राजमार्गों से गायब हो रहे हैं फुटपाथ

Samachar Jagat | Friday, 12 Jul 2019 09:49:26 AM
The streets are disappearing from the highways

तेज विकास की दौड़ में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) राष्ट्रीय राजमार्गों से फुटपाथ गायब कर रहा है। चार साल पहले जारी निर्देश के बावजूद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण आम नागरिकों विशेषकर बुजुर्गों, दृष्टिहीनों और अन्य दिव्यांगों के अनुकूल फुटपाथ व सुविधाएं नहीं दे रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के इस रवैए से खफा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 25 जून 2019 को सडक़ परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के सचिव को कड़ा पत्र लिखा है।

 इस पत्र में उल्लेख है कि मंत्रालय राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने वाली एजेंसी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से पता करें कि राजमार्गों पर आम नागरिक विशेषकर दिव्यांग व बुजुर्गों के अनुरूप फुटपाथ बनाए गए है अथवा नहीं। क्या बनाए गए फुटपाथ में इंडियन रोड कांग्रेस (आईआरसी) के मानको के मुताबिक सुविधाएं है। एनएचएआई के अधिकारी मौके पर जाकर फुटपाथ व अन्य सुविधाओं का मुआयना करे। इसके पश्चात विस्तृत रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपे। इसके बाद मानवाधिकार आयोग मंत्रालय के सचिव के साथ बैठक कर सके। 

आयोग ने कहा है कि 17 जून 2015 को सडक़ परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने पैदल राहगीर, दिव्यांगों व बुजुर्गों के लिए राजमार्गों के किनारे फुटपाथ बनाने के दिशा-निर्देश जारी कर दिए थे। लेकिन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। आयोग ने कहा है कि एनएचएआई के अधिकारी फुटपाथ का मुआयना करते हुए कुछ बिंदुओं का रिपोर्ट में जिक्र अवश्य करें। इनमें पहला अधिकारी के क्षेत्र में कितने किलोमीटर लंबे राजमार्गों पर फुटपाथ बनाए गए हैं। वे यह भी उल्लेखनीय है कि क्या फुटपाथ पर ट्राई साइकिल के गुजरने की जगह व रैंप है? क्या फुटपाथ पर मोड वाले स्थलों पर स्पर्श करने वाले पेवंर्स बने है। केंद्र सरकार के उपक्रम इंडियन रोड कांग्रेस ने राहगीरों विशेषकर दिव्यांगों, बुजुर्गों आदि के लिए फुटपाथ व सुविधाओं को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए थे। सडक़ परिवहन मंत्रालय ने 17 जून 2015 को एनएचएआई, पीडब्ल्यूडी, बार्डर रोड संगठन को पत्र लिखकर उक्त मानको के अनुसार फुटपाथ व सुविधाएं मुहैया कराने के आदेश दिए हैं। 

यहां यह बता दें कि इंडियन रोड कांग्रेस के दिशा-निर्देश और सडक़ परिवहन मंत्रालय के आदेश के बावजूद राजमार्गों पर बुजुर्गों-दिव्यांगों के अनुकूल फुटपाथ नहीं बनाए जा रहे हैं। मानवाधिकार आयोग ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए दो हफ्ते में केंद्र से रिपोर्ट मांगी है। सडक़ पर कंजेक्शन का एक बड़ा कारण पैदल राहगीर होते हैं। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि मुंबई, अहमदाबाद, चेन्नई, कोलकाता में आधी आबादी से अधिक पैदल यात्री होते हैं। देश भर में सडक़ हादसों के दौरान 40 फीसदी मृतक पैदल राहगीर होते हैं। मुंबई में 75 फीसदी और कोलकाता में 90 फीसदी पैदल यात्री दुर्घटना में हताहत होते हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि मानवाधिकार आयोग के सख्त रुख अपनाने और जवाब तलब किए जाने के बाद सडक़ परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय पैदल राहगीरों विशेषकर बुजुर्गों और दिव्यांगों की सुरक्षा के लिए मानको के आधार पर फुटपाथों के निर्माण की व्यवस्था सुनिश्चित करेगा।



 

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