मेडिसिन बैंक का प्रस्ताव नियमों में अटका

Samachar Jagat | Saturday, 15 Sep 2018 04:34:03 PM
Medicin Bank's proposal stuck in the rules

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फार्मास्युटिकल कंपनियों से दवाएं दान में लेकर उसे जरूरतमंद और गरीबों के मुफ्त इलाज में इस्तेमाल करने की योजना अटक गई है। इसको लेकर केंद्र सरकार के ही दो मंत्रालयों के बीच नियमों को लेकर मतभेद उभर आए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से प्रस्तावित मेडिसिन बैंक की राह में सीएसआर के नियम अड़ंगा बन गए हैं। दरअसल, सीएसआर के नियमों के तहत कोई भी कंपनी उस  क्षेत्र में सामाजिक योगदान नहीं दे सकती है, जिस क्षेत्र से वह आय अर्जित करती है। यहां यह बता दें कि 20 बड़ी दवा निर्माता कंपनियां सामाजिक योगदान के लिए तैयार हो गई है। इन्हें एक फीसदी सालाना लाभ का हिस्सा देना होगा।

सूत्रों के मुताबिक स्वास्थ्य मंत्रालय सीएसआर के नियम में छूट चाहता था। लेकिन कंपनी मामलों के मंत्रालय ने फिलहाल किसी भी तरह की छूट से इनकार कर दिया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कुछ महीने पहले मेडिसिन बैंक का मसौदा नोट तैयार किया था। इस प्रस्ताव को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने फार्मा कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक भी कर ली थी, जिसमें ज्यादातर प्रतिनिधियों ने प्रस्ताव को अपना समर्थन दिया था। प्रस्ताव के तहत मेडिसिन बैंक के लिए सामाजिक योगदान को स्वैच्छिक रखा गया है। 

हालांकि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक रूल्स 1945 में संशोधन कर इसे अनिवार्य भी बनाया जा सकता है। इसके लिए कानून मंत्रालय से राय ली जा रही है। देश के कंपनी कानून के मुताबिक 5 करोड़ सालाना शुद्ध लाभ अर्जित करने वाली या एक हजार करोड़ रुपए के राजस्व अर्जित करने वाली कंपनियों को अपने लाभ का दो फीसदी सामाजिक कार्यों में खर्च करना पड़ता है। यह भी शर्त है कि कंपनी जिस क्षेत्र में कारोबार कर रही है, उसी क्षेत्र में वह सामाजिक कल्याण के तहत काम नहीं कर सकती है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से प्रस्तावित मेडिसिन बैंक के प्रस्ताव में कहा गया था कि दवा कंपनियों से उनके सीएसआर फंड की आधी राशि यानी कंपीन को होने वाले सालाना लाभ का एक फीसदी धन इस बैंक में सांकेतिक रूप से जमा कराया जाएगा। 

जरूरत पड़ने पर उन्हीं फार्मा कंपनियों से उक्त राशि के मूल्य की दवाएं जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने को कहा जाएगा। आशा की जाती है कि शीघ्र ही इस मसले का कोई हल निकाल लिया जाएगा, जिससे जरूरतमंद और गरीबों के मुफ्त इलाज में इस्तेमाल करने योजना का सुचारू संचालन किया जा सके।

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