मानसून जोरदार दस्तक के साथ आया देरी से

Samachar Jagat | Thursday, 13 Jun 2019 03:12:04 PM
The delayed monsoon came with a heavy knock

देश को करीब चार महीने तक बारिश में भिगोने वाले ‘चौमासा’ दक्षिण-पश्चिमी मानसून ने केरल तट पर दस्तक दे दी है। लगभग हफ्ते भर की देरी के बाद दक्षिण-पश्चिमी मानसून शनिवार को केरल तट पर पहुंचा और केरल व कर्नाटक के कई इलाकों में झमाझम बारिश शुरू हो गई। वहीं अरब सागर में चक्रवाती हवा के चलते 6 तटीय राज्यों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार अरब सागर में लक्षद्वीप के पास उठे चक्रवाती तूफानी हवा के कारण मंगलवार को गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक के तटीय और पूरे गोवा में आंधी-तूफान के साथ तेज बारिश होने की बात कही है। 

मौसम विभाग के अनुसार यह तूफानी हवा सोमवार शाम तक गुजरात के वेरावल समुद्र तट से करीब 930 किलोमीटर दूर लक्षद्वीप के पास केंद्रित था। चक्रवात के असर से गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा में 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवा चलेगी। गुजरात के कच्छ और अन्य इलाकों में 12, 13 और 14 जून को भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इसके चलते यहां एनडीआरएफ को सेना को तटीय जिलों में तैनात कर दिया गया है। इस चक्रवाती तूफान के पहुंचने से पहले ही महाराष्ट्र में भारी बारिश शुरू हो गई है। तेज बारिश से मुंबई एयरपोर्ट पर रात साढ़े नौ बजे बाद फ्लाइट संचालन कुछ देर के लिए रोक दिया गया। आने वाली फ्लाइट्स को अन्य एयरपोर्ट्स के लिए डाइवर्ट किया गया। मौसम विभाग ने तीन दिन तक गुजरात, महाराष्ट्र में तूफान के कारण भारी बारिश की संभावना व्यक्त की है। 

चक्रवाती तूफान का ही असर था कि मंगलवार को दोपहर बाद अचानक आंधी के साथ कुछ मिनट के लिए जयपुर में बूंदाबांदी हुई। जिससे गर्मी से राहत के बजाए उमस बढ़ गई। केरल में मानसून ने सात दिनों की देरी के साथ दस्तक दी। इस देरी को लेकर चिंताएं भी है क्योंकि हाल के वर्षों में यह लगातार देखा जा रहा है कि मानसून या तो देरी आता है, या जल्दी आ जाता है। जलवायु परिवर्तन से मानसून की भी चाल बिगड़ रही है। एक जून को मानसून के पहुंचने की जो सामान्य तिथि है उसके हिसाब से कभी-कभार ही आता है। पिछले 15 सालों के दौरान सिर्फ एक बार सन् 2013 में ही मानसून एक जून को केरल पहुंचा है। आठ बार जल्दी आया है और छह बार देरी से। सबसे जल्दी 23 मई को मानसून पहुंचने का रिकार्ड है, जबकि देरी से पहुंचने का रिकार्ड 8 जून का इस बार का भी है। 

मौसम विभाग ने पिछले महीने 6 जून को मानसून के केरल तट पहुंचने का पूर्वानुमान जारी किया था, लेकिन हवा के कम दबाब का क्षेत्र बनने में देरी के कारण मानसून की आमद में दो दिन की देरी और हुई। केरल के अलावा दक्षिण भारत के कई इलाकों में मानसून पूर्व बारिश हो रही है। इसके उलट उत्तर भारत के कई शहरों में अब भी पारा 45 से 48 के बीच बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों तक राजस्थान, मध्यप्रदेश, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में चिलचिलाती धूप का सामना करना पड़ेगा। कई इलाकों में लू चलने की भी चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने हाल में जारी पूर्वानुमान में मानसून के जून-सितंबर के दौरान सामान्य के 96 फीसदी बारिश होने की संभावना व्यक्त की है। मानसून के दौरान कुल 890 मिलीमीटर बारिश होती है। 96 फीसदी का मतलब है कि इस बार यह 854 मिमी होगी। यदि इतनी बारिश होती है तो यह सामान्य बारिश ही कही जाएगी। देश में आज भी 60 से 65 फीसदी खेती बारिश पर निर्भर है। मानसून की बारिश से नदियों, जलाशयों के पानी में भी बढ़ोतरी होती है। इसके अलावा उत्पादन में भी बढ़ोतरी होती है।

 भारतीय मौसम विभाग ने कहा है कि दिल्ली सहित पश्चिमोत्तर भारत में मानसून अपने तय समय से करीब तीन दिन की देरी से पहुंचेगा। जबकि स्काइमेट का आकलन कहता है कि देश में मानसून के उत्तरी हिस्से में दस्तक देने में कम से कम हफ्ते भर की देरी होगी। मौसम विभाग ने उत्तरी क्षेत्रों में जून के अंतिम सप्ताह और जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून पहुंचने की संभावना जताई है। यहां यह बता दें कि मानसून के दिल्ली पहुंचने का सामान्य समय 29 या 30 जून होता है। इसमें अगर हफ्ते भर की देरी माने तो मानसून जुलाई में आठ या नौ तारीख को दिल्ली में दस्तक देगा। इस लिहाज से दिल्ली वालों को मानसूनी बारिश के लिए करीब महीने भर का इंतजार करना पड़ेगा। भीषण गर्मी, सूखते जलाशयों और पानी के लिए मचे हाहाकार के बीच राहत की बात यह है कि मानसून केरल पहुंच गया है। पश्चिमोत्तर उत्तर व मध्य भारत में भीषण गर्मी का असर पश्चिम और दक्षिणी राज्यों के जलाशयों पर भी पड़ा है।

 इन इलाकों में देश के प्रमुख जलाशयों का जल स्तर काफी नीचे चला गया है। जिसकी वजह से महाराष्ट्र और राजस्थान सहित आसपास के तमाम सूखाग्रस्त इलाकों में जल संकट गहरा गया है। अधिकांश ग्रामीण क्षेत्र खेती में सिंचाई जरूरतों के लिए दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान चार महीने तक होने वाली बारिश पर ही निर्भर रहता है। देश में कुल वर्षा का जल 75 फीसदी हिस्सा दक्षिण-पश्चिमी मानसून से मिलने के कारण इसमें होने वाली बारिश की कमी-बेशी का सीधा प्रभाव हमारी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित समूचा मध्य व पश्चिमोत्तर भारत भीषण गर्मी की चपेट में है। भोपाल में गर्मी ने 40 साल का रिकार्ड तोड़ दिया है। 

यहां लगातार तीन दिन तक पारा 45 डिग्री के पार रहा है। इसी तरह दिल्ली में भी भीषण गर्मी जारी है और तापमान 46 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रहा। अगले दो दिन तक भी पारे के इसी के आसपास रहने की संभावना है। केरल तट पर मानसून की दस्तक के साथ ही भीषण गर्मी से झुलस रहे उत्तरी और मध्य भारत के मैदानी क्षेत्रों व दक्षिणी राज्यों में तापमान में गिरावट आने की उम्मीद जगी है। राजस्थान ने धोलपुर में सर्वाधिक तापमान 51 डिग्री सेल्सियस सोमवार को दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने दिल्ली और अन्य इलाकों सहित लगभग पूरे देश में मानसून की सामान्य बारिश होने की संभावना जताई है।



 

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