मुद्रा पेसों में 12 फीसदी और तुर्की की मुद्रा लीरा में भी 2.5 फीसदी की गिरावट का असर भी रुपए पर पड़ा है और यह एशियाई बाजार में सबसे खराब प्रदर्शन वाली मुद्रा बन गई है। चीन-अमेरिका के बीच गहराते व्यापार युद्ध और डब्ल्यूटीओ (विश्व व्यापार संगठन) को अमेरिकी राष्ट्रपति की धमकी से भी निवेशकों में अस्थिरता बढ़ी है। पेट्रोल रिकार्ड तोड़ दिए हैं। 

जयपुर में सोमवार को पेट्रोल 82.20 और डीजल 75.99 रुपए प्रतिलीटर तक पहुंच गया है। पिछले एक माह में पेट्रोल की कीमत में 2 रुपए 21 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। जबकि डीजल के दाम दो रुपए 39 पैसे प्रति लीटर बढ़े हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि एक जनवरी से 31 अगस्त तक पेट्रोल का मूल्य 8.55 रुपए और डीजल की कीमत 10.51 रुपए बढ़ी है। एक जनवरी को पेट्रोल की कीमत 69.97 रुपए और डीजल के दाम 59.70 रुपए प्रति लीटर थे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के मूल्यों में इजाफा और डालर के मुकाबले रुपए की कीमत में गिरावट से पेट्रोलियम पदार्थांे की कीमतों में वृद्धि हुई है।

 सर्दियों के दिनों में अमेरिका सहित यूरोपीय देशों में तेल की खपत बढ़ती है। इसके साथ अमेरिका-ईरान विवाद से भी कच्चे तेल के दामों पर असर पड़ा है। ऐसे में भविष्य में फिलहाल दाम कम होने की संभावना कम है। कच्चा तेल पिछले दो माह में 77 डालर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। यही कारण है कि रुपया 69-70 के बाद 71 रुपए तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों के अनुसार अगले एक-दो माह मेें डालर के मुकाबले रुपया 72 से 73 तक जा सकता है।

 इस साल भारतीय मुद्रा में 10 फीसदी की गिरावट आई है। इधर सरकार विकास दर 8 फीसदी के ऊपर निकल जाने से सरकार बेहद उत्साहित है। वित्त मंत्रालय ने उम्मीद जताई है कि पूरे वर्ष के दौरान आर्थिक वृद्धि का आंकड़ा 7.5 फीसदी से ऊपर निकल जाएगा। इसी प्रकार राजकोषीय घाटा भी जीडीपी के 3.3 फीसदी से ऊपर नहीं जाएगा।

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