किसानों की आय दोगुनी करने की तैयारी

Samachar Jagat | Wednesday, 14 Mar 2018 09:28:16 AM
Preparation of doubling of income of farmers

निति आयोग के साथ पिछले सप्ताह शुक्रवार को बैठक में राज्यों ने किसानों की आय दोगुनी करने की योजना पर सहमति जताई है। बैठक में शामिल राज्यों ने कृषि उत्पाद बाजार समिति (एपीएमसी) अधिनियम में बदलाव की भी बात कही है। आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि बजट में किसानों को डेढ़ गुना एमएसपी मुहैया कराने की घोषणा हुई थी। इस बैठक का मकसद राज्यों में किसानों को तत्काल राहत और भविष्य में उनकी आमदनी को बढ़ाना है। केंद्र का मकसद है कि किसानों को राज्यो में पहले मुनासिब तरीके से एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) मुहैया कराई जाए, फिर आगे कदम बढ़ाए। 

राज्यों में एमएसपी के लिए कार्यशील पूंजी मुहैया कराने की मांग रखी और एपीएमसी अधिनियम में बदलाव की बात कही। उत्तर  प्रदेश ने कहा कि उनकी कैबिनेट ने एपीएमसी (कृषि उत्पाद बाजार समिति) में बदलाव करते हुए निजी बाजारों को मंजूरी दी है। इसके अलावा उत्तराखंड ने इसी सत्र में एपीएमसी में बदलाव की बात कही जबकि राजस्थान का मसौदा तैयार है, जल्द मंजूरी मिल सकती है। तमिलनाडु ने समिति बनाई है तो झारखंड ने केंद्र स्थापित किए हैं। असम और केरल भी एपीएमसी एक्ट में बदलाव के लिए सहमत नजर आए।  बैठक में तीन पहलुओं पर विचार किया गया। 

इनमें पहला किसानों को एमएसपी मुहैया कराए जाने के लिए राज्यों को कोई मंजूरी नहीं लेनी पड़े ताकि वे तत्काल कदम उठा सके। 
दूसरा मध्यप्रदेश में चल रही भावांतर योजना को अपनाया जाए जिसके तहत मूल्य में आ रहे अंतर को राज्य सरकार सीधे किसानों के खाते में डालती है। 
तीसरा क्षेत्रीय व्यापारियों को विभिन्न प्रोत्साहन देकर किसानों से खरीद में सरकार द्वारा तय एमएसपी मुहैया कराई जाए। बैठक में शामिल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड, बिहार, राजस्थान, तमिलनाडु और तेलंगाना समेत अन्य राज्यों ने मांग रखी कि केंद्र सरकार कृषि उत्पादन विप्पणन समिति (एपीएमसी) एक्ट लागू करने के लिए राज्यों को प्रोत्साहन दें। 

तेलंगाना सहित कई राज्यों में मिर्च, हल्दी, फल और सब्जियों को भी एमएसपी दायरे में लाने की मांग रखी है, जबकि कुछ राज्यों ने कहा कि आलू में किसानों को हो रहे भारी नुकसान को देखते हुए केंद्र एमएपी का आधा खर्चा उठाए। बैठक में 28 राज्यों के बड़े अधिकारियों ने भाग लिया, लेकिन पश्चिम बंगाल और मेघालय ने दूरी बनाए रखी। बैठक में 50 प्रतिशत सीमा फसल खरीद पर तय करने की मांग राज्यों ने केंद्र के समक्ष रखी है। आशा की जाती है कि केंद्र सरकार फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य फसलों की बुवाई से पहले निर्धारित करेगी और फसलों के बाजार में आने से पहले उसकी खरीद की व्यवस्था करेगी। किसानों की उसकी लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य दिए जाने के बारे में कृषि मूल्य आयोग को आवश्यक निर्देश देगी।
 



 

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