कश्मीर नहीं कश्मीर में आतंक है समस्या

Samachar Jagat | Saturday, 02 Mar 2019 11:36:21 AM
Kashmir does not have panic in Kashmir

भारत के कड़े रूख और भारी अंतर्राष्ट्रीय दबाव कारण पाकिस्तान सरकार को भारतीय वायु सेना के विंग कमांडर अभिनन्दन वद्र्धमान को भारत को लौटाने का फैसला लेने को बाध्य होना पड़ा। यह सुखद तथ्य है कि सीमा पर भारी तनाव और युद्ध के हालात होने के बावजूद भारत सरकार ने न केवल विंग कमांडर अभिनन्दन की वापसी को लेकर पाकिस्तान की शर्ते रखने के प्रयास को दरकिनार किया बल्कि पाकिस्तान सरकार को यह चेतावनी भी दी कि अगर अभिनन्दन के खरोंच भी आई तो पाकिस्तान को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। 

पाकिस्तान को साफ तौर पर बता दिया गया था कि विंग कमांडर की वापसी को लेकर किसी तरह की उसकी सौदेबाजी काम नहीं आएगी और उसे जिनेवा संधि के अनुसार हर हालत में विंग कमांडर को सुरक्षित भारत को लौटाना होगा। इस सारे प्रकरण में इस बात पर भी गौर करने की बात है कि पाकिस्तान पर इस मामले में जबर्दस्त अंतर्राष्ट्रीय दबाव था। इस बात के संकेत अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जब तब दिए गए बयानों से भी लगता है, जिन्होंने कई घंटे पहले बयान दिया था कि भारत -पाक के तनाव के बीच जल्दी ही एक अच्छी खबर आ सकती है।

ट्रंप के इस बयान के कुछ ही घंटे बाद पाकिस्तान संसद में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने सूचना दी कि भारत का एक पायलट हमने पकड़ा है जिसे शांति की पहल करने के तौर पर कल भारत को सौंप दिया जाएगा। पाकिस्तानी संसद में दिए गए अपने बयान में इमरान खान ने ये भी बताया था कि उन्होंने कल शाम से ही भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से टेलीफोन पर बात करने की कोशिश की थी लेकिन बात हो नहीं पाई। 

इससे भारत के उस कड़े रूख की भी पुष्टि हो गई थी जिसमें पाकिस्तान को स्पष्ट शब्दों में कहा गया था कि बिना शर्त जिनेवा संधि की शर्तो की अनुपालना कर विंग कमांडर को सुरक्षित रूप से भारत को सौंप दिया जाए अन्यथा उसके गंभीर परिणाम स्वीकार करने के लिए पाकिस्तान तैयार करें। ध्यान रहे गुरूवार को शाम पांच बजे भारतीय सेना के तीनों कमानों के प्रमुख एक साथ प्रेस कांफ्रेंस करने वाले थे लेकिन उससे पहले इमरान खान के द्वारा विंग कमांडर को भारत को सौंपने की घोषणा करने के बाद इस पे्रस कांफ्रेंस को दो घंटे के लिए टाल दिया गया।

हो सकता है कि अगर इमरान खान भारतीय पायलट को छोड़ने की घोषणा नहीं करते तो शायद इन तीन कमांडरों की तरफ से कोई गंभीर घोषणा की जाती। लेकिन बाद में हुई प्रेस कांफ्रेंस में इन तीन क मांडरों ने वे सुबूत ही पेश किए जिनसे यह पुष्ट होता है कि पाकिस्तान ने भारतीय सीमा के भीतर हवाई हमले में एफ-16 विमानों का इस्तेमाल किया था और उनमें से एक विमान को ध्वस्त किया था। साफ जाहिर है कि पाकिस्तान शुरू से लगातार झूंठ पर झूंठ बोले जा रहा है लेकिन उन झूंठ की कलई भी लगातार खुलती जा रही है। असल में कश्मीर की समस्या ही ये ही कि पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन पिछले कई वर्षो से कश्मीर में अस्थिरता के हालात पैदा कर रहे हैं। दूसरे शब्दों के आतंकी संगठनों के जरिए पाकिस्तान खूद कश्मीर में भारत के खिलाफ छद्म युद्ध छेड़ रखा है । इस बात को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने पाकिस्तान की संसद में दिए अपने बयान में भी अपरोक्ष रूप से स्वीकार किया है। 

पाकिस्तानी संसद में दिए गए इमरान खान के बयान के जो वीडियों सामने आए है उनके अनुसार इमरान खान ने कहा कि वे करीब बीस साल पहले किसी कान्क्लेव में भाग लेने हिन्दुस्तान गए थे। उन्होंने वहां देखा कि वहां कश्मीर के भी कुछ नेता आए हुए थे और वहां की कार्रवाई से उन्हें लगा था कि कश्मीर में सभी तरफ से भारत के साथ रहने की आवाज उठाई जा रही थी। लेकिन आज हम देखते है कि कश्मीर में आत्मघाती वारदातें हो रही है । अपने इसी बयान से इमरान खान को यह समझ लेना चाहिए कि बीस साल पहले ही नहीं आज भी कश्मीर का हर बंदा भारत के साथ है और कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग समझता है। केवल पाकिस्तान में खड़े किए गए और पल रहे आतंकी संगठन ही सीमा पार कर और कश्मीर के कुछ युवकों को बरगला कर आतंकी वारदातें करते है। वरना हालात तो आज भी कश्मीर में वैसे ही है जैसे बीस साल पहले थे। वास्तविकता ये है कि कश्मीर को लेकर जो भी समस्या पैदा हुई है वह बाहरी दखल को आमंत्रित करने के कारण ही पैदा हुई है। यह इमरान खान की ही नहीं पाकिस्तान के हर हुक्मरान का ये भ्रम रहा है कि वे कश्मीर को हड़प लेंगे लेकिन सन 1947 में देश की आजादी के समय से ही उनकी ये हसरत पूरी नहीं हो पाई है। आजादी के समय तत्कालीन पाकिस्तानी हुक्मरानों ने कबाइलियों की सहायता से कश्मीर को अपने कब्जे में लेने के लिए लड़ाई छेड़ी थी। 1947 में भारत-पाकिस्तान के बीच प्रथम युद्ध भी कश्मीर के लिये ही हुआ था।

 इस लड़ाई की शुरूआत पाकिस्तान ने अपने सैनिकों को घुसपैठियों के रूप में भेज कर इस उम्मीद में की थी कि कश्मीर की जनता भारत के खिलाफ विद्रोह कर देगी। इस अभियान का नाम पाकिस्तान ने युद्धभियान जिब्राल्टर रखा था। पांच महीने तक चलने वाले इस युद्ध में दोनों पक्षों के हजारों लोग मारे गये। इस युद्ध का अंत संयुक्त राष्ट्र के द्वारा युद्ध विराम की घोषणा के साथ हुआ। तब भारत सरकार ने इसमें दखल देने के लिए संयुक्त राष्ट्र को आमंत्रित किया और कश्मीर का एक तिहाई हिस्सा पाकिस्तान के नियंत्रण में रह गया। सन् 1965 में पाकिस्तान ने घुसपैठियों के रूप में कश्मीर पर हमला किया था । पांच माह तक चले इस युद्ध में पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी। पाकिस्तान के शासको को तब ये विश्वास था कि स्थानीय नागरिक उसके समर्थन में आ जाएंगे लेकिन उसे इसमें असफलता हाथ लगी।

बाद में रूस के दखल से ताशकंद में भारत और पाकिस्तान में समझौता होने के कारण यह युद्ध खत्म हुआ। 1971 का भारत-पाक युद्ध भारत एवं पाकिस्तान के बीच एक सैन्य संघर्ष था। इसका आरम्भ तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान के स्वतंत्रता संग्राम के चलते हुआ था एवं ढाका समर्पण के साथ समापन हुआ था। युद्ध का आरम्भ पाकिस्तान द्वारा भारतीय वायुसेना के11 स्टेशनों पर रिक्तिपूर्व हवाई हमले से हुआ, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय सेना पूर्वी पाकिस्तान में बांग्लादेशी स्वतंत्रता संग्राम में बंगाली राष्ट्रवादी गुटों के समर्थन में कूद पड़ी। मात्र 13 दिन चलने वाला यह युद्ध इतिहास में दर्ज लघुतम युद्धों में से एक रहा। इसी युद्ध में पूर्वी पाकिस्तान आजाद होकर बांग्लादेश बना । यह हार पाकिस्तानी शासकों को आज तक भी चुभ रही है। 

आतंकी संगठनों को प्रश्रय देने और उन्हें भारत के खिलाफ कार्रवाई करने को इसी कारण सेना और आईएसआई सक्रिय रही है। कारगिल में भी पाकिस्तान सेना को भारतीय सेना ने बड़ी बहादुरी से खदेड़ दिया था। वर्तमान में हालात ये है कि पाकिस्तान आर्थिक रूप से खस्ता हालत में है और भारत से विवाद के मामले में वह दुनिया में अलग थलग पड़ गया है। उस हालत में भारत को अपना रूख कड़ा ही रखना होगा। अमेरिका समेत अन्य देश हालांकि इस मामले में पाकिस्तान पर दबाव डालने के आगे रहे हैं लेकिन भारत को इस बात से सावधान रहना होगा कि ये बाहरी दखल हमारी आतंक के खिलाफ लड़ाई को कमजोर न कर दें। भारत ने हमेशा यह कहा है कि कश्मीर हमारा अभिन्न अंग है और इस संबंध में किसी से बात करने का कोई तुक नहीं है।पाकिस्तान से हमारा विवाद कश्मीर को लेकर नहीं है बल्कि कश्मीर में आतंकी वारदातों में पाकिस्तान के लिप्त होने के कारण है। हमें हर परिस्थिति मेें इसी पर कायम रहने की आवश्यकता है।



 

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