आओ शांति स्थापना में अपना भरसक योगदान दें

Samachar Jagat | Monday, 10 Dec 2018 04:38:29 PM
Let's make a great contribution to the peace establishment

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आज देखों वहीं बेचैन, अशांत और परेशान दिखाई दे रहा है। इसका कारण पारिवारिक, सामाजिक, आर्थि, असुरक्षा, राजनैतिक, आतंक या फिर व्यक्तिगत ही क्यों न हो, लेकिन किसी न किसी कारण से वहीं परेशान जरूरत है इसमें कोई दोराय नहीं है। व्यक्ति का प्रशान्त होना, असुरक्षित होना और प्राशंकित होना सपरिवार प्रमुखों, समाज प्रमुखों, राज्य प्रमुखों और राष्ट्र प्रमुखों के लिए यक्ष प्रश्र है, उनकी जिम्मेदारी और काबलियम पर एक बड़ा सवालिया निशान है।


परिवार के सदस्यों के आचरण व्यहार उज्जवल रखे तो किसी हद तक परिवार के सदस्यों के आचरण सम्बन्धी परेशानियां दूर हो जायेगी। यदि परिवार प्रमुख यह वादा करें कि मै कभी भी भ्रष्ट आचरण नहीं करूंगा, गलत काम नहीं करूंगा, हिंसा नहीं करूंगा और किसी भीप्रकार के अमानवीय कार्य नहीं करूंगा तो फिर इसका सीधा सा तात्पर्य यही हुआ कि उसकेपरिवार को कोई भी सदस्य चोरी, जारी हत्या डकैती और अन्य किसी प्रकार के गलत काम में कभी भी लिप्त नहीं होगा। सारी समस्याओं की जड़ स्वयं व्यक्ति है और सारे समाधानों की जड़ भी व्यक्ति स्वयं हैं।

कोई भी परिवार प्रमुख अपनी स्वयं की जिम्मेदारी को समाज पर देश पर या फिर किसी भी संस्था और सरकार पर नहीं डाल सकता। सारी समस्याऐं अपनी जिम्मेदारी को नहीं निभाने से आती है जिम्मेदारी से हटने से आती है और अपनी जिम्मेदारी को दूसरों पर डालने से आती है। यदि अपने आपको समाज प्रमुख समझने वाला व्यक्ति पूरे समाज की नजरों में उज्जवल है, और एक संम्रान्त जिम्मेदार नागरिक है तो इस प्रकार के जिम्मेदार और स्वतंत्र समाज प्रमुख का प्रभाव संपूर्ण समाज पर पड़ता हैं। 

सकारात्मक प्रभाव का जन्म होता है अमर होता है और अन्य समाजों के लिए अनुकरणीय होता है। यहीं नियम राज्य और राष्ट्र प्रमुखों पर लागू होता है ये एक जिम्मेदारी की कड़ी है, विकास की कड़ी हीै खुशहाली की कड़ी है, प्रेम की कड़ी है और मानवता की शान्ति की कड़ी है। यह मानव समुदाय का बहुत बड़ा हिस्सा खर्च कर दिया जाता है, उपनाथों को रोकने में पूरी प्रशासनिक मशीनरी लगा दी जाती है, अपराधो को पकड़ने में पूरा पुलिस तंत्र झौंक दिया जाता है एक बड़ी वारदात होने पर पूरे देश में रेड अलर्ट कर दिया जाता है लेकिन बड़े अफसोस की बात है कि कोई हिंसा हो ही नहीं, कोई अपराधी बने ही नहीं, कोई लुटेरा बने ही नहीं, कोई भ्रष्ट बने ही नहीं और कोई गैर जिम्मेदार बने ही नहीं इस दिशा में न परिवार प्रमुखों द्वारा न समाज प्रमुखों द्वारा और न ही राज्य देश प्रमुखों द्वारा कोई सार्थक प्रयास किये जा रहे हैं,पहल की जा रही है और खराब जीवण को अच्छा बढाने की कोशिश दण्ड से की जा रही है। सदकर्म और सदआचरण से नहीं।

प्रेरणा बिन्दु:- 
मानव प्राकृतिक रूप से शक्ति का घोतक है, उसे अशान्त और अहिंसक सबसे पहले उसके अपने परिजन, परिचित और साथी बनाते है वरना जन्म के समय तो वह अत्यन्त निर्मल, हंसमुख, चुस्त दुरूस्त, सरल, सच्चा और बिना किसी भेदभाव वाला होता है।

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