यातायात नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माने का प्रावधान

Samachar Jagat | Wednesday, 10 Jul 2019 03:28:37 PM
Provision of heavy penalties for violation of traffic rules

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बीते सप्ताह मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक के जिस मसौदे को मंजूरी दी है, उसके मुताबिक अब यातायात नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान किया है। मसलन बिना लाइसेंस, शराब के नशे में, निर्धारित सीमा से अधिक तेज और तय मानकों से ज्यादा लोगों को बिठाकर खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाने जैसे नियमों के उल्लंघन पर कड़े जुर्माने का प्रावधान किया गया है। हालांकि जुर्माने की रकम पहले भी कम नहीं थी, फिर भी नियमों को तोड़ने और आर्थिक दंड चुकाकर वही गलती दोहराने की प्रवृति में कोई फर्क नहीं आ रहा था।

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अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि किसी मरीज को आपात स्थिति में ले जाने वाली एंबुलेंस तक के लिए लोग रास्ता छोड़ने के लिए तैयार नहीं होते। जबकि एंबुलेंस के रास्ते में बहुत कम वक्त के लिए भी बाधा बनना उसमें मौजूद मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। दुनिया के कई देशो में मरीज को ले जाने वाली एंबुलेंस का संकेत भर मिलने पर सडक़ पर मौजूद लगभग सभी गाडि़यां रास्ता पूरा खाली कर देती है ताकि एंबुलेंस आसानी से आगे निकल सके। इस बात को सब जानते हैं कि सडक़ों पर यातायात से संबंधित जितने भी नियम-कायदे कानून बनाए गए हैं, उनका मकसद मुसाफिरों या वाहन चालकों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करना है। लेकिन यह विचित्र विडंबना है कि बेहद मामूली सुविधा से लेकर महज शान बघारने के लिए कुछ लोग उन नियम-कायदों को धत्ता बताकर मनमानी करने से नहीं हिचकते। 

जबकि इससे पैदा जोखिम का शिकार वे भी होते हैं। हालांकि इन नियमों का पालन करने के लिए संबंधित महकमें कई बार सख्ती बरतते है और इनका उल्लंघन करने वालों की कानूनी तौर पर कैद या आर्थिक रूप से दंडित भी किया जाता है, लेकिन आज भी सडक़ पर नियमों के उल्लंघन को रोक पाना मुश्किल काम है। हैरानी है कि लापरवाही बरतने वाले पकड़े में आते हैं तो कई बार बिना किसी संकोच के निर्धारित आर्थिक दंड चुका देते हैं। पर नियम तोड़ने पर कोई अफसोस जताना जरूरी नहीं समझते। इसलिए अक्सर ऐसे सुझाव सामने आते रहे हैं कि सडड़ यातायात नियमों के उल्लंघन पर तय जुर्माने की रकम को इतना कर दिया जाना चाहिए ताकि आरोपों के लिए उसे चुकाना भारी पड़े और भविष्य में ऐसी गलती करने से बचेें। केंद्र ने नाबालिगों और किशोरों के वाहन चलाने और नियम तोड़ने की स्थिति में अब वाहन के मालिक या फिर अभिभावक को दोषी मानने का प्रावधान किया है। इसके लिए तीन साल की सजा के साथ-साथ 25 हजार रुपए तक का जुर्माना वसूलने का कानून में प्रावधान किया है। 

यातायात नियमों का ख्याल नहीं रखना बुनियादी रूप से लापरवाही है औ दिखावे के रोग से जुड़ी समस्या है, जिसका न केवल आर्थिक तौर पर बल्कि कई बार अपने जीवन को भी भारी नुकसान वाहन चलाने वालों को ही भुगतना पड़ता है। कई बार लगता है कि इस मसले पर व्यापक जन जागरूकता और ऐसे संदेश प्रसारित करने की जरूरत है कि सडक़ पर नियमों का पालन करना सभ्य और बेहतर इंसान होने का परिचायक है, जबकि उसे तोड़ना असभ्यता के साथ-साथ आपराधिक आचरण भी है। समाज के ज्यादातर लोग आपराधिक प्रवृति के नहीं होते हैं, इसलिए शायद ही कोई व्यक्ति अपने लिए असभ्य और आपराधिक पहचान को पसंद कर पाएगा। 

यह कोई छिपी बात नहीं है कि हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट बांधने, चौराहे की लालबत्ती पर रूकने जैसे तमाम साधारण यातायात नियमों का पालन नहीं करने की वजह से देश भर में रोजाना न जाने कितने हादसे होते हैं और लोगों की जान चली जाती है। इसलिए नई कानूनी व्यवस्था के जरिए अगर इस पर रोक लगाई जा सकी तो यह सबके हित में होगा।



 

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