परिन्दें मुक्त गगन में उड़ने के लिए होते हैं

Samachar Jagat | Thursday, 18 Jan 2018 10:19:19 AM
Parindas are free to fly in the Gagan

एक  लडक़ा जो शहर में रहता था, उसे पक्षियों से प्रेम था लेकिन वह उनकी आजादी की कीमत नहीं समझता था। उसके पास एक पिंजरा था। सबसे पहले उसने अपने पिंजरे में एक चिडि़या को रखा। चिडि़या चुग्गा पानी के बावजूद पिंजरे में बहुत उदास रहती थी। लेकिन उसकी पीड़ा को वह लडक़ा नहीं समझता था। उसने धीरे-धीरे पिंजरे में बहुत सारी चिडि़याओं को बंद कर लिया, हालांकि वह उनकी देखभाल बहुत करता था। उसके दादाजी उसे बहुत डाटते थे, पिंजरे में चिडि़याओं को बंद कर रखने के लिए। लेकिन वह लडक़ा अपने दादाजी की बात पर तनिक भी ध्यान नहीं देता था। वह चिडि़याओं से भरे पिंजरे को घर में इधर-उधर लिए घूमता रहता था।

एक दिन वह बाजार से आ रहा था। वह मोटर साइकिल को गलत दिशा में और तेज गति से चला रहा था। थोड़ी दूर चलने के बाद उसने डिवाइडर पर टक्कर मार दी। उसकी मोटर साइकिल उछल कर दूसरी तरफ जा गिरी। इस हादसे में उसके दोनों पैरों में फे्रक्चर हो गये। उसे बहुत समय तक अस्पताल में रहना पड़ा। उसके दोनों पैरों में प्लास्टर बांधा गया। अब वह इतना विवश हो गया था कि खुद से चल भी नहीं पाता था। 

वह घर में एक ही कमरे में कैद बनकर रह गया। एक दिन वह चारपाई पर लेटा हुआ था बहुत उदास-निराश। एकाएक उसकी नजर बंद चिडि़याओं की तरफ गई। उसे चिडि़याएं बहुत निराश और दुखी दिखाई दी। लडक़े को अपना दर्द याद आ गया। उसने सोचा जिस प्रकार से मैं इस चारपाई पर पड़े रहने के लिए नहीं हूॅँ, उसी प्रकार से ये चिडि़याएं भी इस बंद पिंजरे के लिए नहीं बनी है, ये तो मुक्त गगन में उड़ने के लिए हैं, इनको पिंजरों में बंद करके मैंने बहुत बड़ी गलती की है फिर उसने धीरे से पिंजरे का दरवाजा खोल दिया और सभी चिडि़याएं फुर्र से चहचहाती आसमान की ओर उड़ गई।

प्रेरणा बिन्दु:- 
प्रकृति के प्रत्येक प्राणी को स्वतंत्र रहने के अधिकार हैं, उन्हें गुलामी की जंजीरों में बांधना न केवल अन्याय है बल्कि अपराध भी है।



 

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