बच्चियों से रेप में मृत्युदंड के बिल पर संसद की मुहर

Samachar Jagat | Saturday, 11 Aug 2018 11:48:33 AM
Parliament's seal on the bill of capital punishment in rap from girls

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देश में 12 साल से कम आयु की बच्चियों से दुष्कर्म के अपराध में मृत्युदंड की सजा के प्रावधान वाले विधेयक को संसद की मंजूरी मिल गई है। लोकसभा के बाद इसे इसी सप्ताह सोमवार को राज्यसभा ने भी पारित कर दिया है। विधेयक में 16 साल से कम आयु की किशोरियों से दुष्कर्म के अपराध में कठोर सजा का भी प्रावधान है।

राज्यसभा ने इन प्रावधानों वाले दंड विधि संशोधन विधेयक 2018 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस विधेयक के जरिए भारतीय दंड संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1972, दंड प्रक्रिया संहिता 1973 और लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के संशोधन का प्रावधान है। सरकार इस विधेयक के प्रावधानों के अध्यादेश के जरिए पहले ही लागू कर चुकी है। यह विधेयक कानून बनने पर इस संबंध में 21 अप्रैल को लागू दंड विधि संशोधन अध्यादेश 2018 की जगह लेगा। विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि पिछले कुछ समय में दुष्कर्म की अनेक घटनाएं सामने आई है, जिसने देश की मानवता को झकझोर दिया है। 


ऐसे में इस प्रकार के जघन्य अपराध के खिलाफ कठोर प्रावधानों वाला यह विधेयक लाया गया है। इसमें 12 वर्ष से कम आयु की बालिकाओं के खिलाफ ऐसे अपराध और 16 वर्ष से कम आयु की बालिकाओं के खिलाफ ऐसे अपराध के सिलसिले में कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। मंत्री ने कहा कि अध्यादेश लाना इसलिए जरूरी समझा गया क्योंकि जब देश भर में छोटी बच्चियों के साथ जघन्य दुष्कर्म की वारदातें सामने आ रही है तो सरकार चुप नहीं रह सकती थी। उस समय संसद सत्र भी नहीं चल रहा था, इसलिए अध्यादेश लाया गया। विधेयक के अनुसार 16 वर्ष से कम आयु की किशोरी से दुष्कर्म के अपराध में सजा 20 वर्ष से कम नहीं होगी और इसे बढ़ाकर आजीवन कारावास किया जा सकेगा।

इसका अभिप्राय उस व्यक्ति के शेष जीवन काल के लिए कारावास से होगा और जुर्माना भी देना होगा। दुष्कर्म के सभी मामलों के संबंध में जांच थाने में जानकारी देने से दो माह की अवधि में पूरी की जाएगी। ऐसे मामलों की जांच अधिकारी भी महिला होगी। जहां तक भी संभव हो सकेगा ऐसे मामलों की सुनवाई भी महिला न्यायाधीश द्वारा ही की जाएगी। गृह राज्यमंत्री रिजिजू ने कहा कि हमारी सरकार इस विधेयक के सख्त प्रावधानों लागू करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगी। सरकार की प्राथमिकता होगी कि हर मामले में न्याय हो। विधेयक में 12 वर्ष से कम उम्र की बालिकाओं के साथ दुष्कर्म के अपराध के लिए दंड को 70 वर्ष के न्यूनतम कारावास को बढ़ाकर 10 वर्ष करने का प्रावधान किया गया है। दोषियों को मृत्युदंड तक की सजा दी जा सकेगी।

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