भारत की विकास दर दुनिया में सबसे तेज बनी रहेगी

Samachar Jagat | Saturday, 08 Jun 2019 03:07:49 PM
India's growth rate will be the fastest in the world

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विश्व बैंक की ताजा रिपोर्ट मोदी सरकार के लिए खुशियों भरी है। इसी सप्ताह मंगलवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार बेहतर निवेश और निजी खपत के दम पर भारत आने वाले समय में भी सबसे तेजी से वृद्धि करने वाली प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्था बना रहेगा। विश्व बैंक के अनुसार अगले तीन साल तक भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.50 फीसदी रह सकती है। विश्व बैंक की यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है, जब केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय जो कि भारत सरकार का एक संस्थान है, के आंकड़े सामने आने के बाद मोदी सरकार को आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही यानी जनवरी 2019 से मार्च 2019 की अवधि में देश की आर्थिक वृद्धि दर पांच साल के न्यूनतम स्तर 5.80 फीसदी पर आ गई। यह चीन की तुलना में कम है।

सीएसओ ने अपनी रिपोर्ट में कृषि एवं विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि की दर सुस्त पड़ने को आर्थिक गतिविधियों में गिरावट के लिए जिम्मेदार बताया था। इसके विपरीत विश्व बैंक ने मंगलवार को जारी अपने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में कहा है कि वित्त वर्ष 2018-19 में भारत के 7.20 फीसदी की दर से वृद्धि करने का अनुमान है। विश्व बैंक ने कहा है कि वर्ष 2018 में चीन की आर्थिक वृद्धि दर 6.60 फीसदी रही। इस दर से गिरकर 2019 में 6.20 फीसदी, 2020 में 6.10 फीसदी और 2021 में 6 फीसदी पर आने का अनुमान है।

इसके साथ ही भारत दुनिया की सबसे तेजी सेे वृद्धि करने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। रिपोर्ट के अनुसार 2021 तक भारत की आर्थिक वृद्धि दर चीन के 6 फीसदी की तुलना में डेढ़ प्रतिशत अधिक होगी। विश्व बैंक के अनुसार 2019-20 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.50 फीसदी पर रहने का अनुमान व्यक्त किया था। विश्व बैंक का यह भी कहना है कि इसके बाद अगले दो वर्ष तक वृद्धि दर की यही गति बरकरार रहने वाली है। विश्व बैंक का कहना है कि मुद्रास्फीति रिजर्व बैंक के लक्ष्य से नीचे है, जिससे मौद्रिक नीति सुगम रहेगी।

विश्व बैंक की इस उत्साहजनक रिपोर्ट के बाद सेवा क्षेत्र के बारे में आई एक रिपोर्ट के अनुसार देश में सेवा क्षेत्र यानी सर्विस सेक्टर की गतिविधियों की वृद्धि दर मई महीने में एक साल के निचले स्तर पर आ गई। यह गिरावट मई महीने के दौरान लोकसभा चुनाव के कारण नए कार्यों की वृद्धि प्रभावित होने से आई है। इसी सप्ताह बुधवार को जारी एक मासिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। निक्की इंडिया सर्विसेज बिजनेस एक्टीविटी का सूचकांक मई महीने में गिरकर 50.20 पर आ गया। यह पिछले 12 महीने में वृद्धि की सबसे धीमी दर है। अपै्रल महीने में यह 51 पर रहा था। हालांकि सेवा गतिविधियों की वृद्धि सुस्त पड़ने के बाद भी यह लगातार 12वां महीना है। 

जब सेवा क्षेत्र में विस्तार हुआ है। सूचकांक का 50 से ऊपर रहना विस्तार का संकेत देता है। जबकि 50 से नीचे का सूचकांक संकुचन का संकेतक है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गिरावट तात्कालिक भी साबित हो सकती है क्योंकि कंपनियों ने नियुक्तियां बढ़ा दी है और वे भविष्य के परिदृश्य के प्रति अधिक भरोसे में है। उद्योग और आंतरिक व्यापार विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार सेवा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 2018-19 में 36.5 फीसदी बढक़र 9.15 अरब डालर रहा। क्षेत्र में 2017-18 में 6.7 अरब डालर का एफडीआई आया था। सेवा क्षेत्र में वित्त, बैंक, बीमा, आउट सोर्सिंग, अनुसंधान एवं विकास, कुरिअर, प्रौद्योगिकी परीक्षण तथा विश्लेषक शामिल है। 

सरकार ने निवेश आकर्षित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसमें मंजूरी के लिए नियत समय सीमा तथा कारोबार सुगमता बढ़ाने के लिए प्रक्रियाओं को दुरूस्त करना शामिल है। सेवा क्षेत्र में एफडीआई प्रवाह में वृद्धि महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में इसका योगदान 60 प्रतिशत है। संपत्तियों के बारे में परामर्श देने वाली कंपनी सीबीआरई के अनुसार इस साल की पहली तिमाही में आवास क्षेत्र में सुधार के संकेत दिखने लगे हैं। सीबीआरई के अनुसार आलोच्य तिमाही में सात मुख्य शहरों दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे में इस साल जनवरी से मार्च के दौरान 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई।



 

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