विचार जीवन के सार होते हैं

Samachar Jagat | Monday, 10 Sep 2018 01:42:37 PM
Thoughts are the essence of life

कहते  हैं विचार ही जीवन का सार होते हैं क्योंकि व्यक्ति के जैसे विचार होते हैं वैसी ही उसकी क्रियाएं होती हैं और उसकी क्रियाएं ही उसकी आदते बन जाती हैं और उसकी आदतें ही उसका चरित्र बनता है और व्यक्तियों के चरित्र से मिलकर राष्ट्र का चरित्र बनता है। मेरे कुछ विचार इस प्रकार है- मनुष्य के अन्तर्मन में आत्म शक्ति, स्मरण शक्ति, कल्पना शक्ति, संकल्प शक्ति, इच्छा शक्ति, संगठन शक्ति एवं विवेक शक्ति निवास करती है, इनको विकसित करना, समझना और सदुपयोग में लेना उसकी क्षमता पर निर्भर करता है। 

एक आंख को दूसरी आंख देखने के लिए जिस प्रकार से दर्पण की आवश्यकता पड़ती है उसी प्रकार से मनुष्य की सारी शक्तियों को जानने, समझने और विकसित करने के लिए, असंभव को संभव बनाने के लिए अन्तर्दृष्टि की आवश्यकता पड़ती है। आमतौर पर व्यक्ति को अपनी दो आंखें दिखाई देती है, जिनसे वह बाहर का संसार देखता है, लेकिन ललाट पर जिस स्थान पर चंदन का तिलक लगाया जाता है उस स्थान पर दिव्य दृष्टि होती है। जिसे ज्ञान चक्षु भी कहा जाता है और इसी दृष्टि से भीतर का आनंद दिखाई देता है। यह व्यक्ति ही होता है कि वह किसी अच्छे काम के लिए अपने दो हाथ भी नहीं उठा पाता है और यह भी व्यक्ति ही होता है उसके दो हाथ उठने के साथ ही लाखों हाथ एक साथ उठ जाते हैं सर्वहित के लिए।

आंखों में देखने की शक्ति, कानों में सुनने की शक्ति, हाथों में करने की शक्ति, पैरों में चलने की शक्ति, नाक में सूंघने की शक्ति और जिह्वाा में चखने की शक्ति होती है लेकिन जब ये सारी शक्तियां मिल जाती है तो संगठन शक्ति कहलाती है। इसलिए जिस प्रकार से सारे अंग संगठित रहते हैं, पूरे शरीर को स्वस्थ-व्यस्त रखते हैं उसी प्रकार व्यक्तियों को संगठित रहकर देश के लिए संगठित रहकर काम करना चाहिए। यह त्रासदी ही कही जाएगी कि आज व्यक्ति चन्द्रमा और मंगल पर तो जा रहा है लेकिन वह अपने पड़ौसियों के यहां दो कदम भी सडक़ पार करके नहीं जा पाता है। अर्थात् चन्द्रमा-मंगल के बारे में तो सब कुछ जानता है लेकिन अपने पड़ौसियों के बारे में कुछ भी नहीं जानता है।


मुझे लगता है कि विज्ञान का युग आ रहा है और इंसान का युग जा रहा है क्योंकि हम इंटरनेट, फेसबुक, वाट्सएप, टेबलेट, लेपटॉप, मोबाइल, टीवी से तो अच्छे से जुड़े हुए हैं लेकिन दिलों से बहुत दूर पड़े हुए हैं। इस मोबाइल ने सभी को इतना मोबाइल कर दिया है कि हम कुछ क्षणों के लिए भी शांत, स्थिर और शगुन भरा जीवन नहीं जी सकते हैं, यह जी का जंजाल बन रहा है, काल बन रहा है या फिर खुशहाल बन रहा है, आने वाले समय के पास है इसका उत्तर। 

व्यक्ति को इस सुंदर पृथ्वी पर जीवन का सौभाग्य मिला है, अब यह उस पर निर्भर है कि वह कितनों के जीवन को आबाद करता है, अपने सद्कर्मो की छाप छोड़ता है और अपनी मृत्यु पर रोने वालों की कितनी तादाद छोड़ता है या फिर यौं ही समय को दिन-महीनों-वर्षो  में गुजार कर गुजर जाता है।

प्रेरणा बिन्दु:- 
गिरना जीवन का दस्तूर है लेकिन न गिरना सफलता से दूर है, गिरना साधारण काम है लेकिन गिरकर खड़े होना, चलना और लक्ष्य तक पहुंचना असाधारण बात है।
 



 

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