राष्ट्रीय सिंचाई परियोजनाओं का हाल बेहाल

Samachar Jagat | Thursday, 02 Aug 2018 11:09:18 AM
The National Irrigation Projects are useless

देश  की प्राथमिकता वाली 16 राष्ट्रीय सिंचाई परियोजनाओं के हाल बेहाल है। इनमें केवल पांच पर ही काम शुरू हो सका है। पांचों परियोजनाओं की शुरुआत 35 साल पहले हुई थी और अभी तक उनको पूरा हो जाना चाहिए था, पर स्थिति यह है कि इनकी भौतिक प्रगति में आठ से 99 फीसदी तक की कमी है। दूसरी तरफ इनकी लागत में 2341 फीसदी की वृद्धि हो चुकी है। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई परियोजनाओं में भी शामिल है। भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कैग) ने इस हालात पर चिंता जताने हुए पूरे तंत्र पर सवाल खड़े किए हैं। फरवरी 2008 में केंद्र ने राष्ट्रीय परियोजनाओं की एक योजना को मंजूरी दी थी, जिनमें 16 प्रमुख जल संसाधन विकास व सिंचाई परियोजनाओं की पहचान की गई थी, जो त्वरित सिंचाई लाभी कार्यक्रम के तहत थी। इनमें गोसीखुर्द, तिस्ता, सरयू, इंदिरा सागर पोलावरम, शाहपुर, कांडी, लखवार, रेणुका बांध, किशुउझ, केन-बेतवा, कुल्सी बांध, नोआह हिडिंग, बर्सर एचई आदि परियोजनाएं है।
 
कैग ने बताया है कि केवल पांच गोसी खुर्द, तिस्ता, सरयू, पोलावरम, शाहपुरा कांडी व तिस्ता पर ही काम शुरू हो सका है। सभी परियोजनाएं 1975 से 1983 के बीच शुरू हुई थी। इनकी कुल लागत 3530 करोड़ रुपए थी, जो बढक़र 86 हजार 172 करोड़ 23 लाख रुपए हो गई है। इन परियोजनाओं पर 13 हजार 299 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। परियोजनाओं के पूरा होने पर 25.10 लाख हेक्टेयर में सिंचाई क्षमता हासिल होती, लेकिन अब तक 21 फीसदी यानी 5 लाख 36 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता ही हासिल हो सकी है। इन परियोजनाओं से होने वाला 1236.50 मेगावट बिजली उत्पादन व 672.585 मिलियन घन मीटर पेयजल मिलना था, पर इन मामलों में शून्य प्रगति है।

 5.412 मिलियन एकड़ फीट जलाशय निर्माण होना था, जो 0.53 मिलियन एकड़ फीट ही हो सका है। उत्तर प्रदेश की सरयू परियोजना का सर्वेक्षण व जांच का काम 1982 में शुरू हुआ था, पर उसकी डीपीआर व संशोधन 2010 में पेश किए जा सके। तिस्ता परियोजना की डीपीआर व नए संशोधन में तो 47 साल लग गए। सरयू नहर परियोजना 2012 में राष्ट्रीय परियोजना में शामिल हुई। 14.04 लाख हेक्टेयर में सिंचाई क्षमता वाली इस परियोजना की लागत 7270.32 करोड़ हो गई, जबकि मूल लागत 299 करोड़ थी। लखवार व केन-बेतवा राज्यों के बीच अटकी सरयू अकेले सिंचाई क्षमता का 74 फीसदी सृजित कर रहा है और बाकी चार का हिस्सा नगण्य है। परियोजना को मार्च 2016 में पूरा होना था, पर अभी उसमें समय लगेगा, क्योंकि भूमि, पक्का काम, जलमार्ग, खुदाई कार्य में 85 से 96 फीसदी काम होना बाकी है।



 

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