व्यक्ति की छवि उसके काम और व्यवहार से बनती है

Samachar Jagat | Monday, 11 Mar 2019 01:28:36 PM
The person's image is composed of his work and behavior.

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दुनिया व्यक्तियों से भरी पड़ी है, आदमी कहीं-कहीं मिलते है और इंसान तो कहीं-कहीं दिखाई देते हैं। ऐसा बहुतों से सुना जाता है बहुतों बार। आखिर ऐसा क्यों होता है व्यक्ति आदमी नहीं बना पाता, इंसान नहीं बन पाता वह केवल व्यक्ति ही रह जाता है और खोखली शक्ति रह जाता है। व्यक्ति को इंसान बनाने में सबसे बड़ा जो योगदान होता है उसका नाम है व्यवहार या उसके द्वारा किए जाने वाला कार्य। व्यवहार और उसका काम उसकी छवि तय करते है, उसकी साख तय करते हैं और उसका समाज में स्थान तय करते हैं। 


इसको आप यौं समझ सकते हैं- एक ही पद पर काम करते हैं बहुत से लोग, एक ही समान वाली दशाओं में काम करते हैं एक साथ बहुत से लोग और समान वेतन पर काम करते हैं बहुत से लोग, लेकिन उनकी छवि अलग-अलग बन जाती है, उनके बारे में सोच अलग-अलग बन जाती है। इन सबका एक ही मूल कारण निकल कर आता है- परवरिश, संस्कार और परिवार का अंतर। बच्चे भगवान की सर्वश्रेष्ठ कृति होते हैं, ऐसे में माता-पिता पर यह पावन और नैतिक कर्तव्य बनता है कि उनको वे भी सर्वश्रेष्ठ कृति बनाने में अपना सब कुछ झौंके नहीं, अपना सर्व श्रेष्ठ करें, बहुत कहे नहीं, बहुत करें, उदाहरण दें नहीं, उदाहरण बनें।

यहां यह स्पष्ट बात है कि हर व्यक्ति सब कुछ जानने का दम्भ भरता है और सब कुछ जानने की बात वह हर कहीं करता रहता है, लेकिन सब कुछ जानने के बावजूद वह मानता नहीं है। जैसे वह अच्छे से जानता है कि गुटखा, जर्दा, पान-मसाला चबाना स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करना है, लेकिन वह गुटखा चबाता है, अब उसकी छवि बनने में गुटखा भी महत्वपूर्ण हो गया। कोई व्यक्ति अपने ऑफिस हमेशा देरी से जाता है, जल्दी आता है तो ये दोनों नकारात्मक चीजें उसकी छवि को धूमिल करेंगी। कोई व्यक्ति बिना किसी के चाहे सलाह देता रहता है, उसकी सलाह को सुना नहीं जाता है तो भी वह नहीं मानता तो उसकी छवि में उसकी ऐसी सलाह भी नकारात्मक बन जाती है। एक व्यक्ति समय पर काम पर जाता है और समयोपरान्त काम से आता है लेकिन वह काम को पूरी निष्ठा और ईमानदारी से नहीं करता है तो उसकी छवि एक कामचोर व्यक्ति वाली हो जाएगी। 

कोई व्यक्ति जब चाहे झगड़ता रहता है, किसी से मधुर सम्बन्ध नहीं रख पाता है तो फिर उसकी छवि एक झगड़ालू व्यक्ति की बनकर रह जाएगी। इस प्रकार यहां सबसे अधिक ध्यान देने की जो बात है वह स्वयं के व्यवहार और काम को अच्छा करने की है तभी आने वाली संतानों का व्यवहार और काम अच्छा हो पाएगा। आप स्वयं अपना मूल्यांकन कीजिए की आपकी नजर में आपकी छवि कैसी है और दूसरों की नजरों में आपकी छवि कैसी है?

प्रेरणा स्त्रोत:- 
ठहरो मत तालाब के पानी की तरह, चक्कर काटो मत कोल्हू के बैल की तरह, कूप मण्डूक बनकर मत रहो, इस प्यारी दुनिया में सागर बन जाओगे यदि बहोगे नदी के पानी की तरह।

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