भारत में दुनिया के सबसे अधिक टीबी मरीज

Samachar Jagat | Tuesday, 25 Sep 2018 08:02:22 PM
TB patients in the world in India

भारत में दुनिया के सबसे अधिक टीबी मरीज है। यह एक गंभीर आंकड़ा है। हालांकि यह आंकड़ा तब और गंभीर हो जाता है, जब यह तथ्य सामने आता है कि देश के करीब एक तिहाई टीबी के मरीजों की जांच ही नहीं हुई है और वे इसके लिए कोई इलाज नहीं करा रहे। इन मरीजों में बड़ी संख्या में बच्चे भी शामिल है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से जारी ग्लोबल टीबी रिपोर्ट 2018 में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2017 में भारत मेें 19 लाख 8 हजार 371 टीबी के मरीज टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में रजिस्टर है। 

लेकिन भारत में मौजूद टीबी के मरीजों की संख्या को लेकर हुए सर्वेक्षण के अंतरिम आंकड़ों के मुताबिक भारत में टीबी के 27.4 लाख से ज्यादा मरीज मौजूद है। इस तरह करीब 8.32 लाख टीबी के मरीज टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए हैं। इनमें से कई मरीजों को मालूम नहीं है कि उन्हें टीबी है जबकि कुछ टीबी की जांच होने के बावजूद दवा नहीं ले रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे टीबी मरीजों की संख्या भारत में सबसे ज्यादा है। इसका कारण बताते हुए कहा गया है कि बच्चों के मामले में जांच नहीं हो पाती है। तो कई वयस्क टीबी के लक्षणों को नजरअंदाज करते हुए जांच ही नहीं कराते हैं। अन्य कारणों में भौगोलिक दिक्कतों और आर्थिक परेशानियों को भी इसके लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। 

वैश्विक आंकड़ों की बात करें तो पिछले साल कुल 36 लाख ऐसे मरीज रहे, जो इसका इलाज नहीं करवा रहे। इसमें से 80 फीसदी मरीज भारत समेत 10 देशों में है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार ट्यूबरक्लोसिस यानी टीबी आज भी विश्व का खतरनाक संक्रामक रोग बना हुआ है। लेकिन वर्ष 2000 के बाद वैश्विक प्रयासों से टीबी से होने वाली करीब 5.4 करोड़ मौतों को टाला जा सका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि विभिन्न देश 2030 तक इसे समाप्त करने के लिए अब भी कुछ ज्यादा नहीं कर रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसके साथ ही देश व सरकार के 50 प्रमुखों को इस संदर्भ में निर्णायक निर्णय लेने के लिए कहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि टीबी के कारण प्रतिदिन करीब 4 हजार लोगों की जान चली जाती है। 

दुनिया भर में रोगों से होने वाली मौतों की दसवीं सबसे बड़ी वजह टीबी है। दुनिया भर में टीबी के कुल मरीजों में दो तिहाई 8 देशों में है। इनमें से भारत में 27 फीसदी, चीन में 9 फीसदी, इंडोनेशिया में 8 फीसदी, फिलीपींस में 6 फीसदी, पाकिस्तान में 5 फीसदी, नाईजीरिया में 4 फीसदी तथा दक्षिण अफ्रीका में तीन फीसदी टीबी मरीज है। टीबी की जांच को आसान बनाने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने डाक विभाग के साथ मिलकर बलगम के नमूनों के परिवहन की सुविधा शुरू की है। पिछले सप्ताह बुधवार को यानी 19 सितंबर को दिल्ली में इसकी पायलट परियोजना शुरू कर दी गई। दिल्ली के अनुभवों को देखने के बाद डाक विभाग इस सुविधा को देश भर में लागू करेगा।

यहां यह बता दें कि देश में कई मामलों में टीबी की जाचं इसलिए नहीं हो पाती है क्योंकि अब तक देश में इस तरह की सुविधा मौजूद नहीं थी। यहां यह बता दें कि टीबी दुनिया में अभी भी खतरनाक और जानलेवा बीमारी बनी हुई है, जो एचआईवी एड्स और मलेरिया से होने वाली मौतों को भी पीछे छोड़ चुकी है। हालांकि टीबी का इलाज, बचाव और रोकथाम संभव है। इसको लेकर किसी भी तरह की कोताही इस बीमारी को फैलाने का काम करेगी। इसी सप्ताह 26 सितंबर बुधवार को संयुक्त राष्ट्र में विश्व के शीर्ष नेताओं की होने जा रही बैठक में टीबी को जड़ से खत्म करने के लिए जो रणनीति बनाएंगे। उम्मीद है कि उस पर काम करने की योजना भी बनाएंगे क्योंकि टीबी एक संक्रामक रोग है, जो सबसे पुरानी बीमारी है और दुनिया का हर देश इससे जद्दोजहद कर रहा है। 1940 के दशक से इस बीमारी का प्रभावी इलाज संंभव हुआ है और दुनिया के कुछ देशों में इस पर नियंत्रण भी पा लिया गया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार टीबी से पीडि़त रोगियों में इलाज की दर 82 फीसदी है, जबकि इससे होने वाली मौतों का स्तर वर्ष 2000 में 23 फीसदी से गिरकर 16 फीसदी तक पहुंच गया है। टीबी को लेकर बड़े स्तर पर सुधार देखा गया है, लेकिन कड़वी हकीकत ये है कि अभी भी लाखों की संख्या में लोग टीबी से पीडि़त है, जिनकी पहचान नहीं हो पाई है और इलाज नहीं ले रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 में टीबी के एक करोड़ नए मामले सामने आए थे। इसमें 64 लाख मामले विश्व स्वास्थ्य संगठन को मिले थे। इसका मतलब यह हुआ कि करीब 36 लाख लोग विश्व स्वास्थ्य संगठन की पकड़ से दूर रह गए। आंकड़ों को लेकर जो स्थिति है, उसके कई कारण हो सकते हैं। टीबी की चपेट में आने के बाद लोग मनमर्जी का इलाज कराते हैं, जिससे वे आंकड़ों के तहत पंजीकृत नहीं हो पाते हैं।

इसका नतीजा ये होता है कि वे गुणवतापूर्ण इलाज से दूर रह जाते हैं। इसके तीन प्रमुख कारण होते हैं। पहला देश की भौगोलिक स्थिति, भयंकर गरीबी और समाज में हेय की दृष्टि से देखे जाने के डर के कारण रोगी अपने रोग को छुपाता रहता है। दुनिया के दस देशों में टीबी के इलाज और जागरूकता को लेकर बेहद खराब है। इसमेें टॉप थ्री में भारत, इंडोनेशिया और नाइजीरिया शामिल है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 13 मार्च 2018 को टीबी मुक्त भारत बनाने के लिए 2017-2025 अभियान का श्रीगणेश करते हुए कहा था कि वर्ष 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाना है। उन्होंने कहा था कि दुनिया भर के देशों ने टीबी को 2030 तक जड़ से खत्म करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन इसे हमें 5 साल पहले हर हाल में पूरा करना है। टीबी को जड़ से खत्म करने के लिए देशवासियों को सहयोग करना होगा तभी विश्व बिरादरी में देश की एक बेहतर छवि बनेगी। टीबी रोगी का समय रहते इलाज शुरू होना ही पहला ध्येय है।

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से वैश्विक टीबी रिपोर्ट 2018 जारी
  • रिपोर्ट के अनुसार भारत में सर्वाधिक 27.4 लाख टीबी मरीज
  • रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2017 में भारत में 19 लाख 8 हजार 371 टीबी के मरीज टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में पंजीकृत है
  • भारत में मौजूद टीबी के मरीजों की संख्या को लेकर हुए सर्वेक्षण के अंतरिम आंकड़ों के मुताबिक भारत में टीबी के 27.4 लाख से ज्यादा मरीज मौजूद है
  • इस तरह करीब 8.32 लाख टीबी मरीज टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए है
  • वैश्विक आंकड़ों के अनुसार पिछले साल कुल 36 लाख ऐसे मरीज रहे जो इसका इलाज नहीं करवा रहे हैं। इसमें 80 फीसदी मरीज भारत समेत 10 देशों में है
  • दुनिया में हर रोज 4 हजार लोग टीबी की बीमारी से मर रहे हैं
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार टीबी आज भी विश्व का खतरनाक संक्रामक रोग बना हुआ है
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के वैश्विक प्रयासों से वर्ष 2000 के बाद टीबी से होने वाली करीब 5.4 करोड़ मौतों को टाला जा सका है
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में कहा गया है कि विभिन्न देश 2030 तक इसे समाप्त करने के लिए अब भी कुछ ज्यादा नहीं कर रहे हैं
  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 13 मार्च 2018 को टीबी मुक्त भारत बनाने के लिए अभियान शुरू किया और 5 साल पहले 2025 तक टीबी जड़ से खत्म करने लक्ष्य रखा था
  • इसी सप्ताह 26 सितंबर बुधवार को दुनिया भर के शीर्ष प्रतिनिधियों की संयुक्त राष्ट्र में पहली बार टीबी को लेकर उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन
  • संयुक्त राष्ट्र की इस बैठक में दुनिया भर में टीबी को जड़ से खत्म करने की नीति बनेगी
  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने टीबी की जांच को आसान बनाने के लिए डाक विभाग से मिलकर पिछले सप्ताह बलगम के नमूनों के परिवहन की सुविधा शुरू की है
     


 

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