मेडिकल शिक्षा महंगी

Samachar Jagat | Thursday, 06 Dec 2018 02:09:23 PM
Medical education expensive

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भारतीय मेडिकल कौंसिल बोर्ड को मेडिकल शिक्षा की फीसें घटाने के निर्देश दिए हैं। दरअसल शिक्षा के व्यापारीकरण के नीतिगत फैसले से शिक्षा महंगी होने के फलस्वरूप मेडिकल शिक्षा आमजन की पहुंच से दूर हो रही है। सरकार का कहना है कि प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों खासकर मानद विश्वविद्यालयों द्वारा वसूले जा रहे मनमाने दामों को शीघ्र कम किया जाए। सरकार द्वारा सितंबर 2018 में भंग की गई मेडिकल कौंसिल के सम्मुख भी महंगी फीस का ही मुद्दा उलझा रहा। कौंसिल का कहना था कि फीस वृद्धि के मामले में हस्तक्षेप करना उसके अधिकार में नहीं है। शिक्षा के व्यापारीकरण के कारण समाज का एक बड़ा वर्ग बुनियादी शिक्षा से भी वंचित होता जा रहा है। 

बहुत से होनहार बच्चे पैसे की दिक्कत के चलते दाखिला नहीं ले पाते। सच्चाई यह भी है कि एमबीबीएस की दाखिला परीक्षा में मेरिट दर्जा हासिल करने के बावजूद कई बच्चों को महज इसलिए प्रवेश नहीं मिलता क्योंकि वे भारी-भरकम फीस अदा नहीं कर सकते। एनआरआई कोटे में तो मेरिट भी नहीं देखी जाती। वहां तो पैसे की माया का ही खेल चलता है। दरअसल इससे मेडिकल शिक्षा के स्तर में गिरावट आनी स्वाभाविक है। फिर महंगी पढ़ाई पढक़र डॉक्टर बनने वाले विद्यार्थी मेडिकल इखलाक को कायम रख पाएंगे, यह टेढ़ा सवाल है। इसी कारण चिकित्सा सरीखे पवित्र व्यवसाय के ऊपर व्यापारिकरण भारी पड़ रहा है। 

शिक्षा व स्वास्थ्य संबंधी सहूलियतें जनता को मुहैया कराना सरकार की जिम्मेवारी है। सरकार द्वारा स्वास्थ्य तथा शिक्षा जैसी मूलभूत जरूरतों से हाथ खींचने के फलस्वरूप उदारीकरण और वैश्वीकरण की आर्थिक नीति लागू किए जाने के बाद पिछले ढ़ाई दशक में स्वास्थ्य और शिक्षा जो लोकतंत्र में लोक कल्याणकारी कार्यक्रमों में शामिल होना चाहिए और जनता को स्वास्थ्य और शिक्षा नि:शुल्क उपलब्ध कराई जानी चाहिए उन्होंने आज उद्योग और व्यावसायीकरा का रूप धारण कर लिया है।

दोनों क्षेत्रों में दुकानदारी होने लगी है और प्राइवेट संस्थाओं पर निर्भरता बढ़ रही है। शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में कार्पोरेट कॉलेजों और अस्पतालों की आमद के कारण मनमाना पैसा वसूला जा रहा है। लिहाजा कई कमेटियों और आयोगों का मानना है कि सभी को बराबर सहूलियतें मुहैया कराने के लिए स्वास्थ्य व शिक्षा विभाग केवल सरकारी क्षेत्र के ही आधीन होने चाहिए।



 

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