कठुआ गैंगरेप-हत्या कांड मामला संयुक्त राष्ट्र तक पहुंचा

Samachar Jagat | Tuesday, 17 Apr 2018 09:50:13 AM
Kathua gangrape-murder case reached United Nations case
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यह हमारे लिए बहुत ही शर्मनाक और डूब मरने की बात है कि कठुआ गैंगरेप-हत्याकांड मामला संयुक्त राष्ट्र तक पहुंच गया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने 8 साल की बच्ची के साथ बार-बार सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या किए जाने को भयावह घटना बताया है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि प्रशासन उस जघन्य अपराध के दोषियों को उचित सजा देगा। इसी बीच दुष्कर्म आरोपियों के पक्ष में हुई रैली में रासना गांव गए भाजपा के दोनों मंत्री जम्मू-कश्मीर सरकार से बाहर हो गए। भाजपा ने इनके इस्तीफों को हरी झंडी देते हुए मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को भेज दिया। जिसे उन्होंने मंजूर कर लिया। संयुक्त राष्ट्र तक इस मामले के पहुंचने के बाद जम्मू-कश्मीर सरकार ने इस संबंध कार्यवाही के लिए आवश्यक कदम उठाए है।

 मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कठुआ कांड के आरोपी 4 पुलिस कर्मियों को बर्खास्त कर दिया है। इनमें एक सब इंस्पेक्टर एक हेड कांस्टेबल और दो स्पेशल पुलिस आफिसर है। मुख्यमंत्री ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर इस मामले पर शीघ्र निर्णय के लिए फास्ट टे्रक कोर्ट गठित करने की मांग की है। जम्मू क्षेत्र के कठुआ जिले में आठ साल की बच्ची के साथ दरिंदगी और फिर उसकी हत्या के मामले में दायर को आरोप पत्रों में जो खुलासा हुआ है, वह वीभत्स और शर्मनाक है। और भी दुखद यह है कि इस मामले को अब पूरी तरह से सांप्रदायिक और राजनीतिक रंग दे दिया गया है। हालांकि पहली नजर में ही मामला सीधा-साधा पूर्व नियोजित अपराध का है।

 सबसे हैरान करने वाली बात तो यह है कि इस पूरी घटना को अंजाम देने में पुलिस न केवल अपराधियों के साथ मिली रही, बल्कि आपराधिक कृत्य में भी भागीदार बनी। घटना इस साल दस जनवरी की है, जब बक्करवाल समुदाय की आठ साल की एक लडक़ी को कुछ लोगों ने अगवा कर एक मंदिर में छिपा लिया था और वहां उसके साथ कई बार सामूहिक बलात्कार किया गया। उसके बाद उसकी हत्या कर दी गई। शव को जंगल में फेंक दिया गया और उसके सिर को पत्थर से कुचल दिया गया। यह सब फोरेसिक जांच में साबित हो चुका है। आरोप पत्र में पुलिस ने कहा है कि घटना का असली साजिशकर्ता मंदिर का पुजारी था, जिसने अपने बेटे, भतीजे, पुलिस के एक एसपीओ यानी विशेष पुलिस अधिकारी और उसके दोस्तों के साथ हफ्ते भर इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया। इसके अलावा दो पुलिस वालों ने पुजारी से घटना के सबूत नष्ट करने के लिए चार लाख रुपए लिए। इस घटना ने जम्मू-कश्मीर की राजनीति में तूफान ला दिया है।

 राज्य सरकार में खेमेबंदी उजागर हो गई है। भाजपा खुलकर आरोपियों के पक्ष में आई तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने पीडि़त परिवार को न्याय दिलाने की बात कहते हुए भरोसा दिलाया है कि कानून अपना काम करेगा। चौंकाने वाली बात तो यह है कि आरोपियों के समर्थन में जो रैली निकाली गई और बंद रखा गया उसमें भाजपा के दो मंत्री भी शामिल हुए। घटना को अंजाम देने वाले डोगरा समुदाय के हैं और हिन्दूवादी संगठनों से जुड़े हैं। इस घटना को लेकर संयुक्त राष्ट्र तक में आवाज उठने के बाद भाजपा आलाकमान ने दोनों मंत्रियों का त्याग पत्र मंजूर करने और उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर किए जाने के लिए मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती कह दिया है। जैसा कि पूर्व में ही लिखा जा चुका है। इस घटना में भागीदार पुलिस कर्मियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि कुछ वकीलों ने पुलिस को आरोप पत्र दाखिल करने से रोकने की कोशिश की। 

कठुआ की घटना जमीन विवाद को लेकर बताई जाती है, जिसे पुजारी खाली कराना चाहता था। इसीलिए उसने पूरी वारदात को अंजाम दिया। बक्करवाल मुसिलम समुदाय की अनुसूचित जनजाति है। प्रदेश की कुल मुस्लिम आबादी में गुर्जर और बक्करवाल ग्यारह फीसदी है। ये पशुपालक है और इनका कोई स्थायी ठिकाना नहीं है। ये लंबे समय से केंद्रीय वनाधिकार कानून 2006 को जम्मू-कश्मीर में भी लागू करने की मांग कर रहे हैं। कठुआ कांड दहला देने वाला है।

इस कांड को लेकर जिस तरह की प्रतिक्रियाएं हो रही है, उससे प्रदेश की राजनीति में सांप्रदायिकता को ही बढ़ावा मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस घटना का संज्ञान लेगा। जम्मू के वकीलों द्वारा आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर किए जाने को रोके जाने पर नाराजगी जताई गई है। आशा है संयुक्त राष्ट्र महासचिव द्वारा अपराधियों को दंडित किए जाने की उम्मीद जताई है, जम्मू-कश्मीर सरकार उस पर खरी उतरेगी और पीडि़त पक्ष को न्याय दिलाने के लिए पूरा प्रयास करेगी।

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