जीवन यात्रा के लिए नए मार्ग प्रशस्त करें

Samachar Jagat | Friday, 02 Nov 2018 04:15:17 PM
Pave way for life travel

मनुष्य की जीवन यात्रा उसकी उम्र की लम्बाई से नहीं नापी जाती है, जीवन यात्रा में उपयोग किए जाने वाले साधनों से नहीं तय होती है, जीवन में आने वाले सुख-दु:ख से भी उसका मूल्यांकन नहीं होता है, पद-प्रतिष्ठा भी कुछ उसे परिभाषित नहीं करते हैं और प्रचलित परंपराओं भी उसके जीवन में कुछ नया नहीं भर सकती है। ऐसे में जीवन को सार्थक और सफल बनाने के लिए ऐसा क्या किया जाए जिससे कि यह जीवन अमर हो जाए। 

कहते हैं मनुष्य की जीवन यात्रा की शुरूआत गर्भधारण के साथ ही शुरू हो जाती है लेकिन व्यक्ति यदि चाहे तो वह इसे अनंत लम्बाई तक ले जा सकता है। व्यक्ति को जन्म के साथ ही घर-परिवार और भौतिक साधन-सुविधाओं के साथ-साथ बहुत सारी प्रचलित रूढि़यां-परंपराएं, मत-मतान्तर, अंधविश्वास, आस्था के प्रतीक, जीवन के ढंग और थोपने वाली अन्य चीजें मुक्त में लेकिन अनिवार्य रूप से मिलते हैं। उसे सब कुछ तैयार मिलता है। 

उसको तुरंत ही रिश्ते-नाते मिल जाते हैं, रिश्ते-नातों के साथ-साथ उनकी सोच भी मिल जाती है, उनके विचार भी मिल जाते हैं, उनके जीवन जीने के सारे तरीके भी मिल जाते हैं, उनके पैतृक व्यवसाय भी मिल जाते हैं, कलुषित वातावरण भी मिल जाता है, पर निंदा भी उपहार में मिल जाती है और इसके लिए निर्धारित शिक्षा व्यवस्था, समाज व्यवस्था और सरकारी सिस्टम भी मिल जाता है। कुल मिलाकर जैसे ही शिशु जन्म लेता है उसको घर-परिवार, समाज, देश-दुनिया के सारे प्रचलित संस्कार मिलने शुरू हो जाते हैं। ऐसी अंधी दौड़ और होड़ में वह अपनी जीवन यात्रा शुरू करता है। ऐसे में उसकी जीवन यात्रा कहां जाएगी, कैसे जाएगी, क्यों जाएगी और किस तरह जाएगी यह सब कुछ उसके विवेक पर निर्भर करता है। 

क्योंकि उसके चारों तरफ सामाजिक विद्रुपताओं का एक बहुत बड़ा जाल होता है और उसमें से निकलना या उस मजबूत चक्रव्यूह को तोड़ना उतना ही कठिन होता है जितना कि वीर अभिमन्यु के लिए था। क्योंकि अभिमन्यु महावीर होते हुए भी चक्रव्यूह को नहीं तोड़ पाया था। लेकिन यह भी तय है कि हजारों कांटों में से, उनके बीच में सुंगधित, कोमल-सुंदर गुलाब का फूल मुस्कुराता हुआ सबको हर्षित करता है। 

इसलिए व्यक्ति यदि गुलाब का फूल बनना चाहता है, औरों से अलग बनना चाहता है, विशेष बनना चाहता है, दुनिया को कुछ देना चाहता है और अपनी जीवन यात्रा को सार्थक-सफल और अनंत बनाना चाहता है तो उसे निर्धारित चक्रव्यूह से हर हाल में बाहर निकलना होगा, उन्हें तोड़ना और बने-बनाए हुए मार्गांे से हटकर अपने स्वयं के नए, जोखिम भरे मार्गांे का निर्माण करना होगा। अपनी नई सोच से, नई कल्पनाओं से, नए फैसलों से, नए हौसलों से और नई विचारधारा से। फिर निश्चित रूप से जीवन यात्रा न केवल लम्बी होगी वरन अजर-अमर-ईश्वर तक ले जाने वाली होगी।
प्रेरणा बिन्दु:- 
यदि जीवन यात्रा का मकसद नहीं होगी तो फिर यह कहां तक पहुंचेगी, क्या पता पहुंचेगी भी की नहीं या शुरू होते ही पूरी हो जाएगी।



 

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