स्वयं का स्वयं से बेहतर कोई मूल्यांकनकर्ता नहीं होता

Samachar Jagat | Thursday, 11 Apr 2019 04:33:03 PM
There is no better evaluator than myself

आज का इंसान बहुत बड़े भ्रम में जी रहा है, वह दुनिया को जानता है लेकिन खुद को नहीं जानता, वह अपने परिचितों को जानता है लेकिन खुद को नहीं जानता, अपने रिश्तेदारों को अच्छे से जानता है पर खुद को थोड़ा सा भी नहीं जानता, अपने परिजनों को तो बहुत अच्छे से जानता है लेकिन खुद को बिल्कुल भी जानने का प्रयास नहीं करता है। वह सबको जानता है लेकिन सबकी नहीं मानता है वह श्रीप्रभु को मानता है लेकिन श्रीप्रभु की नहीं मानता है। उसके सामने किसी का जिक्र करते ही वह बिना सोचे समझे तुरंत ही बोल पड़ता है कि अरे! उसको तो मैं बहुत अच्छे से जानता हूं, वह तो ऐसा है वैसा है, लेकिन स्वयं कैसा है, इसका वह तनिक भी चिंतन-मंथन नहीं करता है।

एक बार एक व्यक्ति अपने पड़ौसी के लडक़े को अपने घर पर छोडक़र किसी काम से बाहर गया। उस व्यक्ति को यह अच्छे से मालूम था कि इस लडक़े को सेब बहुत पसंद हैं अर्थात् वह एक तरह से उस लडक़े की परीक्षा लेना चाहता था। लडक़ा घर से अंदर बैठ गया, उसके सामने एक दम ताजा मीठे सेबों का एक कटोरा रखा हुआ था, लेकिन लडक़े ने उन सेबों को छूने की तो बात अलग टोकरी तक को नहीं छूंआ। काफी देरी के बाद वह व्यक्ति अपने घर पर आया, उसने उस लडक़े को वहीं पर बैठे हुए पाया और टोकरे के सारे सेब सुरक्षित थे। व्यक्ति ने आते ही लडक़े से कहा- अरे! तूने सेब नहीं खाए, सेब तो खाने के ही होते हैं और तीसरी बड़ी बात आपको सेब पसंद भी तो बहुत हैं।

व्यक्ति से ऐसी बातें सुनकर धीर-गंभीर होकर बोला- अंकल जी, इन सेबों पर मेरा कोई अधिकार नहीं था, मैं इनको कैसे काम में लेता? इस पर व्यक्ति ने कहा- अरे! तू यहां पर अकेला ही तो था, तुझे सेबों को खाते हुए कौन देख रहा था। व्यक्ति ने ऐसा कहने पर लडक़े ने कहा कि अंकल जी मुझे मैं ही देख रहा था, मुझे ईश्वर देख रहा था, मुझे मेरी आत्मा देख रही थी और व्यक्ति का स्वयं से बढक़र कोई मूल्यांकनकर्ता नहीं होता। छोटे से लडक़े से ऐसा सार भरा जवाब सुनकर उस व्यक्ति का हृदय गदगद हो गया क्योंकि वह चाहता ही ऐसा था। प्रिय युवाओ, जरा थोड़ा सा चिंतन-मंथन करें स्वयं के जीवन के बारें, स्वयं की कमियों के बारे में, तभी आपकी पहचान औरों से अलग बनेगी, अच्छी बनेगी और सम्मान की बनेगी। हम अपनी कमियों की तरफ ध्यान दें, उन्हें दूर करें तो जीवन में आनंद भी भरपूर होंगे।

प्रेरणा बिन्दु:- 
बेशक सारे जमाने के बारे में जान लें, लेकिन सबसे अधिक फायदा तो स्वयं के बारे में जानने से ही होगा क्योंकि स्वयं की दिशा ही दशा तय करती है।



 

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