कच्चे तेल के दाम घटने की उम्मीद कम

Samachar Jagat | Saturday, 08 Sep 2018 03:39:14 PM
Lower than expected crude oil prices

अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों में फिलहाल राहत मिलने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। बड़े तेल उत्पादकों में शामिल ईरान में तेल उत्पादन में बड़े पैमाने पर कटौती होने की आशंका है। जिसके बाद तेल कीमतों में और इजाफा हो सकता है। ब्लूम वर्ग की हालिया रिपोर्ट के अनुसार ईरान में कच्चे तेल का उत्पादन मार्च 2016 के बाद से सबसे निचले स्तर पर जा रहा है। साथ अमेरिकी प्रतिबंधों के लागू होने के बाद उसकी हालत और खराब हो सकती है। इसके बाद ईरान से तेल का निर्यात और घटेगा, जिसका सीधा असर एशियाई देशों पर होगा।

 ईरान के सबसे बड़े तेल खरीददार चीन और भारत है। लिहाजा इसका सीधा असर इन्हीं दोनों देशों पर होगा। न्यूयार्क के स्टे्रटस एडवाइजर में मुख्य तेल विश्लेषक ऐश्ले पीटरसन का कहना है कि ईरान से तेल की आपूर्ति घटने के साथ ही इसकी कीमतों में इजाफा हो जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार अगस्त में कटौती के बाद से ईरान फिलहाल 21 लाख बैरल कच्चे तेल का निर्यात ही प्रतिदिन कर पा रहा है। यह मार्च 2016 के बाद उसका निम्नतम स्तर है। अमेरिकी निवेशक रॉब हावर्थ का कहना है कि इससे तेल बाजार में निवेश करने वालों को कई मौके मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों के पूरी तरह अमल में आने के बाद अगर ईरान का उत्पादन नीचे गया तो अमेरिकी बाजार में निवेशकों की धारणा और मजबूत होगी। अमेरिका का कहना है कि ईरान पर 4 नवंबर से प्रतिबंध लागू होने के बाद भारत और चीन जैसे एशियाई देशों की मुसीबत बढ़ेगी। क्योंकि ईरान के तेल उत्पादन में 10 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी आ सकती है। ये दोनों देश अभी करीब 13 लाख बैरल कच्चा तेल प्रतिदिन ईरान से आयात करते हैं। 

प्रतिबंध के बाद कू्रड ऑयल की कीमत 2 से तीन डालर प्रति बैरल बढ़ेगे। जिसके बाद 85 डालर प्रति बैरल हो सकते हैं कच्चे तेल के दाम। बढ़ती तेल कीमतों से राहत दिलाने के लिए सरकार को उत्पाद शुल्क कम करना जरूरी हो गया है। अगर सरकार ने ऐसा कदम नहीं उठाया तो इस साल दिसंबर तक पेट्रोल की कीमत 100 रुपए प्रति लीटर हो सकती है। अमेरिकी एनर्जी इनफॉर्मेशन एडमिनिस्टे्रशन (ईआईए) के अनुमान के मुताबिक दिसंबर 2018 तक कच्चे तेल के दाम 85 डालर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंंच सकते हैं। ऐसे में भारत में पेट्रोल की खुदरा कीमत 100 प्रति लीटर हो जाएगी।

 विशेषज्ञों के अनुसार उत्पाद शुल्क घटाने से राजस्व में कमी आएगी और सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा। चालू खाते के घाटे (कैड) में इजाफा होगा, जो पहले ही सरकार के लक्ष्य से ज्यादा है। कैड बढ़ने से देश की रेटिंग खराब होगी और विदेशी निवेशक मुंह मोड़ सकते हैं। इसके असर से सरकार के राजकोषीय घाटा भी बढ़ेगा। कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में वृद्धि ने विदेशी विनियम बाजार में धारणा प्रभावित की है जिसके कारण डालर के मुकाबले रुपया पहली बार 71.21 के निम्न स्तर पर पहुंच गया है। यह उसका अब तक का रिकार्ड निचला स्तर है। इससे पहले 31 अगस्त को रुपया 71 के रिकार्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था। दरअसल अमेरिका-चीन व्यापार तनाव, अर्जेटीना, तुर्की के बढ़ते संकट और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का असर दिखने लगा है।



 

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