व्यक्ति के भीतर खुशियों का बहुत बड़ा खजाना है

Samachar Jagat | Saturday, 13 Oct 2018 04:05:41 PM
There is a huge treasure of happiness within the person

आज देखो वही व्यक्ति खुशी की तलाश में, सुख की तलाश में, शांति की तलाश में, समृद्धि की तलाश में और शोहरत की तलाश में इधर से उधर घूमता रहता है, भटकता रहता है और भौतिक वस्तुओं के संग्रह में पागल सा हो गया है। अर्थात् धन प्राप्ति को ही अंतिम और प्रथम उद्देश्य मान बैठा है और इसके लिए वह बाहरी संसार में अपने अनमोल और दुर्लभ जीवन को तार-तार कर देता है। जबकि असली आनंद, सुख, समृद्धि और स्थायी शांति का बहुत बड़ा खजाना तो उसके भीतर होता है। भीतर का खजाना केवल और केवल दिल की आंखों से दिखता है, मन की आंखों से दिखता है। व्यक्ति के भीतर अनगिनत नियामतों का अथाह भण्डार होता है और व्यक्ति उस खजाने में से सुख, आनंद, शांति और समृद्धि निकाल कर आनंदमयी जीवन जी सकता है।

यह कटु सत्य है कि आप अपने भीतर के खजाने में से अपनी मन चाही चीजें बहुत आसानी से निकाल सकते हैं जिस प्रकार से टीवी पर अपनी मनपसंद का कार्यक्रम देखने के लिए उसके चैनल को रिमोट से बटन दबाकर बदलना पड़ता है, उसी तरह आप अपने मन के पोजिटिव बटन को दबा दीजिए, फिर देखिए आपके मन-मस्तिष्क और दिल में से आनंद की रसधारा फूट-फूटकर बहने लगेगी, समृद्धि, कुलांचे भरने लगेगी, शांति रोम-रोम से छलकने लगेगी और अच्छाई-सच्चाई कर्म और जबान में स्थायी रूप से विराजने लगेगी।

आपको प्रत्येक व्यक्ति में अच्छाई मुस्कुराती दिखाई देने लगेगी, शांति का वह मसीहा दिखने लगेगा, समृद्धि का खजाना उसमें नजर आएगा, उसमें ईमान का जहान नजर आने लगेगा, कल्याण का वह पर्याय दिखने लगेगा और इसका सीधा सा अर्थ यही निकल कर आता है कि आप स्वयं को बहुत सुख में पाएंगे, आनंद में पाएंगे, चित्त को बहुत शांत और सम पाएंगे, समृद्धि को आपके इर्द-गिर्द घूमते पाएंगे और फिर इसका एक मतलब यह भी होगा कि आपकी तरफ लोग चुबंक की तरह खिंचते चले आएंगे क्योंकि आपने महान जीवन और सार्थक जीवन का महान रहस्य-महान खजाना जो कि व्यक्ति के भीतर होता है, उसको ढूंढ़ लिया है, उसके महत्व को जान लिया है और इसीलिए आप प्रेम, परोपकार, सद्कर्म, सुख-शांति और समृद्धि का पर्याय बन गए हैं।

प्रेरणा बिन्दु:- 
यदि व्यक्ति को सबसे अधिक सुख-शांति-समृद्धि और मुस्कुराहट देने वाला कोई है तो वह स्वयं है और वह ऐसा केवल एक पल में ऐसा कर सकता है भीतर के वैभव के ढ़क्कन को खोलकर।



 

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