भारत अंतरिक्ष स्टेशन बनाएगा

Samachar Jagat | Wednesday, 19 Jun 2019 03:23:51 PM
India will create space station

अंतरिक्ष कार्यक्रम में कई मुकाम हासिल कर चुका भारत अब अपना अंतरिक्ष स्टेशन बनाएगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चेयरमैन के. शिवन ने अंतरिक्ष विभाग के मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह के साथ संयुक्त प्रेस कांफे्रंस में बीते सप्ताह गुरुवार को यह घोषणा की। अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत चौथा देश होगा, जो यह मुकाम हासिल करेगा। शिवन ने कहा कि गगनयान कार्यक्रम को विस्तार देते हुए यह कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है। गगनयान के जरिए इससे 2022 में तीन यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजेगा। इसके बाद अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना की जाएगी। 

अंतरिक्ष स्टेशन की क्षमता करीब 20 टन होगी। इसमें किसी की साझेदारी नहीं होगी। स्टेशन में यानों के मिलने, उपग्रहों के उतारने व वैज्ञानिकों के रहने की सुविधा होगी। दरअसल मानव मिशन के बाद अगला कदम वहां रह कर शोध का होगा। इसके लिए स्पेस स्टेशन की जरूरत है। यहां यह बता दें कि अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना अंतरिक्ष की निकटवर्ती कक्षा में की जाती है। जो धरती से करीब 1200 किलोमीटर तक ऊंचाई होती है। लेकिन आमतौर पर अंतरिक्ष स्टेशन पर 400-500 किलोमीटर की ऊंचाई पर होते हैं।

 अंतरिक्ष स्टेशन बनने से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अंतरिक्ष में रहकर वैज्ञानिक महत्वपूर्ण शोध कर सकेंगे। दूसरे अंतरिक्ष युद्ध की स्थिति में इस स्टेशन की भूमिका महत्वपूर्ण होगी और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। देश के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ के लिए अंतरिक्ष यात्रियों के चयन का काम इस साल के अंत तक पूरा हो जाएगा। अंतरिक्ष विभाग के राज्यमंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि इसरो ने वर्ष 2022 में देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ के पहले अंतरिक्ष में पहला मानव मिशन भेजने का फैसला किया है। यह पूरी तरह से भारतीय मिशन होगा। इसके लिए अंतरिक्ष यात्रियों के चयन की प्रक्रिया जारी है। मिशन की तैयारी की निगरानी के लिए गगनयान राष्ट्रीय सलाहकार परिषद का गठन किया गया है। तथा 6 महीने में चयन पूरी कर ली जाएगी। डॉ. शिवन ने बताया कि दिसंबर 2021 में गगनयान के प्रक्षेपण की योजना है।

 तीन अंतरिक्ष यात्री तीन से सात दिन तक अंतरिक्ष में रहेंगे। फिलहाल अंतरिक्ष में कुल दो स्टेशन काम कर रहे हैं। जिसमें एक अमेरिका, रूस, यूरोपीय संघ और जापान के आपसी सहयोग के साथ चल रहा आईएसएस यानी अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन है। दूसरा है तिआनगोंग-2 जो अकेले चीन का है। हालांकि चीन का तियानगोंग-2 आईएसएस से काफी छोटा है, लेकिन इससे इतना तो साफ है ही कि छोटे से शुरुआत करके बड़ी कामयाबी हासिल की जा सकती है। अपनी इसी क्षमता के बूते चीन यह कह सकने की स्थिति में है कि अंतरिक्ष में उसका अपना स्टेशन है।

इसी तर्ज पर इसरो प्रमुख के शिवन ने कहा कि हम भी अभी एक छोटे मॉड्यूल का ही प्रक्षेपण करेंगे, लेकिन हमारी यह महत्वाकांक्षा है कि हमारा अपना एक अंतरिक्ष स्टेशन हो, कोई भी छोटे से शुरू करके ही बाद में उसे विस्तार देता है। आकार और क्षमता में भारत का स्टेशन जो भी होगा, मगर यह भारत का अपना होगा और यह आईएसएस का हिस्सा नहीं होगा। जिसके तहत भारत अंतरिक्ष में मानव युक्त मिशन भेजने की योजना पर काम कर रहा है। इस बड़ी और महत्वाकांक्षी योजना के मूर्तरूप लेने के बाद देश अब ज्यादा संख्या में मानव मिशन अंतरिक्ष में भेज सकेगा। जाहिर है यह कदम बढ़ाने का हौसला है और यह बना रहा तो इसमें कोई शक नहीं कि कुछ सालों बाद हम अंतरिक्ष में स्टेशन कायम करने वाले विकसित देशों के बराबर खड़े होंगे। 



 

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