सैदव बना रहेगा डाक विभाग का महत्व

Samachar Jagat | Tuesday, 09 Oct 2018 05:00:37 PM
Signage will be important for postal department

Rajasthan Tourism App - Welcomes to the land of Sun, Sand and adventures

डाक विभाग कई दशकों तक देश के अंदर ही नहीं बल्कि एक देश से दूसरे देश तक सूचना पहुंचाने का सर्वाधिक विश्वसनीय, सुगम और सस्ता साधन रहा है। लेकिन इस क्षेत्र में निजी कम्पनियों के बढ़ते दबदबे और फिर सूचना तकनीक के नये माध्यमों के प्रसार के कारण डाक विभाग की भूमिका लगातार कम होती गयी है। वैसे इसकी प्रासंगिकता पूरी दुनिया में आज भी बरकरार है। वर्तमान में डाक विभाग का एकाधिकार लगभग खत्म हो गया है। यही कारण है कि डाक विभाग दुनिया भर में अब कई नयी तकनीकी सेवाओं से जुड़ रहा है।


दुनियाभर में 9 अक्तूबर को विश्व डाक दिवस के तौर पर मनाया जाता है। वर्ष 1874 में इसी दिन यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन (यूपीयू) का गठन करने के लिए स्विट्जरलैंड की राजधानी बर्न में 22 देशों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किया था। वर्ष 1969 में टोकियो, जापान में आयोजित सम्मेलन में विश्व डाक दिवस के रूप में इसी दिन को चयन किये जाने की घोषणा की गयी। एक जुलाई 1876 को भारत यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन का सदस्य बनने वाला भारत पहला एशियाई देश था। जनसंख्या और अंतरराष्ट्रीय मेल ट्रैफिक के आधार पर भारत शुरू से ही प्रथम श्रेणी का सदस्य रहा। संयुक्त राष्ट्र संघ के गठन के बाद 1947 में यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन संयुक्त राष्ट्र की एक विशिष्ट एजेंसी बन गयी।

विश्व डाक दिवस का मकसद आम आदमी और कारोबारियों के रोजमर्रा के जीवन समेत देश के सामाजिक और आॢथक विकास में डाक क्षेत्र के योगदान के बारे में जागरुकता पैदा करना है। दुनियाभर में प्रत्येक वर्ष 150 से ज्यादा देशों में विविध तरीकों से विश्व डाक दिवस आयोजित किया जाता है। डाक सेवाओं के बदलते माहौल और उभर रही नयी कारोबारी चुनौतियों ने इस ओर ध्यान आकृष्ट किया है। विशेष रणनीति और कार्यक्रमों के माध्यम से ही इसका समाधान किया जा सकता है। योजनाबद्ध रणनीति तैयार करने से यूपीयू के सदस्यों को नयी चुनौतियों से निबटने और संचालन की नयी प्रणालियों को अपनाने में बेहतर मदद मिलती है। सितम्बर, 2012 में दोहा पोस्टल स्ट्रेटजी के तहत 2013-2016 के लिए यूपीयू सम्मेलन में रणनीति बनायी गयी थी। इससे सदस्य देशों को मूल्य आधारित सेवाएं और रणनीतिक रोड मैप तैयार करने में मदद मिली।

इंटरनेशनल ब्यूरो यूपीयू का मुख्यालय स्विट्जरलैंड की राजधानी बर्न में स्थित है। यहां तकरीबन 50 विभित्र देशों के ढाई सौ से ज्यादा कर्मचारी कार्यरत हैं। यह ब्यूरो यूपीयू निकायों के सचिवालय संबंधी कार्यों का संपादन करता है। सदस्य देशों के बीच यह सूचना और सलाह देने समेत तकनीकी सहयोग को भी बढ़ावा देता है। हाल के वर्षों में इंटरनेशनल ब्यूरो ने कुछ गतिविधियों में मजबूत नेतृत्व की भूमिका निभायी है। इसमें पोस्टल तकनीक केन्द्र के माध्यम से संबंधित तकनीकी अनुप्रयोग भी शामिल हैं। 

बदलते हुए तकनीकी दौर में दुनियाभर की डाक व्यवस्थाओं ने मौजूदा सेवाओं में सुधार करते हुए खुद को नयी तकनीकी सेवाओं के साथ जोड़ा है और डाक, पार्सल, पत्रों को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए एक्सप्रेस सेवाएं शुरू की हैं। डाक घरों द्वारा मुहैया करायी जानेवाली वित्तीय सेवाओं को भी आधुनिक तकनीक से जोड़ा गया है। नयी तकनीक आधारित सेवाओं की शुरूआत तकरीबन 20 वर्ष पहले की गयी और उसके बाद से इन सेवाओं का और तकनीकी विकास किया गया। साथ ही इस दौरान ऑनलाइन पोस्टल लेन-देन पर भी लोगों का भरोसा बढ़ा है। यूपीयू के एक अध्ययन में यह पाया गया है कि दुनियाभर में इस समय 55 से भी ज्यादा विभिन्न प्रकार की पोस्टल इ-सेवाएं उपलब्ध हैं। भविष्य में पोस्टल इ-सेवाओं की संख्या और अधिक बढ़ायी जायेगी।

पोस्टल ऑपरेशंस काउंसिल (पीओसी) यूपीयू का तकनीकी और संचालन संबंधी निकाय है। इसमें 40 सदस्य देश शामिल हैं, जिनका चयन सम्मेलन के दौरान किया जाता है। यूपीयू के मुख्यालय बर्न में इसकी सालाना बैठक होती है। यह डाक व्यापार के संचालन, आॢथक और व्यावसायिक मामलों को देखता है। जहां कहीं भी एकसमान कार्यप्रणाली या व्यवहार जरूरी हों, वहां अपनी क्षमता के मुताबिक यह तकनीकी और संचालन समेत अन्य प्रक्रियाओं के मानकों के लिए सदस्य देशों को अपनी अनुशंसा मुहैया कराता है।  

संप्रेषण के अन्य माध्यमों के आने से भले ही इसकी प्रासंगिकता कम हो गयी हो, लेकिन कुछ मायने में अभी भी इसकी प्रासंगिकता बरकरार है। दुनियाभर में पोस्ट ऑफिस से संबंधित इन आंकड़ों से हम इसे और अधिक स्पष्ट रूप से समझ सकते हैं। डाक विभाग से 82 फीसदी वैश्विक आबादी को होम डिलीवरी का फायदा मिलता है। एक डाक कर्मचारी 1,258 औसत आबादी को सेवा मुहैया कराता है। इस समय दुनियाभर में 55 प्रकार की पोस्टल इ-सेवाएं उपलब्ध है। 

डाक ने 77 फीसदी ऑनलाइन सेवाएं दे रखी हैं। 133 पोस्ट वित्तीय सेवाएं मुहैया कराती है। पांच दिन के मानक समय के अंदर 83.62 फीसदी अंतरराष्ट्रीय डाक सामग्री बांटी जाती है। 142 देशों में पोस्टल कोड उपलब्ध है। डाक के इलेक्ट्रॉनिक प्रबंधन और निगरानी के लिए 160 देशों की डाक सेवाएं यूपीयू की अंतरराष्ट्रीय पोस्टल सिस्टम सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करती हैं। इस तरह 141 देशों ने अपनी यूनिवर्सल पोस्टल सेवा को परिभाषित किया है। भारतीय डाक विभाग पिनकोड नम्बर(पोस्टल इंडेक्स नम्बर)के आधार पर देश में डाक वितरण का कार्य करता है। पिनकोड नम्बर का प्रारम्भ 15 अगस्त 1972 को किया गया था। 

इसके अन्तर्गत डाक विभाग द्वारा देश को नो भोगोलिक क्षेत्रो में बांटा गया है। संख्या 1 से 8 तक भौगोलिक क्षेत्र हैं व संख्या 9 सेना डाकसेवा को आवंटित किया गया है। पिन कोड की पहली संख्या क्षेत्र दूसरा संख्या उपक्षेत्र,तीसरी संख्या जिले को दर्शाती है। अन्तिम तीन संख्या उस जिले के विशिष्ट डाकघर को दर्शाती है।

हाल ही में केंद्र सरकार ने डाक विभाग की प्रासभगकता बरकरार रखने के लिये इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक (आईपीपीबी) शुरू किया है। देश के हर व्यक्ति के पास बैंङ्क्षकग सुविधाएं पहुंचाने के क्रम में यह एक बड़ा विकल्प होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 सितम्बर को आईपीपीबी का विधिवत उद्घाटन कर इसका शुभारम्भ कर दिया है। इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक ने 1 सितम्बर को देश की 650 शाखाओं व देश भर में 3250 एक्सेस प्वाइंट में बैंङ्क्षकग सेवाएं शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में ये सेवा देश के 1.55 लाख एक्सेस प्वाइंट पर शुरू हो जाएगी। इससे देश का सबसे बड़ा बैंङ्क्षकग नेटवर्क अस्तित्व में आएगा जिसकी गांवों के स्तर तक मौजूदगी होगी। यही नहीं इन सेवाओं के लिए पोस्ट विभाग के 11000 कर्मचारी घर-घर जाकर लोगों को बैंङ्क्षकग सेवाएं देंगे। इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक भारतीय डाक विभाग के अंतर्गत आने वाला एक विशेष किस्म का बैंक है जो 100 फीसद सरकारी होगा।

केन्द्रीय संचार मंत्री मनोज सिन्हा ने बताया कि आईपीपीबी को पूरे देश में पहुंचाने के लिए पोस्ट विभाग के डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाएगा। देश भर में 40 हजार डाकिये हैं और 2.6 लाख डाक सेवक है। सरकार इन सभी का इस्तेमाल बैंङ्क्षकग सेवाओं को घर-घर पहुंचाने के लिए करने जा रही है।  

इन डाक सेवकों को आईपीपीबी के मुनाफे की रकम में से 30 पर्सेंट कमीशन के तौर पर भी दिए जाने की भी योजना बनायी जा रही है, जिससे कर्मचारियों के उत्साह में बना रहे।
(ये लेखक के निजी विचार है) 

Rajasthan Tourism App - Welcomes to the land of Sun, Sand and adventures



 

यहां क्लिक करें : हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें, समाचार जगत मोबाइल एप। हिन्दी चटपटी एवं रोचक खबरों से जुड़े और अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!



Copyright @ 2018 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.