रुपया गिरने से उद्योगों को नुकसान

Samachar Jagat | Tuesday, 11 Sep 2018 01:07:29 PM
Losses to industries by falling rupee

डालर के मुकाबले गिरती भारतीय मुद्रा का असर देश की अर्थव्यवस्था पर व्यापक रूप से होने की आशंका है। सरकारी बैंक एसबीआई के विश्लेषकों और वित्त विशेषज्ञों ने अपनी रिपोर्ट में आशंका जताई है कि गिरते रुपए का सबसे ज्यादा असर उद्योग क्षेत्र, तेल आयात बिल, महंगाई, विदेशी निवेश और उपभोक्ताओं की मांग पर पड़ेगा। जून से अब तक रुपए में करीब 7 फीसदी की गिरावट आई है। वायदा बाजार में डालर के मुकाबले रुपया 75 के स्तर पर चल रहा है। इसका सीधा मतलब है कि अभी इसमें और गिरावट की आशंका है। एसबीआई के अनुसार अगर भारतीय उद्योग क्षेत्र को दिसंबर 2017 तक लिए गए 217.60 अरब डालर के अल्पकालिक कर्ज के आधे भाग को चुकाया जाए तो चालू वित्त वर्ष की पहल छमाही में कुल भुगतान 7.1 लाख करोड़ रुपए होगा। जबकि डालर के मुकाबले रुपए की गणना 2017 के औसत 65.10 रुपए प्रति डालर के हिसाब से की जाएगी।

 इसके अगले आधे भाग को चुकाने के लिए प्रति डालर औसत रुपए की गणना 71.4 के स्तर के होगी। ऐसे में शोध कर्ज के लिए उद्योग जगत पर भारी बोझ बढ़ेगी। विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय उद्योग क्षेत्र पर 67 हजार करोड़ रुपए का बोझ बढ़ेगा। फरवरी 2018 से अगस्त 2018 तक 8847 मिलियन डालर विदेश निवेश निकाला गया। यही नहीं अगली छमाही तक तेल आयात बिल में 45 हजार करोड़ रुपए इजाफा होगा। साथ ही राजकोषीय घाटे में 7 हजार करोड़ रुपए का इजाफा हो सकता है। उपभोक्ता मांग और खर्च में 500 अरब रुपए की कमी आएगी। रुपए में बढ़ोतरी से तमाम चीजों के दाम बढेंगे, जिससे उपभोक्ता मांग और खर्च में कमी आने का खतरा है।

 जहां तक कच्चे तेल का सवाल है, पहली छमाही में कच्चे तेल के दाम औसनत 74.24 डालर प्रति बैरल रहे, जिससे आयात बिल 4 लाख करोड़ रुपए रहा। लेकिन अगली छमाही में दाम औसतन 76 डालर प्रति बैरल रहेंगे और रुपया 73 पर, जिससे आयात बिल में इजाफा होगा। जैसा कि पूर्व में कहा गया है रुपए में गिरावट का असर विदेशी निवेश पर भी होगा। अगर 60 रुपए प्रति डालर के स्तर पर कोई विदेशी निवेशक यहां पैसे लगाता है और उसके शेयर में 20 फीसदी उछाल आता है, लेकिन रुपया 72 पर पहुंच तो शून्य रिटर्न मिलेगा। रुपया कमजोर होने से होम लोन महंगा होगा और ईएमआई बढ़ेगी। डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई बढ़ जाएगी और महंगाई में तेजी आ सकती है।

 विदेशी कार, स्मार्ट फोन खरीदने और विदेश में पढ़ाई करना महंगा हो जाएगा। यही नहीं विदेश में छुट्टियां मनाने जाने वालों को भी इसके लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी। रुपए की गिरावट से बॉन्ड यील्ड करीब 8 फीसदी तक घट सकता है, जिससे राजकोषीय घाटा बढ़ने का खतरा होगा। कर्ज को बढ़ावा देने के बाद भी कर्ज का स्तर 2014-18 के 59 फीसदी से घटकर 39 फीसदी पर है। रुपए की गिरावट के चलते पेट्रोल-डीजल के दामों में फिर बढ़ोतरी हुई है।

शनिवार को जयपुर में 40 पैसे की बढ़ोतरी के साथ पेट्रोल पहली बार 83.30 रुपए लीटर तथा डीजल 46 पैसे बढक़र 77.21 रुपए लीटर रहा। दिल्ली में भी पेट्रोल रिकार्ड 80.30 रुपए व डीजल 72.51 रुपए प्रति लीटर हो गया। दो हफ्तों में पेट्रोल-डीजल में दूसरी बार बड़ी बढ़ोतरी है। वहीं, मुंबई में पेट्रोल 87.77 रुपए और डीजल 76.98 रुपए प्रति लीटर हो गया। कुल मिलाकर रुपए की गिरावट से सरकार और आम जनता को हजारों करोड़ रुपए की चपत लगेगी।



 

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