ई-कॉमर्स कंपनियों पर लगाम कसने की नई राष्ट्रीय नीति

Samachar Jagat | Saturday, 04 Aug 2018 10:50:07 AM
New national policy for tightening of e-commerce companies

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केंद्र सरकार ई-कॉमर्स को नियंत्रित और व्यवस्थित बनाने के लिए राष्ट्रीय ई-कॉमर्स नीति लाने जा रही है। सरकार ई-कॉमर्स नीति का मसौदा जारी किया है, जिसमें ई-कॉमर्स क्षेत्र के लिए एक नियामक बनाने का प्रस्ताव है, जो इससे जुड़ी कंपनियों के कारोबार पर नजर रखेगी। मसौदे में भारतीय ऑनलाइन कंपनियों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। मसौद में ब्रांडेड मोबाइल फोन, वाइट गुड्स और फैशन आइटम्स की थोक खरीदारी पर रोक लगाने का सुझाव दिया गया है। ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा बड़ी खरीद के बल पर इन सामानों की कीमत कम रख ले जाने का नुकसान खुदरा डीलर्स को उठाना पड़ता है।

 ई-कॉमर्स नीति मेें भारतीय और भारतीयों के नियंत्रण वाले ऑनलाइन मार्केट प्लेस को इन्वेंट्री रखने की इजाजत देने की बात कही गई, बशर्ते वे सामान भारत में ही खरीदे गए हो। विदेशी नियंत्रण वाली कंपनियों को यह छूट नहीं मिलेगी। नए नियमों के मुताबिक किसी सामान के बारे में बढ़ा-चढ़ाकर दावे करना या झूठे ग्राहकों के जरिए समीक्षा लिखवाना अनुचित वाणिज्यिक गतिविधि के दायरे में आएगा। कोई सामान जाली निकलता है या उसकी क्वालिटी ठीक नहीं होती तो इसकी जवाबदेही ई-कॉमर्स कंपनी और विक्रेता दोनों की होगी। यहां यह बता दें कि अभी तक कंपनियां यह कहकर निकल लेती थी कि वे सिर्फ प्लेटफार्म मुहैया कराती है। 

सामान की गुणवता को लेकर उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है। लेकिन अब वे इतने सस्ते में नहीं छूट पाएंगी। टूटा हुआ सामान, गलत, नकली या जैसा विवरण वेबसाइट पर दिया गया था, वैसा सामान न होने पर उपभोक्ता के पास उसे वापस करने का अधिकार होगा और कंपनी को 14 दिन में रिफंड देना होगा और सामान लौटाने की नीति भी कंपनी को अपनी वेबसाइट पर प्रदर्शित करनी होगी। यहां यह बता दें कि भारत में पिछले एक डेढ़ दशक में ऑनलाइन कारोबार तेजी से बढ़ा है। लेकिन अब तक ग्राहकों के हितों की सुरक्षा का पहलू उपेक्षित ही रहा है। इसका नतीजा यह हुआ कि ई-कॉमर्स कंपनियां मनमानी करने से बाज नहीं आ रही। बड़ी संख्या में लोग ठगी के भी शिकार हुए हैं। 

अब सरकार जो कदम उठाने जा रही है, वे बहुत पहले ही उठाए जाने चाहिए। ऑनलाइन कारोबार के लिए लंबे समय से नियम-कायदों और नियामक की जरूरत महसूस की जा रही थी। ई-कॉमर्स को नियंत्रित और व्यवस्थित बनाने के लिए ई-कॉमर्स नीति प्रारूप के मुताबिक फ्लिपकार्ट जैसी खुदरा ऑनलाइन बिक्री कंपनियों को अपने उपयोगकर्ताओं के आंकड़े भारत में ही रखने पड़ेंगे और राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर इन आंकड़ों तक सरकार की पहुंच होगी। अब तक समस्या यह रही है कि ऑनलाइन कंपनियां आपस में डाटा साझा कर लेती है। कंपनियां अपना सारा डाटा दूसरे देशों में स्थित सर्वरों में रखती है। इसलिए यह मामला गंभीर और जोखिम भरा हो गया है।

 भारत में ई-कॉमर्स का कारोबार सालाना 51 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। आज भारतीय बाजार पर कब्जे के लिए वॉलमार्ट अमेजन और रिलायंस रिटेल होड़ जारी है। लेकिन इस कारोबार के प्रसार के साथ गलत उत्पादों की आपूर्ति और अन्य अनुचित व्यापार-व्यवहार को लेकर शिकायतें बढ़ रही है। ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ ग्राहकों की शिकायतें अप्रैल 2017 से मार्च 2018 के बीच 42 फीसदी बढक़र 78.088 पर पहुंच गई है। पिछले साल की समान अवधि में 54.872 शिकायतें मिली थी। ऐसे में उन्हें कंपनियों की मनमानी पर नहीं छोड़ा जा सकता। अर्थव्यवस्था के इस अहम क्षेत्र को नियमित तो करना ही होगा। उम्मीद करें कि नई नीति से इस क्षेत्र की गड़बडि़यां दूर होंगी और इसकी रफ्तार भी कम नहीं पड़ेगी।

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