व्यक्ति का चरित्र राष्ट्र चरित्र का अहम् हिस्सा है

Samachar Jagat | Saturday, 13 Jan 2018 11:50:38 AM
 The person's character is an integral part of the national character

चरित्र कोई छोटा-मोटा शब्द नहीं है, इसमें व्यक्ति के सम्पूर्ण जीवन का सार आता है, इसे केवल एक विषय की संकीर्णताओं में नहीं जकड़ा जा सकता है। इसमें व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, भौतिक, आध्यात्मिक, सामाजिक, सार्वजनिक, व्यक्तिगत, कर्म क्षेत्र, पारिवारिक और वे सारे क्रियाकलाप आते हैं जो वह हर पल सोचता, बोलता, सुनता, देखता, करता अर्थात् क्रिया-प्रतिक्रिया भी शामिल होते हैं। इसका सीधा सा तात्पर्य यही निकल कर आता है कि व्यक्ति की प्रत्येक गतिविधि का योग ही उसका व्यक्तित्व-कृतित्व कहलाता है अर्थात् उसका चरित्र कहलाता है।

 जब एक साथ एक जगह कोई एक जैसा कार्य करते हैं, एक तरह की सोच रखते हैं और एक तरह का व्यवहार करते हैं। वहाँ पर किसी देश के चरित्र का सही आकलन सामने आता है। इसलिए सबसे महत्वपूर्ण बात जो उभर कर आती है वह चरित्र निर्माण ही है क्योंकि चरित्र निर्माण ही जीवन निर्माण की नींव तैयार करता है और व्यक्तियों के जीवन से राष्ट्र का जीवन राष्ट्र का व्यवहार, राष्ट्र की सोच, राष्ट्र का विकास और राष्ट्र की साख का मूल्यांकन किया जाता है।

जब हमारे चरित्र का मूल्यांकन किया जाये तो उसमें सकारात्मक और नकारात्मक बहुत सारे तथ्य निकल कर सामने आते हैं-आमतौर पर देखा जाता है-घर साफ होता है लेकिन घर के सामने वाली सडक़-नाली गंदी रहती है, यहाँ तक कि नाली को लेकर पड़ौसियों में लड़ाई-झगड़ा भी देखा जाता है, चलते-चलते कुछ खाते रहना और कचरे या छिलकों को सडक़ पर फेंक देना, सडक़ पर जर्दा-पान-मसाले की पीक या थूकना, रोड़ लाइटें दिन में जली रहने पर, टंकी के नल में से पानी टपकने पर, सडक़ पर पत्थर-कांटे पड़े रहने पर अनदेखी कर वहाँ से चुपचाप गुजर जाना, गलत दिशा में वाहन खड़ा कर जाम लगा देना, एक भी सैकिण्ड का इंतजार नहीं करना व गलत दिशा में तेजी से वाहन निकाल ले जाना, हरी बत्ती होने से पहले ही वाहन को तेजी से निकालना, हेलमेट और बेल्ट यातायात पुलिस होने पर ही प्रयोग करना, निशुल्क चीजों के लिए हुजूम उमड़ पड़ना, सार्वजनिक परेशानी से मुंह मोड़ना, सार्वजनिक सुविधाओं का गंदगी से अटा रहना,

 सार्वजनिक पर्यटक या अन्य दर्शनीय स्थानों का दुरुपयोग, व्यक्तिगत लाभ के लिए मरना-मारना और सबके लाभ के लिए उदासीनता, व्यक्तिगत समस्याओं के समाधान के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा देना, लेकिन देश की समस्याओं के लिए ज्यादा से ज्यादा आपस में नकारात्मक बातें करना, बिना परिचय पत्र के गाँव-गाँव-शहर-शहर-गली-गली कोई भी सामान बेचने के बहाने रैकी करना, लूट-पाट और चोरी को अंजाम देना, आमतौर पर एक साथ होने पर जोर-जोर से बोलना, गंदा बोलना, गुटका चबाना और राजनैतिक चर्चा में मशगूल होना आम बात है, आपस की चर्चाओं में नब्बे प्रतिशत राजनैतिक चर्चा, अंधविश्वास, अंधी होड़, जबरदस्त मरोड, नफरत-अहंकार, प्रतिशोध, टेन्शन बीमारी-लाचारी से भरा दिखता है।

 आदमी, मोबाइल, लैपटॉप, कम्प्यूटर, सोशल मीडिया में पूरी तरह जकड़ना समाज, हकीकत कुछ और दिखना कुछ और आम फैशन, पाश्चात्य संस्कृति शौक से भारतीय संस्कृति शोक में, विदेशी पर्यटकों के सामने भिखारियों का भद्दा प्रदर्शन सहित अनेक ऐसे गलत-बेढंगे क्रियाकलाप किये जाते हैं जो हमारे मूल भारत के चरित्र को शर्मसार करते हैं वे चाहे घोटाले, दुष्कर्म, आतंक और लूटपाट हो। लेकिन इन सबसे ऊपर एक बड़ी विशेषता हमारी चारित्रिक विशेषता है राष्ट्रीय संकट के समय हम सब एक हो जाते है- काश हम हर पल ऐसा करें।

प्रेरणा बिन्दु:- 
राष्ट्र के मान-सम्मान-स्वाभिमान को बुलंदियों की ओर ले जाना ही किसी नागरिक की परम चारित्रिक विशेषता है।
 



 

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