टूटेगा मिथक एक बार भाजपा एक बार कांग्रेस का

Samachar Jagat | Saturday, 04 Aug 2018 10:57:01 AM
Once broken, myth is once the BJP once

चार माह बाद राज्य की विधानसभा के चुनाव होने जा रहे है। सत्तारूढ़ दल भाजपा अपनी पुन: वापसी के लिये संकल्पित है तो कांग्रेस पार्टी वर्तमान 22 सीटों से 122 के फेर में लगी हुई है। सत्तारूढ़ भाजपा अपने सुराज संकल्प घोषणाओंं की पिच्चासी प्रतिशत घोषणाओं की क्रियान्विति को अपनी सत्ता वापसी की कुंजी मान रही है तो? कांग्रेस सत्ता विरोधी लहर की फिराक में है। भाजपा की वर्तमान सरकार केन्द्र व राज्य की कल्याणकारी योजनाओं को जिस तीव्रता से आमजन को लाभान्वित करने में लगी हुई है उससे भी वर्तमान भाजपा सरकार अपने मतदाताओं के दिल के धरातल को मजबूत मानती है। 

सत्ता विरोधी लहर क्या वास्तव में है? यदि है तो जन मानस में इस सत्ता विरोधी लहर को दलीय कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं द्वारा जन सवांद स्थापित बनाकर खत्म करने के प्रयास जारी है। हम कुछ भी दलीय स्थितियों पर चर्चा करे। लेकिन भाजपा का अनुशासन और कैडर बेस स्थिति तथा आरएसएस का सान्निध्य भाजपा की बहुत बड़ी पूंजी है। कांग्रेस ने अपने युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी जिन्होंने अपने आप को परिवर्तन की शैली में ढ़ालने का प्रयास कर रहे है, अपनी राष्ट्रीय छवि को मोदी विरोधी स्वरूप में बदलने का प्रयास कर रहे है।

लेकिन लगता है कि राहुल गांधी को अपने आप में विजयी बनाना तो दूर स्वयं को स्थापित करने के लिये बहुत लम्बे व्यायाम और योगा की जरूरत पड़ेगी। इससे इन्कार नहीं किया जा सकता कि राहुल गांधी उस परिवार से आते है जिसकी पीढिय़ों ने राज किया है और स्वयं राहुल गांधी ने राज का सुख भोगा है किन्तु इतने वर्षों के शासन में रहने के बाद जिस परिपक्वता की राजनीति राहुल गांधी से देश की जनता को अपेक्षित है वह थोड़ी दूर की नजर आ रही है।

 खैर राष्ट्रीय राजनीति की हम चर्चा नहीं कर रहे है, राज्य की विधानसभा चुनावों पर चर्चा हो रही है, लेकिन विधानसभा चुनावों में दलगत राष्ट्रीय नेतृत्व का अपना महत्व और सम्बल होता है। इसी परिप्रेक्ष्य में भी भाजपा का पलड़ा बहुत भारी झुका हुआ स्पष्ट नजर आ रहा है। राजस्थान की विकास प्रिय मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे जिनके प्रति राज्य की जनता का अनूठा लगाव है, मुख्यमंत्री का विकास कार्यों के प्रति जिद्घीशैली उन्हें भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं में अलग छवि के रूप में प्रस्तुत करती है।

मुख्यमंत्री श्रीमती राजे की पहचान भाजपा में धर्म निरपेक्षता की पक्षधर के रूप में है।  राजे प्रदेश की छत्तीस कोमों को साथ रखने की क्षमता संजोये हुये है। मुख्यमंत्री की सुदृढ़ प्रशासनिक क्षमता और भाजपा संगठन के साथ आत्मिक कार्य करने की शैली छोटे से छोटे कार्यकत्र्ता, स्थानीय नेताओं के मनोबल को स्वत: ही बड़ा देती है। 

मुख्यमंत्री का संगठन और शासन में राजनैतिक सम्बन्धों में पारिवारिक और निजता का जो सम्बन्ध दृष्टित हो रहा है। वह छवि शासन और संगठन की मजबूती के लिये एक अलग विशेषता रखती है। 

राजे की छवि प्रदेश स्तर पर ही नहीं वरन आलाकमान और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मानस पटल पर भाजपा के विकासशील मुख्यमंत्री के रूप में है। इसी विश्वास पर सात जुलाई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जयपुर में लाभार्थी जनसंवाद की जो भाजपाशासित राज्यों की कड़ी में प्रथम और ऐतिहासिक सम्मेलन आयोजित हुआ। इस लाभार्थिजन संवाद कार्यक्रम से प्रधानमंत्री संतुष्ट ही नहीं वरन् गद्गद होकर दिल्ली रवाना हुये थे। इससे पहले भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बाड़मेर में रिफाईनरी के वैधानिक उद्घाटन कत्र्ता के रूप में पधारे थे तब भी प्रधानमंत्री राज्य में चल रही विकास गतिविधियों से प्रभावित थे।

 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जिन की सत्ता का ध्येय देश के आमजन का विकास, प्रदेशों का विकास तथा देश के विकास के सपनों को पूरा करना ही एक मात्र लक्ष्य है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भाजपा षासित राज्यों की छवि विकास स्तम्भों के रूप में देखना चाहते है। इसलिये भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के पास विकास यात्राओं को जारी रखना ही होगा। राजस्थान के सन्दर्भ में यहां का बहुआयामी भामाशाह कार्ड, प्रदेश में सडक़ों का जाल, पर्यटन क्षेत्र पर्यटकों की वृद्घि, मुख्यमंत्री जल-स्वाबलम्बन योजना, रिफाइनरी ईस्टन कैनाल प्रोजेक्ट योजना, किसानों की ऋणमाफी योजना, किसानों के उत्पादों (खाद्यान्न एवं तिलहन उपजों) की रिकॉर्ड स्तरीय समर्थन मूल्यों पर खरीददारी, कृषकों को समय पर भुगतान, राज्यकर्मियों को सातवे वेतन का लाभ, महिला स्वयं सहायता समूहों को भरपूर सहायता, चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार, प्रदेश के स्कूलों में मिड-डे मील योजनान्र्तगत छात्र-छात्राओं को उन्हें पौष्टिकता प्रदान करने के लिये दुध वितरण, रोडवेज में वरिष्ठजनों तथा महिलाओं का तीस प्रतिशत किराये की छूट, द्रव्यवती नदी प्रोजेक्ट पर कार्य, रिंग रोड निर्माण कार्य, प्रदेश की महिलाओं को रोजगार के अवसर सुलभ कराना तथा प्रदेश में कौशल सवर्धन के माध्यम से युवाओं के लिये रोजगारों के सृजन के माध्यम बनाये हैं, उससे कोई शत-प्रतिशत रोजगार उपलब्धिता का दावा तो नहीं लेकिन युवाओं के मनोबल वृद्घि में सहायक अवश्य है। आने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की यह घोषणा कि मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ही मुख्यमंत्री की चेहरा होगी, राज्य के मतदाताओं में बहुत बड़ा संतोष स्थापित हुआ है कि श्रीमती राजे का नेतृत्व ही मुख्यमंत्री के रूप में चुनाव होगा। 


वही कांगे्रस में सिर फुटबाल जारी है, कांग्रेस  की दलीय सम्मेलनों में हो रही अहम के टकरावों की राजनीति कांगे्रस के तथाकथित जन प्रेम को दर्शा रही है तो कांगे्रस में मुख्यमंत्री बनने के सपने हर प्रदेश के बड़े-बड़े नेताओं द्वारा दावे किये जा रहे है, कांगे्रस में अनुशासन कायम रखने के लिए राष्ट्रीय आलाकमान को कड़ा रुख अपनाना पड़ रहा है। लेकिन इस कड़े रुख का कोई असर नहीं दिख रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मुख्यमंत्री पद की चाहत पर आलाकमान की नहीं है राहत और प्रदेश कांगे्रसाध्यक्ष सचिन पायलट की मुख्यमंत्री पद की चाहत पर आमजन की नहीं है चाहत। प्रदेश मतदाता सचिन पायलट को मुख्यमंत्री के लिये बहुत बौना मानता है।

ऐसा कई बार महसूस होता है। कांगे्रस के सम्मेलन में एकत्रित हो रही भीड़ को कांगे्रस के मतदाता नहीं माना जा सकता। कांगे्रस में टिकटों की मारा-मारी टांग खींचने की प्रवृत्ति, काट सेवा ऐसे राजनैतिक अवगुणों से कांगे्रस आशावादी है और कांगे्रस का सत्ता में वापसी आगमन का मार्ग बहुत ही कठिन है। कांगे्रस को स्वयं 1993 दोहराता हुआ दिख रही है। इन सारे हालातों का राजनैतिक विश्लेषण नहीं दर्शाता है कि सत्तारूढ़ भाजपा एक बार कांगे्रस एक बार भाजपा के मिथक तोड़ेगी। 

मुख्यमंत्री  वसुन्धरा राजे की सुराज गौरव यात्रा जिस दलबल और कार्यकत्ताओं के उच्च स्तरीय मनोबल के साथ हो रही है वह मतदाताओं के स्नेह बंधन को ओर मजबूती प्रदान करेगी। क्योंकि प्रदेश की मुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री के रूप में नहीं बल्कि प्रदेश परिवार की मुखिया और परिवार हितैषी के रूप में दिल-ओर दिमाग में जगह बना चुकी है एंव निरंतर प्रयासरत है।
(ये लेखक के निजी विचार है)
 



 

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