बुजुर्ग अनमोल विरासत हैं

Samachar Jagat | Saturday, 09 Feb 2019 06:04:15 PM
Old priceless heritage

बस पश्चिमी संस्कृति ने यदि किसी को आहत किया है, सबसे अधिक तोड़ा है, सबसे अधिक बेइज्जत किया है और जीवन के अंतिम पड़ाव को तार-तार किया है तो वे बुजुर्ग ही हैं। कितनी दयनीय स्थिति से गुजर रहे हैं हमारे बुजुर्ग इनकी बदहालत पर रोना आता है, रोज इनके अपमान के जलजले देखने-सुनने और पढ़ने को मिलते हैं। जिस व्यक्ति ने अपनी सूरत संभालते ही अपने कदमों को दौड़ा दिया उस तरफ जहां अपनी संतान की खुशहाली दिखाई दी, अपनी संतान का भविष्य संवरते दिखा और अपनी संतान का भविष्य उज्ज्वल दिखाई दिया। 

पेट की सलवटें भी अच्छे से खुल नहीं पाई केवल इसीलिए कि उनकी संतान को स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन मिले, वे अपनी पढ़ाई भी अच्छे से पूरी नहीं कर पाए लेकिन अपने बच्चों की पढ़ाई को बहुत आगे तक ले गए, वे दुविधाओं के बीच सुविधाओं को खोजते रहे लेकिन अपने बच्चों को अधिकतम सुविधाएं देने में कोई कसर नहीं रखी और वे जी तोड़ मेहनत करते रहे लेकिन अपने बच्चों को भविष्य संवारने के लिए उन्हें वक्त देते रहे।
लेकिन आज के बदहालों को देखकर इसे केवल दु:खद ही नहीं कहा जा सकता है बल्कि बुजुर्गांे के लिए त्रासदी का समय है, उनके अस्तित्व पर संकट का समय है।

यदि ऐसा ही होता रहा तो भारत की अनमोल धरोहर, घर के छायादार वृक्ष, घर के सम्मान के सागर, जिंदगी के अनुभवों के भण्डार, हर पल को शिद्धत से जीने वाले, बीते काल के साक्षात् गवाह, रिश्तों के पुरोधा, परिवार की नींव, मंजिल की मील के पत्थर, जीवन की दिशा और दशा, जानकारी के परिचय कोष, सम्बन्धों के हमराही, गली-मौहल्ले के संरक्षक, संस्कृति के संवाहक, संस्कारों के जनक, प्रेम के दरिये, अपनेपन के मसीहा, आत्मियता की खुशबू, हौसलों के आसमां, परोपकार की वायु और सर्वकल्याण की प्रकृति सृष्टि को अपनी दृष्टि में समाये ये बुजुर्ग आज ठगे से, अकेले से, विवश से अपनी शानदार जानदार जिंदगी पर आंसू बहा रहे हैं एक अंधेरे कोने में एक लाठी और कृषकाय काठी के साथ।

 यह बुजुर्गांे के साथ गलत ही नहीं, अन्याय ही नहीं बहुत बड़ी ज्यादती है अपनों के द्वारा ही। जबकि होना इसके ठीक विपरीत चाहिए क्योंकि इनकी एक-एक माथे की सलवटों में हजारों अनमोल अनुभव छुपे पड़े हैं, वे अनुभव बंद पड़े हैं, उन्हें खोलिए, उन अनुभवों को पढि़ए, जीवन को कारगर बनाने में काम में लिजिए, जीवन को सफल बनाने में काम में लीजिए। बुजुर्गांे की एक-एक बातों में जीवन के अनेक क्षेत्रों का ज्ञान भरा पड़ा है। आज बुजुर्गों से दूर जाने की जरूरत नहीं है, उनके पास कुछ समय देने की जरूरत है, उनसे ग्रहण करने की जरूरत है, उनसे सीख लेने की जरूरत है, उनको सम्मान देने की जरूरत है, उनसे बातें करने की जरूरत है, उनसे आशीर्वाद लेने की जरूरत है और उनसे आत्मियता रखने की जरूरत है। आइए, बुजुर्गों का सम्मान करें-सेवा करें और उनसे से आशीर्वाद लें क्योंकि बुजुर्गों की दुआएं, शुभकामनाएं जीवन को आबाद कर देती है, खुशहाल कर देती है।

प्रेरणा बिन्दु:- 
बुजुर्ग हमारे घर-परिवार-समाज और देश की संस्कृति हैं, संस्कार हैं, परम्पराएं हैं और जीवन के प्रकाश पुंज और अनुभवों के महासागर हैं।



 

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