संघर्ष के पर्याय थे-जॉर्ज बर्नार्ड शॉ

Samachar Jagat | Monday, 30 Jul 2018 09:47:18 AM
There were alternatives to conflict-George Bernard Shaw

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हमेशा एक बात पर जोर देते थे और कहते थे-‘आप कुछ देखते हैं तो कहते हैं क्यों? लेकिन मैं असंभव से सपने देखता हूं और कहता हूं क्यों नहीं?’ 20वीं सदी के महान नाटककार व लघु कथा लेखक जार्ज बर्नार्ड शॉ लेखनी के कायल दुनिया भर में हैं। आपका जन्म 26 जुलाई 1856 डबलिन, आयरलैण्ड में हुआ।

आपको अपनी साहित्यिक सेवा के लिए नोबेल पुरस्कार 1925, आस्कर अवार्ड 1938 तक मिला आपकी चर्चित कृतियों में पिगमेलियन, हार्ट बेकहाऊस, मेजर बारबरा, मेन एण्ड सुपरमैन और सेंट जॉन आदि। आपकी जिंदगी किसी प्रेरक कहानी से कम नहीं है। आपने अपनी शिक्षा अनेकों समस्याओं और गरीबी में हुई और उनकी यह साहित्य सेवा के प्रति लगन ही थी कि दुनिया के इतने बड़े पुरस्कार और सम्मान मिले।

 इनको शेक्सपियर के बाद दुनिया का श्रेष्ठतम नाटककार माना जाता है। जीवन के प्रारम्भिक दौर में उन्हें अनेकों कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उनको सिविल सर्वेंट, क्लर्क और असफल व्यापारी का काम भी करना पड़ा। एक बार शॉ ने किसी से साहित्य का पेशा चुनने के लिए पूछा तो उन्हें जवाब मिला- ‘जीविका के लिए साहित्य को अपनाने का मुख्य कारण था कि लेखक को पाठक देखते नहीं है, इसलिए उसे अच्छी पोशाक की जरूरत नहीं होती। वकील, डॉक्टर, व्यापारी या कलाकार बनने के लिए मुझे साफ कपड़े पहनने पड़ते और अपने घुटने व कोहनियों से काम लेना छोड़ना पड़ता।’

साहित्य तो एक ऐसा सभ्य पेशा है जिसकी अपनी कोई पोशाक नहीं होती है। इसीलिए शॉ ने इस पेशे को चुना है। उनके फटे जूते और छेद वाला पायजामा घिस-घिसकर काले से हरा-भूरा हो गया। ओवरकोट, बेतरतीब कॉल और बेडौल हो चुका पुराना टॉप यही उनकी पोशाक थी। बहुत लंबे समय तक शॉ लिखते गए लेकिन उनकी किसी भी रचना को प्रकाशन के योग्य नहीं समझा गया। किसी प्रकाशक ने कुछ पुराने ब्लॉक खरीदकर स्कूलों में इनाम देने के लिए कुछ किताबें तैयार करवाई। 

उसने जॉर्ज से कहा कि वे ब्लॉकों के नीचे छापने के लिए कुछ कविताएं लिख दें। लेकिन शॉ को इसमें कोई धन प्राप्ति की उम्मीद नहीं थी। लेकिन उनके आश्चर्य का कोई ठिकाना नहीं रहा जब प्रकाशक ने उन्हें धन्यवाद पत्र के साथ पांच शिलिंग भी भेजे। अपने साहित्यिक जीवन के प्रारम्भिक नौ वर्षांे में लिखने की कमाई से वे केवल छह पौण्ड ही प्राप्त कर सके, लेकिन बावजूद इसके उन्होंने लिखना नहीं छोड़ा। और यही बड़ी वजह रही कि वे संघर्ष के सौन्दर्य से 20वीं शताब्दी के महान लेखक ही नहीं महान नाटककार और इंसान भी कहलाए, जो हमेशा प्रेरणा देते रहेंगे युगों-युगों तक।
 

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