बुराई व्यक्ति को नहीं, व्यक्ति बुराई को पकडक़ता है

Samachar Jagat | Tuesday, 30 Apr 2019 03:57:51 PM
Not the evil person, the person caught the evil

एक बार विनोबाजी कहीं जा रहे थे, उन्हें शाम को किसी गंाव में रूकना पड़ा। विनोबाजी का समाचार सुनकर एक व्यक्ति अपनी समस्या के समाधान हेतु उनके पास आया और महात्माजी को सादर प्रणाम किया और कहा कि महात्माजी, शराब मेरा पीछा नहीं छोड़ रही है, मैं इससे बहुत ही परेशान हूं। कृपया कोई उपाय बताने की कृपा करें। उस व्यक्ति को महात्माजी ने कहा कि आप इस समस्या के समाधान के लिए तुम कल आना और मैं भीतर रहूंगा तुम मुझे बाहर से आवाज लगा लेना। वह व्यक्ति दूसरे दिन नियत समय पर आया और जोर से बोला- महात्माजी मैं आ गया हूं कृपया बाहर आने का कष्ट करें। जब महात्माजी बाहर नहीं आए तो उसने अंदर झांक कर देखा तो वे आश्चर्यचकित हो गए। 

महात्माजी एक खंभे को पकड़ कर जोर-जोर से बोल रहे थे कि मैं बाहर कैसे आऊं, इस खंभे ने मुझे पकड़ रखा है, यह छोड़ता ही नहीं है। हैरान-परेशान उस व्यक्ति ने कहा कि महात्माजी यह आप क्या कह रहे हैं कि खंभा ने आपको पकड़ रखा है? आपने ही खंभे को पकड़ रखा है। आप इसे छोडक़र बाहर आने का कष्ट करें। विनोबाजी ने हंसते हुए बोले- मेरे बच्चे, आपने भी तो यही कर रखा है, शराब ने आपको नहीं पकड़ रखा है बल्कि आपने ही शराब को पकड़ रखा है। वह व्यक्ति शर्मसार हो गया और शराब छोड़ दी।

प्रिय मित्रो, यहां यह ध्यान देने की बात है कि व्यक्ति ही बुराई के मूल में स्वयं व्यक्ति ही होता है। बुराई किसी का पीछा नहीं करती है, बल्कि व्यक्ति ही बुराई का पीछा करती है, उसको अपनाता है, उसको आदत बनाता है और फिर वह बुराई का आदी हो जाता है। केवल नशीले पदार्थांे का सेवन करना या फिर अन्य गलत चीजों का सेवन करना ही बुराई नहीं है। बल्कि किसी की निंदा करना, बुराई करना, धोखा देना, धोखे में रखना, कर्तव्य विमुख रहना, चोरी, डकैती, लूटपात, अपहरण, आलस्य, ईष्र्या, नकारात्मक, आरोप-प्रत्यारोप और अमानवीय दुष्कर्मांे में लिप्त रहना भी बहुत बड़ी बुराई है। ये बुराइयां बहुत बड़ी हैं लेकिन ये अपनी जगह खड़ी रहती है, ये स्वयं किसी के पास चलकर नहीं आती है, ये टस से मस नहीं होती है, अपनी जगह स्थिर रहती है। यह तो मनुष्य ही है जो कि स्वयं उनके पास चलकर जाता है, उनको अपने मुंह लगाता है और अपने मानव धर्म को बिल्कुल भूल बैठता है। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति को यह अच्छे से समझना होगा कि ये सब बुराइयां कभी अपने आप उसके पास चलकर नहीं आती हैं, बुराइयां किसी को नहीं अपनाती हैं बल्कि व्यक्ति ही होता है जो इनको अपनाता है और अपने अनमोल जीवन को इन बुराइयों का माध्यम बनाकर कलंकित कर लेता है। आइए, इन सब बुराइयों को नहीं पकड़े बल्कि अच्छाइयां का हाथ पकड़े।

प्रेरणा बिन्दु:- 
जिंदगी अनमोल प्यारे
सद्गुण अपनाले सारे
बुराई ने किसको छोड़ा मीत
यह तडफ़ा-तडफ़ाकर मारे।



 

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