नौकायान खेल को बढ़ावा दे राजस्थान सरकार

Samachar Jagat | Friday, 31 Aug 2018 11:01:19 AM
Rajasthan government promoting yachting sport

Rajasthan Tourism App - Welcomes to the land of Sun, Sand and adventures

जहां तक नजर जायें वहीं दूर-दूर तक छाई बालू मिट्टी वाले रेगिस्तानी ईलाके में जन्में एक युवक को ऐसा जुनून छाया कि उसने नौकायान खेल में समंदर पर जीत हासिल कर विजयी पताका फहरायी। राजस्थान में तपती रेत वाले झुंझुनू जिले के बुडाना गांव में जन्में, पले, बढ़े ओमप्रकाश कृष्णिया के खाते में जैसे-जैसे कामयाबियां आती गयी उसका मकसद भी बड़ा होता गया है। ओमप्रकाश ने एशियाड के नौकायान खेल में अपने चार साथियो के साथ स्वर्ण पदक क्या जीता इसी के साथ राजस्थान में नौकायान खेल को आगे बढ़ाने की मांग होने लगी है।

नौकायान पानी पर खेला जाने वाला खेल है। इसको खेलने के लिये बड़ी नदी, झील या समन्दर की जरूरत होती है। मगर आज भारत में इस खेल के ज्यादातर पदक विजेता खिलाड़ी मरूभमि राजस्थान से निकले हैं। राजस्थान के खिलाडिय़ो की शारीरिक बनावट नौकायान खेल के अनुकूल है। राजस्थान में नौकायान खेल की कोई सुविधा नहीं होने से यहां के खिलाड़ी इस खेल में आगे नहीं बढ़ पाते हैं। नौकायान में राजस्थान के जितने भी खिलाडिय़ों ने पदक जीता है वो सब भारतीय सेना की बदौलत ही सम्भव हो पाया है। सेना में भर्ती होने के बाद सेना की तरफ से राजस्थान के जवानो का चयन कर उनको नौकायान के प्रशिक्षण के लिये भेजा जाता है। 

जहां वो अपनी प्रतिभा कर प्रदर्शन कर पाते हैं। नौकायान के एशियन खेलो में भारत ने अब तक कुल 24 पदक जीते हैं जिनमें से अकेले राजस्थान के खिलाडिय़ो ने दो स्वर्ण, चार रजत व दो कांस्य सहित कुल आठ पदक जीते हैं। राजस्थान के कासम खान 1998 के बैंककांग एशियाड में कांस्य पदक जीतने वालीे चार सदस्यों की टीम में शामिल था। बजरंग लाल ताखर ने 2006 के दोहा एशियाड में रजत पदक, 2010 के गूआंगझोऊ एशियाड में स्वर्ण पदक व 2014 के इंचियोन एशियाड में कांस्य पदक जीता था। सतीश जोशी 2006 में एक रजत पदक व 2010 में दो रजत पदक जीतने वाली टीम में शामिल थे। राजस्थान के कासम खान 2002 में सिडनी ओलम्पिक, बजरंग लाल ताखर ने 2008 के बीजिंग ओलम्पिक व संदीप कुमार रेपस्वाल 2012 के लंदन ओलम्पिक में भाग ले चुके हैं। भारत में नौकायान खेल में अब तक 13 खिलाडिय़ों को अर्जुन पुरस्कार मिल चुका है जिनमें राजस्थान के कासम खान,बजरंगलाल ताखर व सतीश जोशी शामिल हैं।

राजस्थान में झुंझुनू जिले के गुढ़ागौडज़ी का संदीप रेपस्वाल 2012 के ओलंपिक प्रतियोगिता में भारत की तरफ से नौकायान में भाग ले चुका है। इससे पूर्व संदीप ने 2009 में एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था। संदीप ने 2010 में चीन में एशियन गेम में भाग लिया था। संदीप ने 2011 में कोरिया में संपन्न एशियन चैंपियनशिप में दो रजत पदक जीते थे। संदीप रेपस्वाल अभी सेना में सूबेदार पद पर जबलपुर में कार्यरत है। जिले के झाझड़ गांव के रूपेंद्रसिंह शेखावत ने 2015 में चीन के बीजिंग में संपन्न हुई एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था। रूपेंद्रसिंह शेखावत अभी सेना में नायब सूबेदार है। झुंझुनू शहर के रहने वाले सेना में नायब सूबेदार दिलीपसिंह शेखावत 2011-2015 तक नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक व नेशनल गेम्स में रजत पदक जीता है। जोधपुर जिले का राकेश रलिया भी कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग ले चुका है।

राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र के सीकर जिले की बालूराम की ढ़ाणी के बजरंगलाल ताखर ने नौकायान में 2010 में चीन के गांजाऊ शहर  में सम्पन्न हुये एशियन गेम्स में नौकायान प्रतियोगिता की व्यक्तिगत स्पर्धा में प्रथम स्वर्ण पदक जीत कर देश का नाम गौरवान्वित किया था। ताखर ने 2006 के साऊथ एशियन गेम्स में सिंगल व डबल स्किल में दो स्वर्ण पदक जीते। इसी वर्ष दोहा में सम्पन्न हुये एशियन गेम्स की नौकायान प्रतियोगिता में उन्होने प्रथम व्यक्तिगत रजत पदक जीता। 2007 में कोरिया में सम्पन्न हुयी एशियन नौकायान प्रतियोगिता में उन्होने स्वर्ण पदक जीता।

 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक विजेता खिलाडिय़ों को हरियाण व पंजाब सरकार की तरह सीधे प्रशासनिक अधिकारी पद पर नियुक्त करने की राजस्थान सरकार की घोषणा पर बजरंगलाल ताखर का कहना है कि इस मामले में राजस्थान सरकार कुछ नहीं कर रही हैं। मैंने 2010 के एशियाड में व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था। मुझे राज्य सरकार ने सीधे पुलिस उपाधीक्षक बनाने का वायदा किया था मगर आज तक कुछ नही किया। ना काग्रेंस सरकार ने कुछ किया ना ही भाजपा सरकार ने। सभी सरकारे झूठ बोलकर खिलाडिय़ो को गुमराह कर रही है। राजस्थान में आज तक एक भी खिलाड़ी को प्रशासनिक अधिकारी की नौकरी नहीं दी गयी। जबकि हरियाणा व पंजाब में कई खिलाडिय़ों को नियुक्ति दी गयी है। 

राजस्थान सरकार को भी खिलाडिय़ो के साथ न्याय करना चाहिये। खिलाडिय़ों की उपेक्षा को लेकर ताखर राजस्थान सरकार से सख्त नाराज है। बातचीत में उन्होने बताया कि हमारे प्रदेश की सरकार खेलो व खिलाडिय़ों को लेकर संजीदा नहीं है। सरकार की उपेक्षा के कारण कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी दूसरे प्रदेशो से खेलते हैं। ताखर का कहना है कि खिलाडिय़ों को लेकर सरकार को गम्भीरता अपनानी होगी तभी राजस्थान खेलो में आगे बढ़ पायेगा। राजस्थान में नौकायान की संभावनाओं पर ताखर का कहना है शेखावाटी के खिलाडिय़ों में अन्य प्रदेशों के खिलाडिय़ों के मुकाबले अधिक दमखम होता है मगर जरूरत है उन्हे उचित प्रशिक्षण व सुविधा उपलब्ध करवाने की। यदि सरकार द्वारा यहां नौकायान की पर्याप्त सुविधायें उपलब्ध करवा दी जाये तो इस क्षेत्र से कई अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकल सकतें हैं। इस क्षेत्र में प्रतिभाओं की कमी नहीं हैं। 

1982 के एशियाड खेलों के दौरान जयपुर के रामगढ़ बांध में नौकायान प्रतियोगिताओं का आयोजन करवाया गया था मगर उसके बाद किसी ने वहां की सुध नहीं ली इस कारण यहां पर दुबारा ऐसी कोई प्रतियोगिता का आयोजन नहीं हो पाया। नौकायान के पूर्व ओलम्पियन कासम खान अलवर जिले के रहने वाले हैं। कासम खान ने 1998 के एशियाड में कांस्य पदक जीता था। राजस्थान के जयपुर जिले के शाहपुरा के सतीश जोशी 2006 के दोहा एशियाड में रजत पदक व 2010 के चीन एशियाड में दो रजत पदक जीत चुके हैं। दो बार एशियाई खेलों में तीन रजत पदक जीत चुके सतीश जोशी ने हैदराबाद से फोन पर बताया कि राजस्थान में बहुत से अच्छे खिलाड़ी हैं। मगर उनकी प्रतिभा निखर नहीं पाती। क्योंकि राजस्थान में नौकायान को कोई जानता ही नहीं हैं।

 राजस्थान में नौकायान खेल की ना कोई एकेडमी है ना ही कोई खेल संगठन। यहां के खिलाड़ी सेना में जाते है तब उनकी प्रतिभा का पता चलता है। सरकार भी नौकायान खेल को लेकर गंभीर नहीं है। पूर्व ओलंपियन संदीप रेपस्वाल का कहना है कि राजस्थान का कोई खिलाड़ी सेना से खेल कर नौकायान में जब कोई पदक जीत लेता है तो दो-चार दिन उसकी चर्चा होती है फिर उसको भुला दिया जाता है। मीडिया भी उसकी सुध नहीं लेता है। संदीप ने जबलपुर से फोन पर बताया कि यदि यहां नौकायान की पर्याप्त सुविधायें उपलब्ध करवा दी जाये तो बजरंग लाल ताखर जैसे कई खिलाड़ी निकल सकतें हैं। वर्तमान में नौकायान का प्रशिक्षण केन्द्र पुणे, हैदराबाद में ही जिस कारण राजस्थान के खिलाड़ी वहां तक नहीं जा पाते हैं।

 यदि राज्य सरकार नौकायान खेल के लिए प्रदेश में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित कर दे तो यहां के कई नवयुवक बड़े स्तर पर खेल सकते हैं। नौकायान में भारत ने एशियाड में अब तक दो स्वर्ण पदक जीते हैं दोना ही शेखावाटी के खिलाडिय़ों की बदोलत। इसी से समझा जा सकता है कि यहां के खिलाडिय़ों में कितना दम-खम है। राजस्थान में कासम खान, बजरंगलाल ताखर, सतीश जोशी जैसे ओलंपियन खिलाडिय़ों को साथ लेकर सरकार नौकायान खेल के लिये कुछ नया करने की सोचे तो राज्य के खिलाड़ी हर बार पदक जीत सकते हैं। मगर राजस्थान सरकार की मुख्यमंत्री व खेल मंत्री के पास इतना वक्त ही नहीं है कि वो नौकायान जैसे खेल की तरफ ध्यान भी दे सके। इसे हम राजस्थान के खिलाडिय़ों का दुर्भाग्य ही कहेंगे।
(ये लेखक के निजी विचार है) 

Rajasthan Tourism App - Welcomes to the land of Sun, Sand and adventures


 

यहां क्लिक करें : हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें, समाचार जगत मोबाइल एप। हिन्दी चटपटी एवं रोचक खबरों से जुड़े और अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!



Copyright @ 2018 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.