जर्दा जिंदगी लील जाता है, इसे नकारें

Samachar Jagat | Wednesday, 05 Dec 2018 03:43:43 PM
tambako life goes away, deny it

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जिंदगी है तो सब कुछ है अर्थात् जिंदगी के इर्द गिर्द ही सब कुछ घूमता है। इसलिए जिंदगी का स्वरूप होना बहुत ही जरूरी है। अगर शरीर के किसी भी हिस्से में थोड़ी भी गड़बड़ हो जाती है दर्द हो जाता है तो सब कुछ बेकार सा लगता है बेजान और अनजान सा लगता है किसी कहने वाले ने सही ही कहा है कि पहला सुख निरोगी काया। लेकिन यह सबसे बड़े अफसोस की बात है कि आज सबसे अधिक खिलवाड़ शरीर के साथ ही किया जाता है रहन सहन खान पान और आचार विचार से शरीर को इनको और यहां तक कि आयना तक को आहत किया जा रहा है सोचनीय बात यह भी है कि यह अच्छे से पता है कि अधिक भोजन लेने से शरीर रुगण होगा बेवक्त भोजन करने से शरीर बीमान पड़ जायेगा अयोग्य चीजों के सेवन करने से शरीर की व्यवस्था गड़बड़ा जायेगी, हरन सहन के गलत तरीके से शरीर साथ छोड़ देता है नशीली चीजों का सेवन करने से शरीर पर बहुत घातक अभाव पड़ते है और लम्बे समय तक इनका सेवन जानलेवा बन जाता है। 


इनमें सबसे खतरनाक जो जहर है वह जर्दा गुटका मसाला ड्रग्स एल्कोहल और अन्य नशीली वस्तुऐं है। लेकिन आम और व्यापक जिसका प्रभाव है वह जर्दा चलाना है और इसका सीधा सा मतलब है मौत को या यौं कहें दर्दीली मौत को तत्काल सुलाना है। अब प्रश्र उठता है कि इसका सबसे बड़ा दोषी कौन है यदि इस पर गंभीरता से विचार किया जाये तो यही सार निकल कर आता है कि सबसे बड़ा दोषी या यौं कहें अपराधी जर्दा का निर्माण करने वाला ही है इसका सीधा सा मतलब यही हुआ कि वह जर्दे के पाउच नहीं बना रहा है टाइम पास का साधन नहीं बना रहा है वह कोई मनोरंजन की चीज नहीं बना रहा है वह तो सीधा मौत का बाख बेरोक टोक खुले में गर्व के साथ बिना गंभीरता जाने और बिना दुष्परिणाम माने लोगों तक वहीं मात्रा में सर्व सुलम करना रहा है।

 यह तो अपने ऐशों आराम और विलासिता से परिपूर्ण जीवन के लिए दिन दहाड़े लोगों की जान ले रहा है अभी हाल ही में एक गुटका व्यवसायी जिसकी उम्र 52 वर्ष थी गुटखे का सेवन नहीं केवल चखने से मुंह के कैंसर से बड़ा ऑपरेशन करवाया और तब जाकर उसके समझ में आया कि वह आज तक अनगिनत लोगों को मौत के कह उतार कर बहुत बड़ा पाप किया है और इसीलिए उसने अपने गुटखों के व्यवसाय को बंद करने का ऐलान किया है जो काफी देर हो चुकने के बाद किया है चलो देय आये दुरूस्त आये। वह गुटके को नहीं चबता है वह तो अपने शरीर को चलाता है मौत का इस बनाकर पीता है और रोज उसके सामने अनेकों मौत के उदाहरण पेश होते रहते है मुंह टेढे मेढे हो जाते है बंद हो जाते है लेकिन वे ये सब जानकर भी अनजान हो जाते है और अपनी दर्दनाक मौत को जल्द और बहुत जल्द आमंत्रित कर लेते है और इसको भी जल्द और दर्दभरी मौत के लिए प्रोत्साहित करते रहते है आईए इस खुशनुमा जिंदगी को खुशी के साथ जिये।

प्रेरणा बिन्दु:-
जिंदगी से बड़ा गुटका नहीं है इसे बड़ा और अनिवार्य मानना बहुत बड़ी भूल है जिंदगी तिल तिल मरने के लिए नहीं है पल पल विशेष करने के लिए है।

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