फुटपाथों पर दिव्यांगों को विशेष सुविधा

Samachar Jagat | Monday, 06 Aug 2018 10:29:44 AM
Special services to the streets on the footpaths

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केंद्र सरकार ने सभी संबंधित एजेंसियों को राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे दिव्यांगों-नेत्रहीनों के लिए एक माह के भीतर विशेष सुविधाएं मुहैया कराने के निर्देष दिए हैं। इसके साथ ही अधिकारियों को मौका मुआयना करने को कहा है। पहले से मौजूद फुटपाथ पर बाधा अथवा अतिक्रमण है तो उसे हटाने के आदेश दिए गए हैं। एजेंसियों को चार सप्ताह के भीतर सरकार को रिपोर्ट सौंपनी होगी। सडक़ परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने 30 जुलाई को पीडब्ल्यूडी, एनएचएआई व सीमा सडक़ संगठन को पत्र लिखा है। इसमें उल्लेख है कि शहरों व आबादी वाले क्षेत्रों से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों के फुटपाथों पर चार हफ्तों के भीतर दिव्यांगों-नेत्रहीनों के लिए विशेष सुविधाएं मुहैया कराई जाए।

 मंत्रालय ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि मानवाधिकार आयोग दिव्यांगों को फुटपाथ पर विशेष सुविधा उपलब्ध नहीं कराने को लेकर बहुत खपा है। आयोग ने चेतावनी दी है कि यदि चार हफ्ते में विशेष सुविधाओं का पुख्ता इंतजाम नहीं किया जाता है तो आयोग संबंधित एजेंसियों पर मानव अधिकार कानून 1993 का इस्तेमाल करने पर विवश होगा। अत: दिव्यांगों से जुड़े उक्त मुद्दे पर कार्रवाई समयबद्ध और कड़ाई से करें। यहां यह बता दें कि केंद्र सरकार के उपक्रम इंडियन रोड कांग्रेस (आईआरसी) ने पैदल चलने वालों व दिव्यांगों के लिए फुटपाथ व सुविधाओं को लेकर दिशा-निर्देश जून 2015 में जारी किए थे। इसमें राष्ट्रीय राजमार्गों के दोनों ओर 1.8 मीटर चौड़े फुटपाथ बनाने का प्रावधान है। जिससे दो व्हीलचेयर एक साथ क्रॉस कर सके। इसके अलावा फुटपाथ के बीच किसी प्रकार की अड़चने जैसे बिजली के पोल, पेड़, दिशा सूचक, संकेतक आदि नहीं होने चाहिए। फुटपाथ समतल व बाधा रहित होने चाहिए। जिससे व्हीलचेयर चढ़ाने में दिक्कत हो।

 फुटपाथ पर अतिक्रमण नहीं होना चाहिए। राजमार्ग पार करने के लिए जेब्रा क्रॉसिंग होनी चाहिए। इसके साथ ही वहां प्रकरण व्यवस्था का इंतजाम होना चाहिए। वहां वाहनों की रफ्तार 25 किलोमीटर प्रतिघंटा से अधिक नहीं होनी चाहिए। यहां पर जरूरत के मुताबिक अंडरपास होने चाहिए। केंद्र सरकार को मानवाधिकार की लताड़ के बाद यह निर्देश देने के लिए इसलिए मजबूर होना पड़ा है। यहां यह बता दें कि देश भर में सडक़ हादसों में होने वाली मौतों में 40 फीसदी मृतक पैदल राहगीर होते हैं। यही नहीं 90 फीसदी राहगीर सडक़ पार करना असुरक्षित मानते हैं। इसके अलावा मुंबई में 75 फीसदी और कोलकाता में 90 फीसदी पैदल यात्री दुर्घटना के शिकार (मृतक व घायल) होते हैं। सडक़ पर कंजेक्शन का एक बड़ा कारण पैदल राहगीर भी होते हैं। मुंबई, अहमदाबाद, चेन्नई और कोलकाता में आधी आबादी से अधिक पैदल चलती है।
 

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