उसके मुंह से निकल पड़ा ‘‘बेटा, तेरा भला हो

Samachar Jagat | Friday, 10 May 2019 03:53:45 PM
Out of his mouth,

बात बंगाल की है, वहां गुष्करा नाम का एक छोटा सा रेलवे स्टेशन है। यहां पर बहुत कम गाडि़यां रूकती थी। एक दिन जैसे ही रेलगाड़ी स्टेशन पर रूकी, लोग झटपट अपना सामान उतारने लगे और कुछ अपने सामान के साथ गाड़ी में चढ़ने लगे। उन्हीं लोगों के साथ एक वृद्ध महिला भी गाड़ी से नीचे उतरी। उस वृद्ध महिला के पास एक सामान की गठरी थी। वह गठरी उससे अपने सिर पर अकेले से नहीं रखी जा रही थी। उसने गठरी को अपने सिर पर रखवाने के लिए अनेक यात्रियों से प्रार्थना की, लेकिन किसी ने उसकी प्रार्थना पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया।

 इससे बुढि़या बहुत मायूस हो गई, वह कातर भरी दृष्टि से चारों ओर देखने लगी और लोगों की ऐसी संवेदनहीनता पर आंसू टपकने लगे उसकी आंखों से। तभी अचानक एक भद्र पुरुष जो कि प्रथम श्रेणी के डिब्बे में बैठे थे, उनकी नजर उस बुढि़या की विवशता की ओर गई। लेकिन गाड़ी छूटने की घंटी बज चुकी थी, बावजूद इसके उनसे रहा नहीं गया अर्थात् गाड़ी चलने की भी परवाह नहीं की। वे अपने डिब्बे से बड़ी ही शीघ्रता से नीचे उतरे और गठरी को फूर्ति से उठाकर बुढि़या के सिर पर रख दिया और उसी तीव्र गति से गाड़ी में चढ़ गए। गाड़ी चल पड़ी। बुढि़या की नजर चलती हुई गाड़ी पर थी, और उसके मुंह से अनेक आशीर्वाद उस भद्र पुरुष के लिए निकल रहे थे। उसके मुंह से निकला ‘‘बेटा, तेरा भला हो, तुझे ईश्वर सब सुख शांति और समृद्धि दे।’’

उस बुढि़या की गठरी उतारने वाले वे भद्र पुरुष थे- कासिम बाजार के राजा मणींद्र चंद्र नंदी जो उस गाड़ी से कोलकाता जा रहे थे। वे सचमुच में राजा थे, क्योंकि राजा वह नहीं होता जो धनी और बड़ी सेना वाला हो, सच्चा राजा तो वही होता है जो दीन दुखियों-दुर्बलों की मदद करता है। प्रिय युवाओं, आप भी, अपने हौसलों के बादशाह हो, हिम्मतों के पुजारी हो और दीन दुखियों के हम सफर हो, क्योंकि वही युवा आगे बढ़ेगा, कुछ कर गुजरेगा, नेतृत्व की कमान संभालेगा, घर-परिवार-समाज-देश और दुनिया संभालेगा जो सबसे पहले स्वयं को संभालेगा। स्वयं को वही संभालता है जो हर दिन हजारों आशीर्वाद और शुभकामनाएं लेता है। यहां-तहां हर कहां दर्दांे को हटाकर, छपाकर नहीं छिपाकर। जिसने भी आशीर्वाद की महत्ता समझ ली, समझो उसने न केवल स्वयं के जीवन का उद्धार किया बल्कि अनगिनत लोगों का उद्धारक भी बन गया।

प्रेरणा बिन्दु:- 
पानी का बुलबुला होती है जिंदगी
हवा का झौंका होती है जिंदगी
एक पल तो जी भर कर जी इसे
उड़ती पतंग सी होती है जिंदगी।



 

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