रिश्तों में प्यार है तो सुखी संसार है

Samachar Jagat | Monday, 20 Mar 2017 04:36:35 PM
रिश्तों में प्यार है तो सुखी संसार है

खुद पर एतबार कर
रिश्तों से प्यार कर
सब अपने बन जाएगे
बस, कोशिश हजारों बार कर

किसी गांव में एक किसान रहता था। उसके दो पुत्र थे। वे आपस में बहुत प्रेम से रहते थे। समयान्तर किसान की मृत्यु हो गई। अपने पिताजी की मृत्यु के बाद भी वे अच्छे से रहते थे। उन्होंने कुछ समय बाद अपने खेतों का बंटवारा खुशी-खुशी प्रेम से कर लिया। बड़े भाई की शादी हो गई जबकि छोटा भाई अपने खेतों में दिन-रात काम करता रहता था, उसने अपने खेतों में खूब पेड़ लगाए और उनकी सेवा में ही अपना जीवन व्यतीत करने लगा अर्थात् उसने अपने पेड़ों को ही अपनी संतान मानकर उनकी सेवा करने लगा। बड़े भाई का भरा पूरा परिवार था। 

एक दिन बड़े भाई के दिमाग में एक विचार आया कि जब मेरा छोटा भाई बूढ़ा हो जाएगा तो उसके बचत कम रहेगी और चूंकि उसने शादी नहीं की इसलिए उसकी देखभाल करने वाला भी कोई नहीं रहेगा, इसलिए मुझे उसके गोदाम में वर्ष में दो-चार अनाज की बोरियां रात के समय रखनी चाहिए। वह ऐसा ही करने लगा।

 दूसरी तरफ छोटे भाई के दिमाग में आया कि भाई साहब का परिवार बड़ा है, खर्चा बहुत ही ज्यादा है, इसलिए उनके साथ बुढ़ापे में परेशानी हो सकती है, इसलिए मुझे उनके अनाज के शोरूम में वर्ष में दो-चार अनाज की बोरियां रात के समय रखनी चाहिए और उसने ऐसा करना शुरू कर दिया। 

एक रात दोनों भाई अपनी-अपनी पीठ पर अनाज के बोरे रखकर एक-दूसरे के गोदाम में रखने के लिए जा रहे थे। संयोग से चांदनी रात थी, वे कुछ ही दूर गए होंगे कि उनका आमने-सामने मिलन हो गया, वे एक पल के लिए ठिठके और फिर चल दिए अपने-अपने उद्देश्य की तरफ।

 ऐसे उदाहरणों से दुनिया भरी पड़ी है। कुछ समय बाद उस गांव में एक मंदिर बनाने की बात चली, स्थान की तलाश शुरू हुई और अंत में निष्कर्ष पर पहुंचा गया कि जहां पर, जिस स्थान पर दोनों भाइयों का मिलन हुआ था उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण करवाया जाए क्योंकि प्रेम से भरे मिलन से, करुणाा से भरे मिलन से, सहयोग से भरे मिलन से और रिश्तों की मिठास से भरे मिलन से अधिक पवित्र स्थान और कोई दूसरा, इस दुनिया में हो ही नहीं सकता है।

 बेशक खूब कमाएं, नेकी से कमाएं, अच्छे से जीवन जिएं, सब सुविधाओं का उपयोग करे, लेकिन किसी तरसते अपने को, किसी टूटे-बिखरे अपने को, किसी हताश-हारे हुए अपने को जरूर सहयोग करें, आपका ऐसा सहयोग उसके जीवन का महायोग बन सकता है।

प्रेरणा बिन्दु:- 
मां के लहू से सींचे गए
चले पिता की उंगली थाम
धन-दौलत से रिश्ते बड़े हैं
लक्ष्मण गए संग भाई राम।
 

 

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