देश में मानसून सामान्य रहने की उम्मीद

Samachar Jagat | Saturday, 20 Apr 2019 10:43:38 AM
Monsoon is expected to remain normal in the country

देश में चल रहे चुनावों के बीच एक अच्छी खबर यह है कि इस बार सामान्य मानसूनी बारिश होने की उम्मीद है। मौसम विभाग ने इसी सप्ताह के शुरू में सोमवार को पूर्वानुमान जारी करते हुए कहा कि जून-सितंबर के दौरान सामान्य के 96 फीसदी बारिश होगी, जिसका मतलब है कि मानसूनी बारिश करीब-करीब सामान्य रहेगी। मानसून के चार महीनों जून से सितंबर में देश में कुल 890 मिलीमीटर बारिश होती है। 96 फीसदी बारिश का मतलब है कि इस बार यह 854 मिमी होगी। इस अनुमान में पांच अंकों का अंतर हो सकता है। यानी बारिश 96 फीसदी से 5 फीसदी कम या अधिक भी हो सकती है। यह लगातार चौथा साल है, जब मौसम विभाग ने सामान्य मानसून की भविष्यवाणी की है।

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हालांकि पिछले साल विभाग ने 97 फीसदी बारिश का अनुमान किया था, लेकिन बारिश 91 फीसदी हुई थी। पृथ्वी विज्ञान विभाग के सचिव डॉ. एम. राजीवन तथा मौसम विभाग के महानिदेशक डॉ. के.जे. रमेश ने प्रेस कांफे्रंस में कहा कि मानसूनी बारिश सामान्य रहने के साथ-साथ बारिश का वितरण भी देश भर में अच्छा होने की संभावना है, जो कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद होगा।

उन्होंने कहा कि मौसम विभाग ने पांच पैरामीटरों का इस्तेमाल करते हुए जून-सितंबर के चार महीनों के लिए यह आकलन पेश किया है। डब्ल्यूएमओ ने फरवरी में मजबूत अलनीनो बनने की आशंका जताई थी। लेकिन अब स्थितियां बदल चुकी है। प्रशांत महासागर में विषुवत रेखा के निकट समुद्र के तापमान में महज 0.9 डिग्री की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन आगे के लिए अनुमान यह है कि इसमें वृद्धि नहीं हो रही है, बल्कि कमी आएगी। मौसम विभाग के अनुसार मानसून के सामान्य व सामान्य के करीब रहने की संभावना 39 फीसदी है। जबकि सामान्य से कम रहने की संभावना 32 फीसदी है। सामान्य से अधिक की संभावना 12 फीसद है। 

जबकि कम बारिश (90 फीसदी से कम) की संभावना 12 फीसदी है। जबकि कम बारिश (90 फीसदी से कम) की संभावना 17 फीसदी है। यहां यह बता दें कि भविष्यवाणी तैयार करने के लिए जिन 5 पैरामीटर्स को इस्तेमाल किया गया है, उनमें उत्तरी अटलांटिक और उत्तरी प्रशांत महासागर का तापमान, दक्षिण भारत समुद्र में विषुवत रेखा के निकट का तापमान। पूर्वी एशिया में समुद्र का तापमान, उत्तर-पश्चिम यूरोप में सतह के वायु तापमान, प्रशांत महासागर में विषुवत रेखा के निकट समुद्र का तापमान है। मौसम विभाग ने दावा किया है कि मानसून पूर्वानुमान को लेकर उसकी भविष्यवाणियां पहले से बेहतर हुई है।

उनके गलत होने का प्रतिशत घटा है। 1995-2006 के दौरान पूर्वानुमान गलत होने का प्रतिशत 7.94 था, जो अब घटकर 4.95 रह गया है। देश में करीब 60-65 फीसदी खेती अभी भी मानसूनी बारिश पर निर्भर है। इसलिए चुनावी वर्ष में अच्छे मानसून की भविष्यवाणी नई सरकार के लिए भी राहत देने वाली सूचना है। पिछले साल सामान्य मानसून की भविष्यवाणी के बावजूद अक्टूबर 2018 से मार्च 2019 के बीच 8 राज्यों ने सूखे का ऐलान किया है। तमिलनाडु को छोडक़र सात राज्यों ने केंद्र से 22 हजार 242 करोड़ रुपए की सहायता की मांग की। पर इसके जवाब में केंद्र से केवल 8 हजार 171 करोड़ रुपए की सहायता राशि भेजी गई है।

देश में आम चुनाव के दो चरण संपन्न हो चुके हैं और आगे के मुकाबलों के लिए पार्टियां एक दूसरे के खिलाफ ताल ठोक रही है। लेकिन सूखे का मुद्दा गायब है। महाराष्ट्र की बात करें तो वहां 350 में से 180 ब्लॉक अधिकारिक तौर पर सूखा ग्र्रस्त है। पर महाराष्ट्र में चुनाव अभियान के दौरान सूखा चुनावी मुद्दा बनता नहीं दिख रहा है। स्थानीय स्तर पर विपक्षी दलों कांग्रेस और एनसीपी के नेता सूखे को बड़ा मुद्दा बनाने में नाकाम रहे हैं। पुलवामा हमले के बाद भाजपा का ज्यादा जोर सूखे के बजाए राष्ट्रीय सुरक्षा पर है।



 

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