कोई सफलता आखिरी नहीं होती

Samachar Jagat | Tuesday, 23 Apr 2019 04:38:20 PM
No success is final

सफलता मात्र कोई शब्द नहीं है इसमें तो पूरा जीवन समाया हुआ है, पूरा जमाना समाया हुआ है या यौं कहें पूरा संसार समाया हुआ है अर्थात् किसी भी व्यक्ति का मूल्यांकन लोग सफलता और असफलता से ही करते हैं। इसलिए सफलता के बहुत बड़े मायने हो गए हैं। यदि सच में कोई सफल होना चाहता है तो फिर सफलता के रहस्य को सफलता के अर्थ को अच्छे से समझना होगा और इसके मापदण्ड तय करने होंगे। कितनी हास्यास्पद स्थिति है कि लोग छोटे-छोटे भौतिक सुखों को, उनकी प्राप्ति को स्थायी सफलता मान बैठते हैं, खुशी में फटने को हो जाते हैं, उनको स्थायी सुख मान लेते हैं और साथ ही साथ स्थायी सफलता भी। जरा इस पर गौर कीजिए कि यह कितना छोटापन और कितनी संकीर्ण सोच है। मान लें किसी ने जॉब मिलने को ही अपनी अंतिम सफलता मान ली, उससे पूरी तरह संतुष्ट हो गया, उसी से ही खुश हो गया और फिर इसके बाद प्रयास करना ही छोड़ दिया तो क्या ऐसे व्यक्ति को सफल कहा जाएगा?

यदि सफलता को लेकर पूरा आकलन किया जाए तो सार यही निकल कर आता है कि जीवन के सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ने की अनंत संभावनाएं होती हैं, उनका कोई अंतिम बिन्दु नहीं होता है वे तो अथाह होती हैं, अनंत ऊंचाई होती है उनकी और चूंकि यह समग्र जीवन भी अनंत और महाविराट है तो फिर ऐसे में जीवन के किसी एक क्षेत्र में वह भी आंशिक प्राप्ति, पर ही हम सब कुछ मिला हुआ स्वीकार कर लें, अपने को सफल मान बैठे और आगे बढ़ने के सारे प्रयास बंद कर दें तो फिर सबसे अधिक असफल ही कहलाएंगे, क्योंकि सफलता का मतलब ही लगातार बिना रूके, बिना थके प्रयास करते रहना है। एक बात और है कि कोई भी सफलता थोड़ा आनंद दे सकती है, थोड़ा सुख पहुंचा सकती है या थोड़ा दुख तकलीफ कुछ समय के लिए भूला सकती है लेकिन यह बात तय है कि वह पूर्ण संतुष्टि प्रदान नहीं कर सकती है और यदि किसी ने अपनी सफलता को पूर्ण संतुष्टि मान लिया तो फिर उसके जीवन का विकास रूकना निश्चित है।

कभी भी किसी भी स्थिति-परिस्थिति में सफलता को अंतिम प्राप्ति नहीं माना जाए, उससे पूर्ण संतुष्ट नहीं हुआ जाए तभी जीवन में गति आएगी-प्रगति आएगी और जीवन सार्थकता की ओर जाता जाएगा। प्रयास करते रहें, आगे बढ़ते रहें कुछ अलग सोचते रहें, कुछ अलग करते रहें, कभी पीछे मुडक़र नहीं देखें क्योंकि पीछे मुडक़र देखना ही असफलता है। जिस प्रकार से चालक का ध्यान सदा सामने रहता है, बढ़ने पर रहता है गति पर रहता है उसी प्रकार व्यक्ति का ध्यान भी आगे ही आगे रहे तथा पूरा फोकस वर्तमान पर रहे बस फिर हर दिन हर घंटे और हर पल सफलताएं उसके चरणों में अपना शीश झुकाती रहेंगी।

प्रेरणा बिन्दु:- 
जिंदगी के रास्ते में
फूल भी हैं शूल भी
रूकें नहीं थकें नहीं
चंदन है कभी धूल भी।



 

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