विपक्ष का भारत बंद मोदी सरकार को चेताएगा

Samachar Jagat | Monday, 10 Sep 2018 01:43:35 PM
India's opposition to the opposition will warn Modi government

भारत का लोकतंत्र खतरे में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सर्वोच्च न्यायालय के चार जजों द्वारा कहना क्या दर्शाता है? पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें हों, कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों द्वारा राफेल में घोटाले की जांच के लिए जे पी सी गठित करने  की मांग हो या फिर अमित शाह के बेटे द्वारा 50 हजार रुपए से 80 करोड़ बनाने की  बात हो व देश को अरबों रुपये का पलीता लगा चौकसी, माल्या, मोदी की चौकड़ी हो।

मोदी सरकार  कांग्रेस सहित किसी को भी इन  मुद्दों पर जवाब देने को तैयार नहीं दिखती? ऐसे में कांग्रेस की अगुवाई में 10 सितम्बर को आंदोलन की तैयारी कर ली है व विपक्ष कांग्रेस का साथ देने को तैयार हो मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों को जनता के सामने लाने का संकल्प ले चुके हैं और भारत बंद का ऐलान कर दिया है।

आसमान छूती महँगाई और लगातार बढ़ रहे पेट्रोल-डीजल  के दामों को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस के नेतृत्व में मोदी सरकार को विरोध करने के लिए दस सितम्बर को सडक़ पर उतरेंगे, वहीं इस दिन मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों को उजागर करने का दायित्व निभाएंगे, जो जनहित  में उठाया कदम माना जा सकता है।

अशोक गहलोत ने सही कहा कि यू पी ए सरकार के कार्यकाल में जब पेट्रोल व डीजल के दाम बढ़े तो मनमोहन सिंह सरकार ने राज्य सरकारों से टैक्स कम करने को कहा था और कांग्रेस की सरकारों ने अपने टैक्स कम कर आम आदमी को राहत दी थी। 

क्या मोदी सरकार बीजेपी की राज्य सरकारों को टैक्स कम करने की कहने में सक्षम नहीं?
क्या बार बार पेट्रोल व डीजल की बढ़ती कीमतें आम आदमी की परेशानी का सबब नहीं बन रही?
क्या मोदी सरकार जनहितों से कोई वास्ता नहीं रखती?
रुपया गिरकर 72 रुपए 12 पैसे पर पहुंचना व पहली बार डॉलर 72 रुपए से भी महँगा होना सरकार की अच्छी कार्यप्रणाली का सबूत है?

क्या 2014 से पहले रुपए में गिरावट को लेकर भाषण देने वालों ने अब मौन धारण कर लिया है?
अब वे क्यों मौन बैठे हैं?
रुपये में गिरावट को लेकर वित्त मंत्री से पूछो तो वे अंतरराष्ट्रीय कारणों की दुहाई देकर पल्ला झाड़ लेते हैं। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला का यह बयान सही ही है।
जब कच्चे तेल  की कीमतें  कम हो रही हैं तो पेट्रोल-डीजल कीमतों में बढ़ोतरी क्यों?
आज देश के कई राज्यों में भाजपा की सरकार हैं, मगर उसने अभी तक आम आदमी को पेट्रोल, डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी पर अंकुश की कोई पहल न की है, वहीं बीजेपी ने आम आदमी को राहत देने की दिशा में कोई कदम न उठाया है, जो चिन्तनीय है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने सही ही  कहा है कि जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है, उसने पेट्रोल पर 28 रुपए और डीजल पर 27 रुपए की बढ़ोतरी की है।

इसके अलावा उसने पेट्रोल पर 9 रुपए से अधिक तथा डीजल पर 19 रुपए से अधिक की एक्साइज ड्यूटी अलग से बढ़ा दी। सुरजेवाला ने तंज  किया कि एक तरफ देश में पेट्रोल 80 रुपये लीटर बेचा जा रहा है और दुनिया के 15 से अधिक देशों को यही पेट्रोल 37 रुपए तथा डीजल 34 रुपए प्रति लीटर  बेचा जा रहा है।

पेट्रोल, डीजल  के दामों में बढ़ोतरी से खजाने में आए ग्यारह लाख करोड़ रुपए (11 लाख करोड़ रुपए) को ईंधन लूट करार देना सही लगता है। निश्चित रूप से पेट्रोल, डीजल की कीमतों में बार-बार की बढ़ोतरी से देश की जनता त्रस्त है, वहीं, मोदी सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी नजर आती  है। महँगाई आसमान छू रही है। यू पी ए सरकार के दौरान 400 रुपए में मिलने वाला गैस सिलेंडर आज 800 रुपए मिल रहा है।

उज्ज्वला योजना भी धत्ता साबित हुई है।
इस योजना की लाभार्थियों को भी लूटा  है।

राफेल घोटाले पर सरकार ने चुप्पी साध ली है। राजस्थान सहित अन्य राज्यों में बीजेपी की सरकारों की कार्यप्रणाली भी जनता को रास नहीं आ रही। भ्रष्टाचार, बढ़ती महँगाई, किसानों द्वारा आत्महत्या की घटनाओं में इजाफा, युवापीढ़ी को बेरोजगारी का दंश झेलना, सरकारी पैसे का दुरुपयोग, कानून-व्यवस्था की बदहाली, नारियों में असुरक्षा की भावना व दुष्कर्म की बढ़ती घटनाएं, बढ़ते सडक़ हादसे व अस्पतालों की बदहाली के मुद्दे ऐसे हैं,  जो सबकी परेशानी बनते नजर आते हैं।

10 सितम्बर को भारत बंद का कांग्रेस की अगुवाई में विपक्ष को साथ लेकर किया ऐलान निश्चित रूप से सही कदम है, वहीं मोदी सरकार को  चेताने  के लिए जनहित में उठाया कदम है।

भारत बंद का ऐलान मोदी सरकार को जनहित में फैसले लेने का दायित्व निभाएगा, वहीं जनता का सरकार की नीतियों के खिलाफ आक्रोश को दर्शाता नजर आएगा।
(ये लेखक के निजी विचार है) 



 

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