डाटा सुरक्षा के लिए नए उपाय

Samachar Jagat | Thursday, 02 Aug 2018 11:07:16 AM
New Tips for Data Protection

डाटा सुरक्षा पर गठित न्यायमूर्ति श्रीकृष्ण की अध्यक्षता में बनी उच्च स्तरीय समिति ने लोगों की निजी जानकारी की सुरक्षा बढ़ाने के लिए आधार कानून में बड़ा बदलाव करने की सिफारिश की है। समिति का कहना है कि आधार के माध्यम से पहचान पुष्ट करने का अधिकार केवल भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के मान्यता प्राप्त सार्वजनिक इकाइयों या कानूनन अधिकार प्राप्त इकाइयों को ही होनी चाहिए, ताकि लोगों की निजता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। समिति की 213 पन्नों की रिपोर्ट में आधार को लेकर ये विचार दिए गए हैं, लेकिन यह उसके निजी डाटा सुरक्षा विधेयक के मसौदे का हिस्सा नहीं है। 

समिति ने बीते सप्ताह शुक्रवार को रिपोर्ट सौंपी है। केंद्रीय आईटी और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को सौंपी रिपोर्ट में समिति ने आधार जारी करने वाली संस्था के लिए अधिक आर्थिक और कामकाजी स्वायतता का सुझाव दिया है। समिति का सुझाव है कि यूआईडीएआई को न केवल फैसले लेने में अधिक स्वायत बनाया जाना चाहिए बल्कि उसका कामकाज सरकार की एजेंसियों से भी स्वतंत्रत होना चाहिए। उसे पारंपरिक नियामकीय शक्तियों से भी परिपूर्ण बनाया जाना चाहिए ताकि वह कानून को लागू कर सके। रिपोर्ट में कहा गया है कि यूआईडीएआई के पास जुर्माना लगाने की शक्ति हो, साथ ही अनुपालन नहीं करने वाले सरकारी और निजी ठेकेदारों के लिए जब्ती इत्यादि के आदेश देने की शक्ति भी उसके पास होनी चाहिए। समिति की सिफारिशें इसलिए भी अहम है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने आधार मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रखा हुआ है।

 रिपोर्ट में डाटा सुरक्षा के नियम तोड़ने वाली कंपनियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने का प्रावधान किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर कोई कंपनी डाटा सुरक्षा के नियमों को तोड़ती है तो इस पर जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही कंपनी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा भी चलाया जा सकता है। डाटा संरक्षण कानून के इस नए प्रारूप में देश में डाटा का उपयोग किस तरह होगा इसके प्रावधान बताए गए हैं। न्यायमूर्ति श्रीकृष्ण ने कहा कि पूरे देश में डाटा सुरक्षा के लिए अर्थोरिटी बनेगी। अगर कंपनी से शिकायत है तो उसका निपटारा कैसे होगा, इसका मैकेनिज्म भी रिपोर्ट में बताया गया है। रिपोर्ट में डाटा प्रोटेक्शन, आफिसर, डाटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी और एपीलेट ट्रिव्यूनल रखने का भी सुझाव दिया गया है। इससे ऊपर के मामलों में सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है। 

समिति की रिपोर्ट मेें कहा गया है कि इस लिहाज से आधार कानून में संशोधन किया जाना चाहिए ताकि ग्राहकों से जुड़ी जानकारी को बेहतर किया जा सके और यूआईडीएआई की स्वायतता भी बनाए रखी जा सके। रिपोर्ट में हाल में ऐसे कई मामलों का उल्लेख किया गया है, जहां कंपनियां गलत तरीके से आधार को लेकर जोर डालती रही है। अवैध कार्यों के लिए आंकड़ों का इस्तेमाल करती रही और आंकड़ों को गलत तरीके से दूसरों को उपलब्ध कराया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह की घटनाओं से सूचना की निजता प्रभावित होगी, इसके तुरंत समाधान की जरूरत है। रिपोर्ट कहती है कि फिलहाल इन घोषणाओं के पीछे कोई सांविधिक समर्थन नहीं है और आज की तिथि में यह अपूष्ट बना हुआ है कि इन घोषणाओं को किस तरह प्रभावी तरीके से अमल में लाया जाएगा। रिपोर्ट में 12 तरह की जानकारियों को संवेदनशील माना है, जिनका इस्तेमाल बिना अनुमति के नहीं किया जा सकता है।

 सिर्फ संसद, विधानसभा की अनुमति या कानून के तहत उन्हें हासिल या इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें सभी तरह के पासवर्ड, वित्तीय आंकड़े, स्वास्थ्य संबंधी आंकड़े, यौन जीवन से जुड़ी जानकारी आधिकारिक पहचानकर्ता से संबंधित आंकड़े, यौन रुझान, बायोमैट्रिक्स, अनुवांशिकी आंकड़े, ट्रांसजेंडर स्थिति को दर्शाने वाला विवरण, मध्यलिंगी पहचान बताने वाले आंकड़े जाति एवं जनजाति के आंकड़े और राजनीतिक और धार्मिक धारणा व संबद्धता शामिल है। इसके अलावा प्रस्तावित डाटा संरक्षण अथॉरिटी को यह अधिकार होगा कि वह इसमें कोई नई जानकारी भी जोड़ सके। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि इस रिपोर्ट पर अब सभी की राय ली जाएगी। इसके बाद इसे कैबिनेट में लाकर विधेयक को अंतिम रूप दिया जाएगा और संसद में पेश करेंगे। संसद इसे पास भी कर सकती है स्टेडिंग कमेटी को भी भेज सकती है।



 

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