राहुल गांधी का कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा

Samachar Jagat | Monday, 08 Jul 2019 03:26:41 PM
Rahul Gandhi resigns as Congress president

देश की सबसे पुरानी पार्टी के सबसे युवा अध्यक्ष राहुल गांधी ने पिछले एक माह से भी अधिक समय से इस्तीफे को लेकर बनी असमंजस की स्थिति और अटकलों को विराम देते हुए बुधवार को त्याग-पत्र की औपचारिक घोषणा कर दी और पार्टी को सुझाव दिया कि नया अध्यक्ष चुनने के लिए एक समूह गठित किया जाए क्योंकि उनके लिए यह उपयुक्त नहीं है कि इस प्रक्रिया में शामिल हो। चुनाव की हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने यह भी कहा है कि पार्टी को ‘‘भविष्य के विकास’’ के लिए उनका इस्तीफा देना जरूरी था। 

गांधी ने एक बयान में कहा है ‘‘मेरे लिए कांग्रेस की सेवा करना सम्मान की बात है, जिसके मूल्यों और आदर्शों ने हमारे सुंदर राष्ट्र की जीवनदायिनी के रूप में सेवा की है। मैं कृतज्ञता और असीम प्यार के लिए देश और अपने संगठन का कर्जदार रहूंगा।’’ उन्होंने कहा ‘‘कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर 2019 के चुनाव की हार की जिम्मेदारी मेरी है। हमारी पार्टी के भविष्य के विकास के लिए जवाबदेही होना महत्वपूर्ण है। इसी कारण से मैंने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया है।’’ उन्होंने कहा, मेरे कई साथियों ने सुझाव दिया कि मैं अगले कांग्रेस अध्यक्ष को नामित कर दूं। यह महत्वपूर्ण है कि कोई दूसरा हमारी पार्टी का नेतृत्व करे। लेकिन यह मेरे लिए उपयुक्त नहीं है कि मैं उस व्यक्ति का चयन करूं।’’ गांधी ने कहा हमारी पार्टी का गौरवशाली इतिहास और विरासत है। मैं इसके संघर्ष और गरिमा का बहुत सम्मान करता हूं। 

यह भारत के ताने बाने में समाहित है और मुझे विश्वास है कि पार्टी ऐसे व्यक्ति के बारे में बेहतरीन फैसला करेगी जो साहस, प्रेम, ईमानदारी के साथ नेतृत्व कर सके। गांधी ने कहा ‘‘मेरी लड़ाई सिर्फ राजनीतिक सत्ता के लिए कभी नहीं रही है। भाजपा के प्रति मेरी कोई घृणा या आक्रोश नहीं है। लेकिन मेरी रग-रग में भारत का विचार है।’’ अपने चार पेज के पत्र में राहुल ने कहा कि पार्टी को कई कड़े फैसले लेने होंगे। उन्होंने कहा है कि मैं निश्चित तौर पर अपनी पूरी ताकत से कांग्रेस पार्टी के आदर्शों के लिए लड़ता रहूंगा। जब भी पार्टी को मेरी जरूरत होगी मैं मौजूद रहूंगा। यहां यह बता दें कि लोकसभा में पार्टी की जबरदस्त हार के बाद से ही अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। 

उन्हें अध्यक्ष बने रहने के लिए मान मुनौव्वल चलता रहा किंतु वे इस्तीफे पर अड़े रहे। पार्टी के सभी पांचों कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों अशोक गहलोत, कमलनाथ, केप्टिन अमरिंदर सिंह, नारायण स्वामी व भूपेश बघेल ने हार के कारण मुख्यमंत्री पद छोड़ने की पेशकश कर दी, किन्तु वे अपने फैसले पर अडिग रहे। बुधवार को अंततोगत्वा उन्होंने औपचारिक रूप से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार बड़ी ही अप्रत्याशित रही। कहां तो कांग्रेस लोकसभा चुनाव जीतने और सरकार बनाने का दावा कर रही थी। राहुल भावी प्रधानमंत्री माने जा रहे थे और पार्टी 54 सीटें भी नहीं जीती कि उसे नेता विरोधी दल का पद भी मिल जाए। लोकसभा चुनावों से 5 महीने पहले कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी की सरकारों को तीन राज्य विधानसभाओं के चुनावों में हराकर मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में सत्ता में वापसी की थी और 5 महीनों में ही ऐसा क्या हो गया कि इन्हीं राज्यों में भारतीय जनता पार्टी लोकसभा चुनावों में अधिकांश सीटें जीत गई। 

राजस्थान में जीरो, मध्यप्रदेश में एक और छत्तीसगढ़ में 2 सीटें मिली। विधानसभाओं की जीत से कांग्रेस व आमजन में यह धारणा हो गई थी कि कांग्रेस केंद्र में भी वापस आ रही है और भारतीय जनता पार्टी भी सशंकित थी। राज्यों में इस जीत का श्रेय राहुल गांधी को दिया और भाजपा ने इसे पार्टी की कमजोरी माना। अब लोकसभा में जीत का श्रेय भाजपा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दे रही है और कांग्रेस उसे पार्टी की कमजोरी मान रही है। सभी पार्टियां कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी, बहुजन समाजवादी पार्टी और समाजवादी पार्टी में यह चलन ही हो गया है कि पार्टी जीती तो पूरा श्रेय नरेन्द्र मोदी, राहुल गांधी, मायावती और अखिलेश यादव के कुशल नेतृत्व का और हार गए तो पार्टी की कमजोरी और अब चुनावों में ईवीएम के प्रयोग को भी दिया जाने लगा है। यूपीए सरकार के समय लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस व समाजवादी का समझौता हो गया और दोनों में प्रत्येक ने 20-22 सीटें जीत ली। इसमें कांग्रेस की पिछली सीटों से दुगनी से भी ज्यादा हो गई। 

उस समय कांग्रेस सरकार के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने इसका पूरा श्रेय राहुल गांधी के कुशल नेतृत्व को दिया। अब हालात यह है कि उत्तर प्रदेश की 80 सीटों पर मात्र एक श्रीमती सोनिया गांधी की रायबरेली जीती गई और स्वयं राहुल गांधी अमेठी से हार गए। यहां यह उल्लेखनीय है कि 1999 में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार बनी जो पूरे 5 साल चली। उस समय जीत का पूरा श्रेय अटल बिहारी वाजपेयी के कुशल नेतृत्व को दिया गया। 

लेकिन एक टर्म के बाद ही 2004 के लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री वाजपेयी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा और पार्टी हार गई और सरकार चली गई। उस समय स्वयं वाजपेयी ने पार्टी के चुनाव संचालक प्रमोद महाजन को लक्ष्य कर क्षुब्ध होकर कहा ‘हरवा दिया’ क्योंकि उस समय महाजन ने चुनाव को ‘ही टेक’ कहकर चलाया था। पार्टी हार गई तो प्रमोद महाजन व उनके ही टेक ने हराया, जीत जाते तो वाजपेयी का नेतृत्व ही जीता कहा जाता। आज कांग्रेस में भी ऐसी ही कुछ स्थिति चल रही है। जब उन्होंने पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया तो यह अपेक्षा थी कि उनके साथ बहुत से ‘बड़े-बड़े’ नेता भी इस्तीफा देंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ तब राहुल ने कटाक्ष किया कि ये ‘नेता’ कहते तो यह रहे कि मेरे इशारे पर कुछ भी कर सकते हैं, लेकिन जब इस्तीफा देना था तो वे पदों से चिपके रहे।

इस व्यंगबाण के चलते ही कांग्रेस में इस्तीफा की भरमार पेशकश होने लगी। यह भी सच है कि लोकसभा हार के बाद मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की पेशकश की थी। इस्तीफे की औपचारिक घोषणा से दो दिन पूर्व कांग्रेस शासित 5 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने हार के कारण मुख्यमंत्री पद छोड़ने की पेशकश कर दी थी। कार्य समिति में नए अध्यक्ष का नाम तय होगा। कार्य समिति की बैठक इसी हफ्ते होगी।



 

यहां क्लिक करें : हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें, समाचार जगत मोबाइल एप। हिन्दी चटपटी एवं रोचक खबरों से जुड़े और अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!

loading...
ताज़ा खबर

Copyright @ 2019 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.