गाड़ी और व्यक्ति के जीवन में बहुत समानताएं होती हैं

Samachar Jagat | Tuesday, 08 Aug 2017 05:14:10 PM
गाड़ी और व्यक्ति के जीवन में बहुत समानताएं होती हैं

एक गाड़ी और व्यक्ति रूपी मशीन में बहुत सारी समानताएं होती हैं, यह अलग बात है कि व्यक्ति को यह सब दिखाई नहीं दे। व्यक्ति रूपी मशीन श्रीप्रभु की देन और कोई भी गाड़ी व्यक्ति की देन। किसी भी गाड़ी को ले लीजिए उसमें सफल जीवन के बहुत सारे सूत्र छिपे रहते हैं। जरा गौर करें कि एक गाड़ी में इंजिन होता है, गियर होते हैं, ब्रेक होते हैं, हैण्डिल होता है, पहिए होते हैं, बॉडी होती है, गाड़ी को चलने के लिए डीजल-पेट्रोल की जरूरत होती है, इस प्रकार व्यक्ति की मशीन में भी इसी प्रकार के यंत्र लगे हुए हैं, हाथ-पैर, आंखे-हृदय-मस्तिष्क, बुद्धि, बोली सहित अन्य अंग जो व्यक्ति की मशीन को चुस्त-दुरूस्त और सही रखते हैं।

अब यह अलग बात है कि व्यक्ति अपनी गाड़ी को तो अच्छे से रखता है, उसकी देखभाल करता है, उसकी रोज साफ-सफाई करता है, उसको निर्धारित गति के अनुसार चलाता है, खतरों को देखकर ब्रेक लगाता है, उसमें निर्धारित सवारी या फिर वजन ले जाता है और इसका मतलब होता है, वह गाड़ी अपनी निर्धारित उम्र तक बिना रूके, बिना झुके और बिना थके आराम से पहुंचती है। यही स्थिति व्यक्ति की मशीन के साथ है यदि कोई व्यक्ति अपने शरीर के अच्छे से देखभाल करता है, शरीर की आवश्यकता के अनुसार खान-पान करता है, कसरत-योगाभ्यास करता है, जीवन में सकारात्मकता को अपनाता है, अच्छी सोच, अच्छे विचार और अच्छे कर्म करता है और प्रकृति के अनुसार अपने शरीर को रखता है जो फिर ऐसा व्यक्ति स्वस्थ रहकर अपने जीवन को जीवन के उच्चतम प्रतिमानों तक ले जाता है।

जिस प्रकार से गाड़ी के इंजिन को सही रखने के लिए उस पर अतिरिक्त भार नहीं डालना चाहिए, उसकी क्षमता के अनुसार संचालन होना चाहिए, समय-समय पर उसकी देखभाल होती रहनी चाहिए उसी प्रकार व्यक्ति के भीतरी अंग-हृदय, लीवर, फेफेड़े, मस्तिष्क, आमाशय, आंते और पैंक्रियाज सहित व्यक्ति की मशीन के इंजिन है, यदि इनका रख-रखाव सही रखा जाए, समय-समय पर इनका चेकअप करवाया जाए तो फिर व्यक्ति की मशीन निर्धारित अवधि तक अवश्य चलेगी।

दूसरा गाड़ी दुर्घटना से बचाने के लिए समय पर और तुरंत ब्रेक लेना अति आवश्यक है, अन्यथा वह कभी भी दुर्घटनाग्र्रस्त हो जाएगी, ठीक इसी तरह व्यक्ति ने समय रहते अपने विवेक को उपयोग में नहीं लिया तो उसका जीवन भी गलत रास्ते पर जाते देर नहीं लगेगी क्योंकि उसके सामने पल-पल लोभ-लालच स्वार्थ, शॉटकर्ट बेईमानी, आलस्य और अंधी होड़ सामने खड़ी होती है, रास्ते के बीच में खड़ी होती है, व्यक्ति के पीछे भागती रहती हैं, उसको पथ भ्रष्ट करने के लिए लालच का, सफलता का ऑफर देती रहती है, जिस भी व्यक्ति ने इन सबकी तरफ एक भी पल देख लिया, समझो की वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया, अपने पथ से डिग गया और समय से पूर्व वह एक बार ही नहीं हजारों बार घुट-घुटकर मरता रहा। आइए अपने जीवन को सार्थकता की ओर ले चलें।

प्रेरणा बिन्दु:- 
कभी अगाड़ी कभी पिछाड़ी
जीवन ज्यौं एक गाड़ी है
समझ न पाए जो जीवन को
समझो वह अनाड़ी है।

 

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