सोशल मीडिया पर पार्टियों का प्रचार खर्च पांच गुना बढ़ा

Samachar Jagat | Monday, 15 Apr 2019 10:08:17 AM
Social media campaign expands five times

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लोकसभा चुनाव में राजनीतिक दलों का सोशल मीडिया पर प्रचार खर्च पिछले चुनाव के मुकाबले पांच गुना तक बढ़ गया है। चुनाव रणनीति पर काम कर रही एक कंपनी के अंदरूनी सर्वे के मुताबिक यह पांच फीसदी से बढक़र 25 फीसदी तक हो गया है। सर्वे के मुताबिक अलग-अलग दलों के लिए सोशल मीडिया पर चुनाव खर्च 600 करोड़ रुपए से लेकर करीब पांच हजार करोड़ रुपए तक हो सकता है। परंपरागत मीडिया एजेंसियों से लेकर नए एडटेक स्टार्ट अप की चुनाव के समय धूम है। हर राजनीतिक दल ने डिजिटल सलाहकारों पर दांव लगाया है। सोशल मीडिया टीम, ऑनलाइन विज्ञापन कंपनी, व्हाट्सअप मैनेजमेंट, ट्विटर मैनेजमेंट, कंटेट मैनेजमेंट के लिए लंबी चौड़ी टीम रखने और इस मद में बड़ी रकम खर्च करने का चलन चुनाव में हो गया है। जो उम्मीदवार तकनीकी रूप से बहुत दक्ष नहीं है।

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 उन्हें सोशल मीडिया के प्रभाव की वहज से मजबूरी में भारी भरकम टीम रखनी पड़ रही है। हर राज्य में विधायक से लेकर मंत्री तक चुनाव में भाग्य आजमा रहे उम्मीदवार सोशल मीडिया पर सक्रिय है। आईआईटी मुंबई से पढ़ाई करने के बाद पिछले 14 साल से राजनीतिक दलों की रणनीति पर काम कर रहे पोलिटिकल एज के संस्थापक गौरव राठोर का कहना है कि फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, यू-ट्यूब, गूगल एड्स अब चुनाव प्रचार की मुख्यधारा में है। इन्होंने पारंपरिक आउटडोर मीडिया माध्यमों के खर्च का बड़ा हिस्सा ले लिया है। राजनीतिक दल और उम्मीदवार अपने बजट का बड़ा हिस्सा इस रणनीति पर खर्च करने को मजबूर है। राजनीतिक दल सोशल मीडिा पर महिला सुरक्षा-सशक्तिकरण से भी ज्यादा बजट है। वर्ष 2019-20 के बजट में महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण मिशन के लिए 1330 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। इसी प्रकार केंद्र सरकार की कामधेनु योजना में 2019-20 के अंतरिम बजट में 750 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

 2019-20 के आम बजट में पर्यटन मंत्रालय को 2189 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। एक ओर जहां राजनीतिक दल सोशल मीडिया पर प्रचार में खर्चा बढ़ा रहे वहीं फेक न्यूज का प्रचलन बढ़ता ही जा रहा है। इस बारे में एक रिसर्च में दावा किया गया है कि चुनावी मौसम में सोशल मीडिया माध्यमों से फेक न्यूज फैलाई जा रही है। इस रिसर्च के अनुसार दावा किया गया है कि पिछले एक महीने में आधे वोटरों के पास किसी न किसी तरह की फेक न्यूज पहुंची है। सोशल मीडिया विशेषज्ञों और इंस्टीट्यूट फॉर गवर्गेंस, पॉलिसी एंड पॉलिटिक्स (आईजीपीपी) के सर्वे में 53 फीसदी लोगों ने बताया कि चुनाव के कारण किसी न किसी प्रकार की फेक न्यूज उनको मिली है। फेसबुक और वाट्सएप भारतीयों के लिए न्यूज के दो सबसे बड़े सोर्स है। 

एक अखबार की खबर के अनुसार एसपीजी सुरक्षा प्राप्त कांग्रेसाध्यक्ष राहुल गांधी की सुरक्षा को लेकर सोशल मीडिया पर चली चिट्ठी चुनाव की सबसे सनसनीखेज फेक न्यूज साबित हुई। अमेठी में राहुल की कनपटी पर बार-बार दिखती लेजर प्वाइंट को लेकर सोशल मीडिया पर गृह मंत्री राजनाथसिंह के नाम पत्र वायरल हुआ। जिसमें राहुल की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। पत्र में कांग्रेस वरिष्ठ नेता अहमद पटेल, जयराम रमेश और रणदीप सुरजेवाला के हस्ताक्षर थे। पर कांग्रेस ने ऐसा कोई भी पत्र लिखने से इनकार कर दिया। यह पत्र फर्जी निकला पर कई बार राजनेता अति उत्साह में सुरक्षा घेरा तोड़ते हैं। कई बार ऐसे चित्र सामने आते हैं। जब राजनेता सुरक्षा घेरों को तोडक़र आम जनता के बीच पहुंच जाते हैं। लोकसभा चुनाव में फर्जी खबरों से निपटने के लिए फेसबुक ने चुनाव वाररूम बनाए है। दुनिया के अलग-अलग देशों के 30 हजार विशेषज्ञों वाली 40 टीमें इस काम के लिए नियुक्त की गई है। ये टीमें हर आम और खास भारतीय फेसबुक उपयोगकर्ता द्वारा पोस्ट की जा रही सामग्री पर नजर रखेगी।

फेसबुक इंडिया के उपाध्यक्ष अजित मोहन ने ब्लॉग लिखकर फेसबुक की चुनाव संबंधी तैयारियों की जानकारी सार्वजनिक की है। भारत में फेसबुक के 30 करोड़ उपयोगकर्ता है। ये टीमें व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम प्लेटफार्म पर भी पोस्ट की जांच रही है। ये टीमें भारत समेत चार देशों में काम कर रही है। भारत के अलावा ये टीमें एशियाई देश सिंगापुर और अमेरिका की कैलिफोर्निया राज्य के शहर मेन्लो पार्क व आयरलैंड गणराज्य की राजधानी डबलिन में नियुक्त की गई है। 

टीमों का काम चुनाव के दौरान भारतीय फेसबुक अकाउंटों से साझा किए जाने वाले वीडियो, ओडियो और लिखित सामग्री जांचना है। टीमें यह सुनिश्चित करेगी कि कोई खाताधारक फर्जी खबर और नफरत फैलाने वाली बातें (हेट स्पीच) लिखकर इस संबंध में फेसबुक की नीति का उल्लंघन तो नहीं कर रहा है। ऐसा पाए जाने पर इन टीमों की ओर से संबंधित खाताधारक पर कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई में खाता को अस्थायी या स्थायी रूप से बंद भी किया जा सकता है। फेसबुक की ये टीमें ऑर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के जरिए पोस्टों की जांच कर रही है। फेसबुक के चुनाव वाररूम की 40 टीमों में आईटी, साइबर सुरक्षा, डाटा विज्ञान, भाषा विज्ञान, कानून प्रवर्तन एवं अनुसंधान जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल है। विश्व के कई देशों ने कंपनियों को आपत्तिजनक सामग्री ब्लाक करने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा है।

सोशल मीडिया दिग्गज फेसबुक और गूगल पर दबाव बढ़ा है। इन कंपनियों को अब ऐसी आपत्तिजनक सामग्रियों को ब्लॉक करने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे। ब्रिटेन ने सोशल मीडिया के लिए अपनी तरह की पहली निगरानी संस्था बनाने का आह्वान किया जो अधिकारियों पर जुर्माना लगा सके। यूरोपीय संघ संसदीय समिति ने एक विधेयक को मंजूरी दे दी। जिसमें इन पर अरबों डॉलर/पाउंड तक का जुर्माना लग सकता है। इसके अलावा फ्रांस, कनाडा, आस्ट्रेलिया ने भी सख्ती दिखाई है। माइक्रो ब्लॉगिग साइट ट्विटर ने स्पैम भेजने वालों पर लगाम लगाने के लिए फैसला लिया है कि कोई भी यूजर अब एक दिन में 400 से अधिक नए हैंडल्स को फॉलो नहीं कर सकेगा। इन सब स्थितियों के मद्देनजर उम्मीद की जा सकती है कि लोकसभा चुनाव में फर्जी खबरों पर अंकुश लगाया जा सकेगा। 

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