महंगाई पर काबू पाने को रिजर्व बैंक ने बढ़ाई ब्याज दर

Samachar Jagat | Monday, 06 Aug 2018 10:28:56 AM
RBI hikes interest rate to overcome inflation

Rajasthan Tourism App - Welcomes to the land of Sun, Sand and adventures

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बढ़ती महंगाई की आशंका को लेकर अपनी दूसरी मौद्रिक नीति में भी रीपो रेट 0.25 फीसदी बढ़ा दी। रीपो रेट वह ब्याज दर है, जिस पर तमाम भारतीय बैंक अपने कारोबार के लिए आरबीआई से रकम उठाते हैं। यह दर जून में 6 फीसदी से बढ़ाकर 6.25 फीसदी की गई थी और अभी वहां से बढ़ाकर 6.5 फीसदी यानी सवा छह फीसदी से बढ़ाकर साढ़े छह फीसदी कर दी गई है। अक्टूबर 2013 के बाद पहली बार ही ऐसा हुआ है कि देश की यह मुख्य ब्याज दर लगातार दो मौद्रिक नीतियों में बढ़ाई गई है। हालांकि पिछले कुछ समय से बाजार और अर्थशास्त्रियों से इस बात के संकेत आ रहे थे कि जिस तरह के हालात है, उनमें रिजर्व बैंक फिर से नीतिगत दरें बढ़ाने को मजबूर हो सकता है।

यहां यह बता दें कि रिजर्व बैंक ने मुद्रास्फीति को 4 फीसदी से ऊपर न जाने देने का लक्ष्य रखा है, लेकिन तमाम भीतरी-बाहरी वजहों से इस पर टिके रहना मुश्किल हो रहा है। महंगाई लगातार बढ़ रही है और जून में ही यह 5 फीसदी से पार चली गई थी। ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें इस साल लगभग 20 फीसदी बढ़ चुकी है। मई में तो कू्रड ऑयल 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से भी ऊपर चला गया था, जो 2014 के बाद से इसकी सबसे ऊंचाी कीमत है। इसके चलते केंद्र सरकार के आयात बिल में भारी इजाफा हुआ है। रुपए का स्तर पर भी डॉलर के मुकाबले काफी कमजोर चल रहा है। 

इस कैलेंडर वर्ष में 7 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है रुपया। 20 जुलाई को डॉलर के मुकाबले रुपया 69.13 के रिकार्ड निचले स्तर पर चला आया था। इन दोनों वजहों से रिजर्व बैंक को आयातित महंगाई का डर सता रहा है। इस साल अच्छे मानसून की सूचना से महंगाई में राहत की उम्मीद की जाती रही है, लेकिन इस मामले में भी अभी तक के आंकड़े अधिक आशावादी होने की इजाजत नहीं देते। मौसम विभाग ने कई क्षेत्रों में जरूरत से कम या ज्यादा बारिश दर्ज करत हुए मानसून का पैटर्न असंतुलित रहने के संकेत दिए हैं। करीब-करीब आधा सावन जाने को है। अब तक पूरे देश में सामान्य से 6 फीसदी कम बारिश हुई है। जुलाई निकल गई है और अगस्त में मानसून की चाल कमजोर रहने के अंदेशे से खरीफ के बूते महंगाई थामने की उम्मीद सुस्त पड़ी है।

 सरकार ने खरीफ का एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) बढ़ाकर किसानों की हौसला अफजाई जरूर की है, लेकिन नतीजों के लिए अभी ढ़ाई इंतजार करना होगा। इधर रिजर्व बैंक ने भी यह इशारा कर दिया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी के कारण खाद्य वस्तुएं महंगी हो सकती है। बैंक का यह अनुमान भी चिंतित करने वाला है कि खुदरा मुद्रास्फीति के अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में बढक़र पांच फीसदी तक पहुंच सकती है। इसका सीधा सा मतलब है कि महंगाई बनी रहेगी। हाल-फिलहाल इससे राहत के कोई आसार नहीं है। ब्याज दरों में तेज बढ़ोतरी से आम लोगों के साथ-साथ कॉरपोरेट्स पर भी असर पड़ेगा। लोग बचत के लिए मन बनाएंगे, लेकिन होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई बढ़ने से बिक्री के आंकड़े नीचे आएंगे। बैंकिंग सेक्टर के कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि कर्ज लेने की रफ्तार अभी धीमी है, लिहाजा बैंकों का जोर कर्ज महंगा करने से ज्यादा अपना बिजनेस बढ़ाने पर होना चाहिए। 

लेकिन आम समझ यही कहती है कि मार्केट कन्ज्यूमर ड्यूटेबल्स की बिक्री नरम पड़ सकती है और बैंकों से कर्ज उठाकर किए जाने वाले निजी निवेश में सुस्ती आ सकती है। बहरहाल इस चुनावी साल में सरकार आर्थिक क्षेत्र में ज्यादा सुस्ती कतई नहीं चाहेगी। लिहाजा अपना निवेश उसे हर कीमत पर बढ़ाना होगा। नीतिगत दर बढ़ने के फैसले से उद्योग भी अछूते नहीं रहेंगे। कर्ज महंगा होगा तो लागत बढ़ेगी और औद्योगिक वृद्धि पर असर पड़ेगा। अगर हालात लंबे समय तक ऐसे बने रहे तो उद्योगों के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है। रोजगार सृजन पर बुरा असर पड़ेगा यानी कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। 

Rajasthan Tourism App - Welcomes to the land of Sun, Sand and adventures


 

यहां क्लिक करें : हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें, समाचार जगत मोबाइल एप। हिन्दी चटपटी एवं रोचक खबरों से जुड़े और अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!



Copyright @ 2018 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.