प्रेम सत्य है और सत्य ईश्वर होता है

Samachar Jagat | Thursday, 23 May 2019 03:10:17 PM
Love is true and truth is god

प्रेम है तो जीवन है, जीवन है तो गति है, प्रगति है, रिश्ते-नाते हैं, घर-परिवार है, समाज है, पद-प्रतिष्ठा है, सुख-दु:ख हैं और वेदनाएं-संवेदनाएं हैं। प्रेम अर्थात् समरसता, मधुरता, आत्मियता, अपनापन, सादगी, सरलता, सहायता, एकता, ईमानदारी और जिम्मेदारी। प्रेम की यही भाषा है, प्रेम की यही परिभाषाा है। इसके अलावा इसकी कोई लंबी चौड़ी परिभाषा नहीं है, व्याख्या नहीं है। इसमें तो तीन अक्षर भी पूरे नहीं है। प्रेम जब मनुष्य के दिल-दिमाग में उतरने लगता है, उसके रोम-रोम में प्रवाहित होने लगता है तो मानो उसका जीवन सौंदर्य से भरने लगता है, सुख से भरने लगता है, सर्व कल्याण से भरने लगता है, समभाव से भरने लगता है, सच्चाई और सरलता से भरने लगता है। मन में ईमान आने लगता है, एक इंसान आने लगता है और देखते ही देखते व्यक्ति संपूर्ण जहान बनने लगता है।


आज तक के सारे संघर्ष, सारे युद्ध और सारे सामाजिक, पारिवारिक और व्यक्ति गत झगड़े ईष्र्या के कारण हुए हैं, उनके मूल में नफरत की सबसे बड़ी भूमिका रही है। इस नफरत ने न जाने कितने सुहाग उजाड़ दिए, न जाने कितनी बहनों की कलाइयां उजाड़ दी, घर के घर बर्बाद कर दिए, समाज को टुकड़ों-टुकड़ों कर दिया या फिर यौं कहें कि इस सुंदर जहान को खण्ड-खण्ड कर दिया। इस नफरत ने इंसान को व्यक्ति तक सीमित कर दिया और उसे शैतान की श्रेणी में ला खड़ा कर दिया। यह नफरत घायल-चोटिल, तोड़ने वाली, दु:खी और जान लेने वाली है। जब इस दुनिया ने बड़ी से बड़ी नफरत करके देख लिया कुछ हासिल करने के लिए, एक-दूसरे को मिटाने के लिए, गिराने के लिए, लेकिन बदले में कुछ नहीं मिला सिवाय दर्दांे के। केवल प्रेम ही एक ऐसी औषधि है जो हर नकारात्मकता का ईलाज कर सकती है। 

प्रेम की शक्ति शाश्वत है, प्रेम की भाषा मधुर और शिष्ट है, प्रेम का काम भाईचारा है, प्रेम की भावना विश्व बंधुत्व की है, प्रेम का दायरा सारा जहान है, प्रेम के मूल में इंसान है और इंसानियत है क्योंकि प्रेम नजदीक लाता है, जोड़ता है, बनाता है, पल्लवित करता है और सबसे बड़ी बात जीने का मतलब सीखाता है, जीना सीखाता है क्योंकि प्रेम सत्य है और सत्य स्वयं में ईश्वर कहलाता है। यदि जीवन में प्रेम है तो सब सुख हैं, सब आनंद हैं और सब साथ हैं।
प्रेरणा बिन्दु:- 
प्रेम के संसार से
बन गए हम इंसान
यह धरती अपनी अंबर अपना
अपना यह सारा जहान।



 

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