सूर्य देवता का कहर, आसमान से बरसे अंगारें

Samachar Jagat | Thursday, 20 Apr 2017 03:15:06 PM
सूर्य देवता का कहर, आसमान से बरसे अंगारें

भीषण  और जानलेवा गर्मी और लू ने आमजन के छक्के छुड़ा दिए है। इस बार गर्मी ने प्रारम्भ से ही अपने तीखे तेवर दिखाने शुरू  कर दिए। मार्च का महीना अपेक्षाकृत अनुकूल वातावरण वाला महीना है। मार्च के शुरू  में ठण्ड थी मगर अंत आते आते पहले पंखे चले और फिर कूलर और एसी चलने लगे। 

गर्मी ने अपना रंग दिखाना शुरू  कर दिया और देखते देखते लोग बेहाल हो गए। बताते है की ऋतुओं में सर्दी का असर केवल तीन माह ही रहता है। मार्च से शुरू  हुई गर्मी अगस्त और सितंबर तक अपना असर दिखती है। वर्षा के बाद बसंत केवल दो माह अपना असर छोड़ता है। कहने का तात्पर्य है सर्वाधिक गर्मी रहती है और वह भी व्याकुल करने वाली। इसी के साथ गर्मी जन्य बीमारियां और पेयजल की किल्लत शुरू  हो जाती है। गर्मी का मौसम मार्च से अप्रैल, मई, जून, अगस्त और सितंबर तक के महीनों में रहता है।

 यह साल का सबसे गर्म मौसम होता है, क्योंकि तापमान अपने उच्च शिखर पर पहुँचता है। इस ऋतु के दौरान, दिन लम्बे और गर्म होते हैं, वहीं रातें छोटी है। दिन के बीच में, सूर्य की किरणें बहुत गर्म होती है। पूरे दिनभर गर्म हवाएं चलती रहती है, जो चारों तरफ के वातावरण को रूखा और शुष्क बनाती है। ग्रीष्म ऋतु की ऊँचाई पर, छोटी धाराएं, कुएं, और तालाबें सूख जाती हैं।

 ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोग पानी की कमी, उच्च तापमान, सूखे आदि बहुत सी परेशानियों से बिजली और अन्य आरामदायक संसाधनों की कमी के कारण जूझते हैं। ग्रीष्म ऋतु साल का सबसे गर्म मौसम होता है, जो पूरे दिन भर में बाहर जाने को लगभग असंभव बनाता है। इस बार मार्च अप्रैल  में ही जून जैसी गर्मी पड़ रही है। देश के कई राज्य इस वक्त गर्म हवाओं की चपेट में है और कई-कई जगह तो पारा सामान्य से 10 डिग्री तक ऊपर जा रहा है।

 मार्च में गर्मी का 6 साल का रिकर्ड तो टूट ही चुका है और आगे भी गर्मी आपको झुलसाने वाली है। गर्मी ने मार्च अप्रैल महीने में ही अपना असर दिखाना शुरू  कर दिया है। देश के कई शहरों में गर्म हवाएं चल रही हैं। तेज धूप होने की वजह से लोग बाहर निकलने से कतराने लगे हैं। देश के कई राज्यों में तापमान 46 डिग्री सेल्सियस पार कर गया है। राजस्थान में जबर्दस्त तेज गर्म हवाओं ने जनजीवन अस्तव्यस्त कर दिया है।

 प्रदेश  में भीषण गर्मी का दौर जारी है और करीब एक  दर्जन जिलों में पारा 46 डिग्री  को पार  गया है। राजधानी जयपुर सहित राज्य के अनेक क्षेत्रों  में  सडक़ें सुनी नजर आई। बाजारों में सन्नाटा पसरा दिखा। अप्रैल का महीना अभी आधा ही बीता है और राजस्थान में प्रचंड गर्मी अपना तेवर दिखा रहा है। थार का रेगिस्तान तो मानो उबलने लगा है। प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी गर्मी के तेवर जून के महीने जैसे हो गए हैं। 

पश्चिमी राजस्थान में गर्मी के हालात ऐसे हैं जैसे सडक़ से कोलतार पिघल जाएंगे। सडक़ें तो तवा की भट्टी बनी  हुई है शाम तक गर्म हवा के थपेड़े लू का ऐहसास कराते हैं। देश के सबसे बड़े सूबे राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ का असर खत्म होने के बाद अब गर्मी जोर दिखाने लगी है। प्रदेश के धोरे तपने लगे हैं और आसमान से मानो अंगारे बरस रहे हैं, तभी तो अजमेर, उदयपुर और जैसलमेर सहित अनेक स्थानों  की गर्मी ने पिछले छह साल का रिकार्ड तोड़ दिया।

 सूर्य के बढ़ते प्रकोप से दोपहर के समय सडक़ें सूनी और बाजार वीरान नजर आने लगे हैं। राजधानी जयपुर सहित प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में आग उगलती सूर्य की किरणों ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। सुबह से ही सूर्य देवता आग उगलना शुरू  करते हैं और दोपहर में चलने वाली लू लोगों को बेहाल कर देती है। देर शाम तक लू का असर बना रहता है। 

अप्रैल का महीना शुरू  हुआ नहीं और गर्मी सिर चढक़र बोलने लगी है मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक मार्च का महीना सबसे गर्म महीना रहा इस महीने में गर्मी ने सात साल के रिकर्ड तोड़े हैं उत्तर और मध्य भारत के राज्यों में गर्मी ने पिछले कई सालों के रिकर्ड तोड़े हैं अभी तो अप्रैल का महीना शुरु ही हुआ है और सूर्य अपने पूरे शबाब पर है। देश भर में गर्मी से लोगों का हाल बेहाल है। 

गर्म हवाएं चल रही हैं और तपिश से लोग परेशान हैं। राजस्थान में गर्मी ने 71 साल का रिकर्ड तोड़ दिया। पूर्वी और पश्चिमी इलाकों के बाड़मेर, जैसलमेर और सीकर में लू का असर सबसे ज्यादा है। यहां अधिकतम तापमान 46 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है। राजस्थान के पश्चिमी और पूर्वी इलाकों में हालात अभी से ही बेहद गंभीर नजर आए हैं। बाड़मेर, जैसलमेर और में लू का प्रकोप सबसे अधिक है और यहां अधिकतम तापमान 43 से 46 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच चुका है। 

मौसम विज्ञान विभाग के एक अधिकारी ने बताया, इन राज्यों के दूरदराज के निर्जन इलाकों में लू सर्वाधिक तीखी है जिसकी अगले कुछ दिनों तक बने रहने की उम्मीद है  तीखी धूप और लू के थपेड़ों के चलते मरुभूमि में  दिन चढ़ते ही सडक़ों पर सन्नाटा पसर जा रहा है। बेहद जरूरी होने पर जो लोग घर से बाहर कदम रख भी रहे हैं, वह भी पूरा एहतियात बरतकर ही बाहर निकलते हैं। 

ज्यादातर लोग चेहरे को पूरी तरह गमछे से ढककर ही बाहर निकल रहे है। डॉक्टरों का कहना है कि गर्मी से बचाव ही इस मौसम में बीमारियों से बचने का रास्ता है। इसके लिए पेय-पदार्थों का खूब सेवन करें। डॉक्टरों की सलाह है कि दिन में जब भी घर से निकले कुछ खा कर और पानी पी कर ही निकले खाली पेट बाहर ना जाएं। 

तेज धूप में, खासतौर से दोपहर में बेकाम घर से बाहर जाने से बचें। गर्मियों में हरे पत्ते वाली सब्जियां, विटामिन सी से युक्त रसीले फल और नींबू पानी लेना चाहिए। बेल का शरबत गर्मी के लिए बहुत बढिय़ा माना जाता है। गर्मी के मौसम में जीरा-नमक डालकर छाछ पीना भी फायदेमंद होता है।

 

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