धर्म का मतलब है अपने अच्छे वचनों पर डटे रहना

Samachar Jagat | Friday, 17 May 2019 02:10:53 PM
Religion means to stick to your good words

Rajasthan Tourism App - Welcomes to the land of Sun, Sand and adventures

आजकल लोगों ने धर्म की परिभाषा को बहुत संकीर्ण कर दिया है और इसी संकीर्णता के चलते वे समाज को बांटते रहते हैं, नफरत फैलाते रहते हैं। इसका दुष्प्रभाव यह होता है कि देश का विकास रूक जाता है और देश की शांति भंग हो जाती है। धर्म का अर्थ है कि अच्छी-अच्छी बातों को धारण करना, उनका पालना करना और मानवता की समृद्धि-सुख-शांति के लिए अनवरत प्रयास करते रहना-करते रहना। इस तथ्य को समझने के लिए एक प्राचीन कहानी है वह आज भी प्रासंगिक है।

एक बार एक प्रजा हितैषी राजा था। वह प्रजा का बड़ा ध्यान रखता था। उसके दु:ख-संकटों को दूर करना उसका प्रथम कर्तव्य था। इसी भावना के चलते राजा ने एक दिन घोषणा करवाई कि आज सभी वस्तु निर्माता एक नियत स्थान पर बाजार लगाएंगे। लोग अपनी जरूरत के अनुसार उनका सामान खरीदेंगे। यदि लोगों के द्वारा सामान खरीदने के बाद भी किसी वस्तु निर्माता की कोई चीज नहीं बिके तो कृपया वह अपनी वस्तु राजमहल में ले आए, उसे मैं खरीद लूंगा।

दूसरे दिन बाजार लगा, उसमें एक शिल्पी की मूर्ति जो अलक्ष्मी की थी उसे किसी ने नहीं खरीदा। वह उसको लेकर राजा के पास गया, राजा ने उस अलक्ष्मी की मूर्ति को खरीद लिया, लेकिन उस मूर्ति के खरीदते ही राज लक्ष्मी तुरंत बाहर जाने लगी। राजा ने राज लक्ष्मी से पूछा कि तुम कहां जा रही हो? इस पर राज लक्ष्मी ने कहा कि अब मैं तुम्हारे यहां से जा रही हूं क्योंकि आपने अलक्ष्मी को अपने महल में रख लिया है। चूंकि राजा अपने वचनों से बंधा हुआ था, उसने राज लक्ष्मी को जाने दिया।

इसके बाद उसके महल से श्री नारायण जाने लगे तो राजा ने उनसे पूछा कि तुम क्यों जा रहे हो? इस पर श्री नारायण ने कहा कि मैं जहां राज लक्ष्मी रहेंगी वहीं पर रहूंगा। राजा ने उनको भी जाने दिया। इसके बाद तो जाने वालों की लाइन लग गई, एक-एक करके सभी देवता चले गए। सबसे अंत में धर्मराज जाने लगे तो राजा ने पूछा कि आप क्यों जा रहे हो? धर्मराज ने कहा कि जब सभी देवता चले गए तो फिर मैं क्या करूंगा। इस पर राजा ने कहा हे महाराज! मैं आपके ही कारण तो सभी देवताओं को जाने दिया है, मैं अपने धर्म पर हूं, अपने वचनों पर डटे रहना ही धर्म है। राजा से ऐसा सुनकर धर्मराज महल में ही रूक गए और उनके महल में रूकने से राज लक्ष्मी-श्री नारायण सहित सभी देवतागण भी वापस महल में आ गए।

प्रेरणा बिन्दु:- 
सच कड़ा संघर्ष भरा
लेकिन सच उत्कर्ष रहा
साथ सच के जो चला
उसके जीवन में हर्ष रहा।

loading...


 

यहां क्लिक करें : हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें, समाचार जगत मोबाइल एप। हिन्दी चटपटी एवं रोचक खबरों से जुड़े और अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!

loading...
loading...


Copyright @ 2019 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.