भारत-चीन का किसानों के हित में साझा मोर्चा

Samachar Jagat | Monday, 11 Sep 2017 03:13:25 PM
भारत-चीन का किसानों के हित में साझा मोर्चा

विकसित अमीर देशों के किसानों को भारी भरकम दी जा रही सब्सिडी खत्म करने की मांग का प्रस्ताव
किसानो को अमीर देशों में कृषि उत्पादों पर मिल रही भारी भरकम सब्सिडी के खिलाफ भारत और चीन ने संयुक्त मोर्चा खोल दिया है। दोनों देशों ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में इस तरह की सब्सिडी को खत्म करने की मांग करने का प्रस्ताव रखा है।
 

विकासशील देशों में किसानों को दी जा रही सब्सिडी को खत्म करने की अमीर देशों की नीति के खिलाफ मोर्चा लेते हुए भारत और चीन ने इसे भेदभाव वाली नीति बताया है। वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक भारत और चीन ने संयुक्त रूप से पिछले महीने डब्ल्यूटीओ में एक प्रस्ताव रखा है।

 इसमें विकसित देशों में किसानों को मिल रही सब्सिडी खत्म करने की मांग की गई है। 18 जुलाई को दिए गए इस प्रस्ताव में कहा गया है कि विश्व व्यापार संगठन के कुछ सदस्य विकासशील देशों में गरीब किसानों को मिल रही सब्सिडी पर सवाल खड़े करते रहे हैं। जबकि वे अपने यहां किसानों को एग्रीगेट मेजरमेंट ऑफ सपोर्ट (एएमसी) के नाम पर भारी मात्रा में कृषि सब्सिडी दे रहे हैं। 

भारत और चीन ने विश्व व्यापार में असंतुलन पैदा करने वाली विकसित देशों के कृषि सब्सिडी के प्रारूप को समाप्त करने की मांग की है। दोनों देशों की ओर से दिया गया यह संयुक्त प्रस्ताव इसलिए भी महत्वपूर्ण, क्योंकि दिसंबर में ब्यूनस आयर्स में डब्ल्यूटीओपी मंत्री स्तरीय बैठक होने वाली है। इस बैठक में दोनों देश अन्य विकासशील मुल्कों के समर्थन से इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाने की तैयारी कर रहे हैं। विश्व व्यापार संगठन में फैसला लेने वाली यह सबसे बड़ी संख्या है। इस समिति की हर दो साल बाद बैठक होती है। भारत और चीन के साझा प्रस्ताव में कहा गया है कि अमेरिका, यूरोपीय संघ और कनाडा जैसे विकसित देशों में किसानों को निरंतर भारी भरकम सब्सिडी दी जा रही है। 

जबकि विकासशील देशों में किसानों को सब्सिडी के लिए डब्ल्यूटीओ ने काफी ऊंची सीमा तय कर रखी है। ये देश सालाना अपने किसानों को 160 अरब डालर तक की राशि सब्सिडी के तौर पर मुहैया करा रहे हैं। भारत जैसे देश में सालाना एक किसान को 260 डालर की ही सब्सिडी के तौर पर अधिकांश विकासशील देशों को डब्ल्यूटीओ के तहत एएमसी की सुविधा नहीं दी गई है। कई विकसित देशों में उत्पाद की कुल लागत का 50 फीसदी और कई मामलों में तो 100 प्रतिशत तक सब्सिडी के तौर पर उपलब्ध कराया जाता है।

 इसके अलावा निर्यात में भी सब्सिडी दी जाती है। यही कारण है कि अमेरिका सेव भारत के हिमाचल और कश्मीर के सेब से सस्ता मिलता है। इसके उलट विकासशील देशों पर इसे 10 फीसदी के दायरे में रखने की बाध्यता है। किसानों के हितों के लिए भारत और चीन का यह साझा प्रयास स्वागत योग्य है।

 

यहां क्लिक करें : हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें, समाचार जगत मोबाइल एप। हिन्दी चटपटी एवं रोचक खबरों से जुड़े और अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!

loading...
ताज़ा खबर

Copyright @ 2017 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.