पेट्रोल-डीजल के दाम थामने की त्रिस्तरीय रणनीति

Samachar Jagat | Wednesday, 12 Sep 2018 01:06:32 PM
Three-tier strategy for petrol and diesel price hike

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केंद्र सरकार कच्चे तेल में उछाल से पेट्रोल-डीजल में लगी आग पर काबू करने के लिए त्रिस्तरीय रणनीति को अमल में लाने में जुट गई है। इसी कड़ी में ईरान और भारत ने तेल आपूर्ति के वैकल्पिक रास्तों की तलाश तेज कर दी है ताकि चार नवंबर से लागू होने वाले अमेरिकी प्रतिबंधों से बचा जा सके। त्रिस्तरीय रणनीति के दूसरे कदम के तहत केंद्र ने पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में लाने की कवायद तेज करने का संकेत दिया है। जबकि दीर्घकालिक रणनीति के तहत इलेक्ट्रिक हाइब्रिड वाहनों को बढ़ावा देने की नीति लाने का ऐलान किया गया है। रणनीति का पहला संकेत ग्लोबल मोबिलिटी समिट से इतर ईरान के मंत्री अब्बास अरवौंदी के बयान से मिला।

 उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों की समय सीमा को देखते हुए दोनों देश तेल आपूर्ति जारी रखने के विकल्पों पर काम कर रहे हैं। अमेरिका को बाहरी बताते हुए अरवौंदी ने कहा कि भारत और ईरान को क्षेत्र में अपनी साझेदारी और मजबूत बनाने की जरूरत है। ईरान तेल आपूर्ति के बदले रुपए में कारोबार करने के साथ अपने जहाजों से तेल आयात की इजाजत देने पर राजी हो सकता है। दरअसल, अमेरिकी प्रतिबंध लागू होने के बाद डॉलर में काम करने वाले विदेशी बैंक या जहाजों को सुरक्षा गारंटी लेने वाली बीमा कंपनियों के लिए ऐसा करना बेहद मुश्किल होगा। यह कवायद ऐसे वक्त हो रही है, जब टू प्सल टू वार्ता के दौरान भारत ने ईरान पर प्रतिबंधों और रूस से हथियार खरीद के मामले में भारत को किसी तरह की छूट देने के कोई संकेत नहीं दिए हैं। जहां तक ईरान से तेल आपूर्ति इसलिए जरूरी है क्योंकि ईरान भारत को रियायती दाम पर कच्चा तेल देता है। जबकि सऊदी, यूएई जैसे देश भारत से प्रीमियम वसूलते हैं।

 ईरान तेल के बदले भुगतान के लिए ज्यादा समय देता है यानी ईरान भारत को उधारी पर भी तेल आपूर्ति करता है और इसके अलावा ईरान से कच्चे तेल की आवाजाही की लागत भी कम आती है। यहां यह बता दें कि ओपेक देशों की कटौती और अमेरिकी प्रतिबंधों की आहट से कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं। इसके अलावा ओपेक ने 10 लाख बैरल रोज आपूर्ति बढ़ाने का वादा नहीं निभाया है। मौजूदा आपूर्ति के तहत 52 डालर प्रति बैरल होना चाहए दाम। देशभर में पेेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर मचे बवाल के बीच रविवार को राजस्थान को कड़ी राहत मिली। राज्य सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर वैट 4 फीसदी घटा दिया। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने रविवार को हनुमानगढ़ जिले के रावतसर में गौरव यात्रा के दौरान इसकी घोषणा की। मुख्यमंत्री राजे की घोषणा के बाद अब पेट्रोल पर 30 की जगह 26 फीसदी और डीजल पर 22 फीसदी की जगह 18 फीसदी वैट रह गया है। यह कमी रविवार की रात 12 बजे से लागू हो गई। वैट में कमी के बाद जयपुर में पेट्रोल 2.21 रुपए और डीजल 2.19 रुपए लीटर सस्ता हुआ है। पेट्रोल जो 83.42 रुपए प्रति लीटर था वह अब 81.21 रुपए और डीजल 77.31 रुपए प्रति लीटर के बजाए अब 75.12 रुपए प्रति लीटर हो गया है।

 राजे ने यह घोषणा सोमवार 10 सितंबर को आयोजित भारत बंद से कुछ घंटे पहले की। ऐसे में कीमतों की कमी करने से पड़ने वाले करीब 2 हजार करोड़ रुपए के वित्तीय भार को राज्य सरकार वहन करेगी। यहां यह बता दें कि राज्य सरकार की ओर से वैट में की गई कटौती इसलिए भी अहम है क्योंकि हाल ही केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाने से मना कर दिया था और राज्यों से कहा था कि राज्य अपना वैट घटाएं। केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल पर वैट घटाए जाने के आग्रह के बावजूद भाजपा शासित राज्यों ने अभी तक पेट्रोल-डीजल पर वैट में कमी नहीं की थी। 

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे द्वारा वैट में 4 फीसदी की कमी किए जाने की पहल के बाद महाराष्ट्र की भाजपा सरकार ने भी पेट्रोल-डीजल के दाम घटाने के संकेत दिए हैं। कांग्रेस की हिमाचल प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल ने कहा कि पंजाब की कांग्रेस और कर्नाटक में जेडीएस कांग्रेस की गठबंधन सरकारें राज्य में जल्द ही पेट्रोल-डीजल कीमतों को कम करेगी। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की ओर से पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाए जाने की मांग की जा रही है, क्योंकि तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई बढ़ती है। जीएसटी के दायरे में लाने से पेट्रोल और डीजल के दामों में 15 से 18 रुपए तक की कमी आएगी। कांंग्रेस के नेता अजय माकन का कहना है कि 2014 से अब तक पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 211.7 फीसदी और डीजल पर 433 फीसदी बढ़ चुकी है। 

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि देश भर मेें 16 अगस्त से पेट्रोल-डीजल के दाम रोजाना या तो बढ़े हैं या स्थिर रहे हैं। घटे नहीं। सोमवार को पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों के विरोध में कांग्रेस सहित 21 विपक्षी दलों की ओर आयोजित भारत बंद के एक दिन पहले रविवार को भी पेट्रोल 12 पैसे और डीजल 10 पैसे प्रतिलीटर महंगा हुआ। कांग्रेस और विपक्षी दलों द्वारा पेट्रोल-डीजल को जीएसटी दायरे में लाए जाने की मांग के बाद अब केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने भी कहा है कि अब जरूरी हो गया है कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाए। ये दोनों अभी जीएसटी में नहीं है, जिससे देश को 15 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। इसे जीएसटी में लाना उपभोक्ताओं सहित सभी के हित में होगा। प्रधान ने बीते सप्ताह शुक्रवार को कहा कि देश में ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय कारकों की वजह से हो रही है। केंद्र सरकार के प्रयासों से उम्मीद की जाती है कि पेट्रेाल-डीजल के दाम थामने में मदद मिलेगी।

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