निजी भक्त नहीं, देशभक्त चाहिए

Samachar Jagat | Friday, 26 Apr 2019 04:32:23 PM
Not a personal devotee, patriot should

बात उस समय की है जब अब्राहम लिंकन अमेरिका के राष्ट्रपति पद को सुशोभित कर रहे थे। उनकी ईमानदारी, कतव्र्यनिष्ठा और देशभक्ति से न केवल अमेरिका के लोग परिचित थे बल्कि पूरी दुनिया उनके इन गुणों की कायल थी। लेकिन यह भी सच है कि आज तक इस दुनिया में एक भी ऐसा व्यक्ति नहीं हुआ है जिसके कोई आलोचक नहीं हुए हों। इस प्रकार अब्राहम लिंकन का भी एक आलोचक था जो हमेशा अब्राहम लिंकन पर व्यंग्य बाणों की बौछार करता रहता था। लेकिन इन सबके बावजूद अब्राहम लिंकन उसके व्यंग्य बाणों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं करते थे। 

वे उस व्यक्ति के गुणों के बारे में अच्छे से जानते थे। और उनके गुणों के कारण अब्राहम लिंकन ने उसे अमेरिका का रक्षा मंत्री बना दिया बावजूद रक्षा मंंत्री बनाने के उसने अब्राहम लिंकन की आलोचना करना नहीं छोड़ा। एक दिन अमेरिकी राष्ट्रपति से मिलने के लिए उनका एक घनिष्ठ मित्र आया जो रक्षा मंत्री से बहुत नाराज था। उसने राष्ट्रपति महोदय से आते ही कहा कि क्या आप अपने रक्षा मंत्री के बारे में अच्छे से जानते हो। राष्ट्रपति महोदय ने कहा-हां अच्छे से जानता हूं, कहो क्या बात है? आप ऐसा क्यों पूछ रहे हो? उस व्यक्ति ने कुछ नाराजगी का भाव जताते हुए कहा कि आप उसके बारे में कुछ नहीं जानते हो? वह तो आपको बहुत बुराई करता है, उसने कल ही भरी सभा में आपको दुबला-पतला गुरिल्ला तक कह दिया, क्या आपको इसकी जानकारी है? राष्ट्रपति महोदय ने बड़ी ही सहजता से कहा, हां मैंने यह सब समाचार पत्र में पढ़ लिया है। अच्छा, यह तो आपने पढ़ लिया है लेकिन तीन दिन पहले भी वह आप पर तंज कस रहा था, क्या आपको इसकी जानकी जानकारी है? हां, मुझे सब जानकारी है। आप कहना क्या चाहते है? मुझे साफ-साफ कहें क्योंकि मुझे आप बहुत परेशान दिखाई दे रहे हैं।

राष्ट्रपति महोदय के मित्र ने कहा कि आपने अपने इतने बड़े आलोचक को इतने बड़े पद पर क्यों बैठा रखा है? राष्ट्रपति महोदय ने हंसते हुए सहजता से उत्तर दिया- ‘ऐ मेरे दोस्त! मुझे निजी भक्तों की जरूरत नहीं है, मुझे तो देशभक्तों की जरूरत है। आप उसके अब्राहम लिंकन से ऐसा सुनकर उसका मित्र निरूतर हो गया। जब आज की राजनीतिक स्थिति का मूल्यांकन किया जाए तो कितने लोग बचे हैं अब्राहम लिंकन जैसी सोच वाले। आज लोग देशभक्तों, समाज भक्तों को छोड़ अपने ही भक्तों से घिरे रहते हैं।

उनको अपने भक्तों के आगे का कुछ भी दिखाई नहीं देता है, स्वयं का दिमाग काम नहीं करता या काम में लेने की जरूरत ही नहीं समझते हैं, उनको जैसा उनके निजी भक्त कहते हैं वहीं सब कुछ होता है फिर चाहे वह धर्म की आड़ में दंगा फैलाने की बात हो, निजी संपत्ति जोड़ने की बात हो, किसी को गिराने की बात हो, किसी को लड़ाने की बात हो या फिर स्वार्थ साधने की बात हो। देशहित और सर्वहित की कोई चिन्ता ही नहीं करता है। आइए, इस प्रकार की सोच से हटें, लोगों को ऐसी सोच को छोड़ पहले देशहित फिर अन्य कोई हित। हमें अपने देश पर गर्व करना चाहिए।

प्रेरणा बिन्दु:- 
देश के लिए करना, देश के लिए चलना
देश के लिए जीना, देश के लिए मरना
देश है तो हम हैं मेहनत है तो हम हैं
सर्वहित देशहित साथ रखके नित बढ़ना।



 

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