अमेरिका ने चीन की हुआवेई को काली सूची में डाला

Samachar Jagat | Saturday, 25 May 2019 03:37:01 PM
US blacklist Huwai in China

अमेरिका-चीन के बीच व्यापार मोर्च पर जारी गतिरोध के बीच अमेरिका ने चीनी हुआवेई व उसकी सहयोगी कंपनियों को काली सूची में डाल दिया है। अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बीते सप्ताह बुधवार को अमेरिकी प्रौद्योगिकी पर खतरे का हवाला देते हुए राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दी। ट्रंप ने एक्जक्यूटिव आर्डर के जरिए यह घोषणा की। इस आदेश के जारी होते ही अमेरिका के वाणिज्य मंत्रालय ने हुआवेई और इसकी सहयोगी कंपनियों को ब्यूरो ऑफ इंडस्ट्री एंड सिक्योरिटी की संस्थान सूची में डाल दिया है। जिसके कारण अब हुआवेई का अमेरिकी कंपनियों के साथ कारोबार करना बहुत मुश्किल हो गया है। इससे हुआवेई को लेकर दोनों देशों के बीच पहले ही विवाद चल रहा है।

दुनिया की सबसे बड़ी दूरसंचार उपकरण निर्माता कंपनी हुआवेई को अमेरिकी बाजार से प्रतिबंधित करने के फैसले पर चीन ने कंपनी को काली सूची में डालने पर जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। चीन से कहा कि वह अपनी कंपनियों के हितों और अधिकारों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगी। हालांकि अमेरिका ने इस चीनी कंपनी पर प्रतिबंधों में 90 दिन की छूट देने का फैसला किया है। उसका कहना है कि भारी परेशानियों को रोकने के लिए कुछ समझ दिया जाना चाहिए। यह जरूर है कि इस देरी से प्रतिबंध के फैसले पर असर नहीं पड़ेगा। 

यहां यह बता दें कि अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए हुआवेई को पिछले हफ्ते एनटिटी लिस्ट में डाल दिया था। इस सूची में शामिल कंपनियां बिना लाइसेंस अमेरिकी फर्मों के साथ कारोबार नहीं कर सकती। अमेरिका कई सालों से यह आरोप लगाता रहा है कि हुआवेई के उपकरणों के जरिए चीन उसकी जासूसी कर रहा है। पिछले साल उसने अपने सहयोगी देशों से भी हुआवेई का बहिष्कार करने की अपील की थी। उससे कहने पर पिछले साल हुआवेई की सीएफओ मेग वांगझु की कनाडा में गिरफ्तारी हुई थी।

 हुआवेई पर प्रतिबंध लगाने के फैसले पर चीन ने कहा है कि वह अपनी कंपनियों के हितों और अधिकारों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा। हुआवेई पर प्रतिबंध के बाद अमेरिकी कंपनी गूगल ने उसके साथ अपनी पार्टनरशिप खत्म करने की घोषणा कर दी। अब वह हुआवेई को एंड्रॉयड का अपडेट देना बंद कर देगी। यानी हुआवेई स्मार्टफोन में गूगल प्ले स्टोर, जीमेल और यूट्यूब जैसे ऐप्स की सेवा बंद हो जाएगाी। ऐसे में हुआवेई को एंड्रॉयड के पब्लिक वर्जन से काम चलाना होगा। यहां बता दें कि गूगल का एंड्रॉयड ओपन सोर्स प्रोजक्ट कोई भी इस्तेमाल कर सकता है। पूरी दुनिया में 2.5 अरब डिवाइस इस प्रोजेक्ट के साथ ही एक्टिव है। 

वैसे गूगल इस प्रोजेक्ट में अन्य लोगों को टेक्नीकल सपोर्ट देगा, लेकिन हुआवेई को यह सहूलियत नहीं मिलेगी। देखना है कि हुआवेई इस स्थिति से निपटने ेलिए क्या कदम उठाती है। सच्चाई यह है कि टं्रप भले ही चीनी कारोबार को तबाह करना चाहते हों पर इससे नुकसान हर किसी का हो रहा है। कुछ समय पहले चीनी उत्पादों पर 25 फीसदी कर लगाने से अमेरिकियों को चीनी सामान महंगी दरों पर खरीदना पड़ रहा है क्योंकि उनके सामने तत्काल इनका विकल्प नहीं है। अभी ऐपल जैसी कई कंपनियां अपने हार्डवेयर चीन में ही बनवाती है। चीन के जवाबी कदमों से उनका प्रॉडक्शन प्रभावित हुआ तो क्या होगा? कहना मुश्किल है। 

अमेरिका में इस कमी की भरपाई का जोखिम शायद ही कोई कंपनी ले क्योंकि कोई नहीं जानता कि प्रतिबंध कब तक लागू रहेगा। फिर रातोंरात किसी चीज की मैन्युफैक्चरिंग शुरू की नहीं की जा सकती। ट्रंप खुद एक कारोबारी रहे हैं लिहाजा यह पहलू उनकी नजर में भी होंगे ही। लेकिन उनके फैसलों से विश्व कारोबार में जो अनिश्चितता पैदा हुई है, उससे उबरने का कोई उपाय उन्हें जल्द ही खोजना होगा।



 

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